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शाक-भाजी और जैविक खेती से ही आय होगी दोगुनी : एपीसी

Sat, 05 Jun 2021 01:52 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jun 2021 01:52 AM IST
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Income will be doubled only from vegetable and organic farming: APC
उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंडलीय खरीफ गोष्ठी की वर्चुअल बैठक कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सभागार में हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कृषकों को आय में वृद्धि करने के लिए शाक-भाजी उत्पादन और जैविक खेती को अपनाने की सलाह दी। कहा कि खाद का बफर स्टॉक चाहिए हो तो शासन को अवगत कराएं। खाद, बीज, बिजली, पानी की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। गेहूं खरीद के लिए जरूरत हो तो अब भी कांटे बढ़ाएं जाएं। उन्होंने प्रत्येक ब्लॉक पर मनरेगा से मॉडल गो संरक्षण केंद्र बनाने का निर्देश दिया।
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कृषि उत्पादन आयुक्त ने सभी अधिकारियों एवं कृषकों को कोरोना संकट के दौरान किए गए कार्यों की बधाई दी। कहा कि अन्नदाता की मेहनत से प्रदेश में रिकॉर्ड गेहूं का उत्पादन हुआ और रिकॉर्ड खरीद कर भुगतान किया गया है। अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खरीफ में किसानों के लिए पर्याप्त कृषि निवेश की व्यवस्था है। गोष्ठी में मंडलायुक्त गौरव दयाल, डीएम चंद्रभूषण सिंह, सीडीओ अंकित खंडेलवाल, संयुक्त कृषि निदेशक सतवीर सिंह, उप निदेशक कृषि अनिल कुमार, उपनिदेशक रिसर्च डॉ वीके सचान, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, जिला उद्यान अधिकारी एनके साहनिया आदि उपस्थित रहे।
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एक हेक्टेयर में धान 26.30 क्विंटल हो रहा
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि जनपद का कुल क्षेत्रफल 3.71 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 3.04 लाख हेक्टेयर में खेती है। जनपद की फसल सघनता 175 प्रतिशत है। खरीफ में 2.14 लाख हेक्टेयर में खाद्यान्नों एवं तिलहन की खेती होती है। खरीफ की मुख्य फसल धान, बाजरा, मक्का और अरहर है। जनपद में धान 84162, बाजरा 93716, मक्का 21106 एवं अरहर की बुवाई 10264 हेक्टेयर क्षेत्रफल में है।
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एक-एक रैक डीएपी और यूरिया की दरकार
अलीगढ़। गोष्ठी में मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि मंडल में बीज की कमी नहीं है, लेकिन डीएपी और यूरिया की एक-एक रैक (मालगाड़ी) और उपलब्ध करा दी जाए तो किल्लत नहीं होगी। तहसील कोल के ग्राम बरोठा से प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध उपाध्याय ने कहा कि यदि खेती किसानी में अन्य विधाओं का समावेश कर लिया जाए तो खेती किसानी घाटे का सौदा नहीं रह जाएगी।
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