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अलीगढ़ः आधी आबादी मांगे घर से संसद तक बराबर की हिस्सेदारी

Sun, 02 Jan 2022 12:46 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Sun, 02 Jan 2022 12:46 AM IST
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Half the population demands equal share from house to Parliament
ताला नगरी अमर उजाला कार्यालय पर संवाद कार्यक्रम में उपस्थित महिलाएं। - फोटो : Rupesh
जब हमारी तादाद बराबर की है तो अधिकार भी पुरुषों जैसे समान मिलने चाहिए। मगर होता ऐसा नहीं है। समानता की बातें जरूर की जाती हैं, लेकिन उसे हकीकत का अमलीजामा नहीं पहनाया जाता। वक्त के साथ बातें और एलान पीछे छूट जाते हैं। केवल याद रह जाता है कि उनके वोट कैसे हासिल किए जाएं। लोक-लुभावने वादे भी किए जाते हैं। बहरहाल, बहुत हो गई इधर-उधर की बातें।
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अब आधी आबादी को भी घर से संसद तक बराबर की हिस्सेदारी और समान अधिकार मिलने चाहिए। महंगाई भी खाने का स्वाद बिगाड़ रही है। यह कहना है उन महिलाओं का, जिन्हें कार्यक्रम में तालानगरी स्थित अमर उजाला कार्यालय में आमंत्रित किया गया था। अमर उजाला अपराजिता के तहत विषय था- ‘अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में नवनिर्वाचित सरकार से क्या उम्मीदें हैं और उनके मुद्दे क्या होंगे’। इन महिलाओं में गृहणी से लेकर शिक्षिका तक थीं, जिन्होंने अपनी बात बेबाकी से कहीं। 
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विचार मंथन में निकला सार
-आबादी के अनुसार, घर से संसद तक हिस्सेदारी।
-बचपन से ही बालिकाओं का सशक्तीकरण करें।
-प्राथमिक से उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी ले सरकार।
-बालिकाओं के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रम ज्यादा हों।
-महंगाई पर सरकार को लगाम लगानी चाहिए।
-बालिका-महिला सुरक्षा को और प्रभावी बनाया जाए।
-महिलाओं के लिए सरकार लगाए लघु उद्योग।
-लैपर्ड टीम में महिला कांस्टेबल होनी चाहिए।
-112 कंट्रोल रूम का सेंटर हर जिले में हो।
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महिलाओं के बोल
मेरी सोच से सभी महिलाएं सहमत होंगी कि उन्हें पढ़ाई, नौकरी से लेकर संसद तक पुरुषों के समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। नवनिर्वाचित सरकार से मैं उम्मीद करती हूं कि वह नारी सुरक्षा लेकर व्यापक इंतजाम करे। नारी सशक्तीकरण के बारे में सरकार को सोचना होगा।  
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-डॉ. वीना चौहान, एसोसिएट प्रोफेसर, डीएस कॉलेज


चुनाव में वोट हासिल करने के लिए पार्टियां रिझातीं हैं। लोक-लुभावने वादे करते हैं। मेरा मानना है कि इसके बजाय उन्हें नारी सशक्तीकरण के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। उसे सशक्त बनाने की जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी। बालिकाओं के लिए बुनियादी शिक्षा पर जोर देना होगा।
-डॉ. सुनीता गुप्ता, विभागाध्यक्ष, चित्रकला, डीएस कॉलेज


दावे से मैं कह सकती हूं कि बुनियादी शिक्षा मजबूत हुई तो आगे की शिक्षा खुद-ब-खुद मजबूत हो जाएगी। इसलिए नवनिर्वाचित सरकार को बालिकाओं की बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वह अभिभावक की भूमिका में रहे।
-डॉ. निदा, शिक्षिका, प्राइमरी स्कूल


नवनिर्वाचित सरकार से मैं चाहती हूं कि वह बालिकाओं व महिलाओं को ध्यान में रखकर ज्यादा से ज्यादा व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करे। जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तब उनका सशक्तीकरण हो ही जाएगा। समाज में आधी आबादी को समान अधिकार मिलना चाहिए।
-माहे जेहरा, शिक्षिका, प्राइमरी स्कूल


गांव में महिलाओं से संबंधी लाभकारी योजनाओं की जानकारी नहीं पहुंच पाती। इसलिए नवनिर्वाचित सरकार एक रोडमैप तैयार करके उसकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाए। सरकार को लघु उद्योग स्थापित करना चाहिए, जिसमें अशिक्षित व कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को रोजगार मिल सके।

-निलयम वार्ष्णेय, गृहणी


नवनिर्वाचित सरकार को गांव-गांव में जनकल्याणकारी योजनाएं पहुंचानी चाहिए। योजनाएं उन तक पहुंचे, जिसके वह पात्र हैं। नारी सशक्त होंगी, तभी देश सशक्त होगा। गांव में बालिकाओं की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को जागरूक करना होगा। इस पर सरकार को गंभीर से सोचना होगा।
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