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मृत बेटे के स्पर्म से घर में गूंजी पोतियों की किलकारी
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2016 01:26 AM IST
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नवरात्र के दूसरे दिन उस परिवार में ‘पोतियों’ की किलकारियां गूंजी, जिसके दोनों चिराग असमय बुझ गए थे। हाथरस के बुजुर्ग दंपति के ब्लड कैंसर से पीड़ित बेटे के प्रिजर्व्ड स्पर्म से एक सरोगेट मदर ने टेस्ट ट्यूब विधि के जरिये दो कन्याओं को जन्म दिया है। जिस घर में ये दो कन्याएं आई हैं उस घर का मुखिया अपने दोनों अविवाहित बेटों को खो चुका था। उनकी वीरान जिंदगी में दोनों पोतियां नए जीवन की उम्मीद बनकर आई हैं। यह शानदार उपलब्धि बेलामार्ग स्थित जीवन हॉस्पिटल एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर ने दर्ज की है।
हाथरस निवासी विनय कुमार एवं नीता सिंह (परिवर्तित नाम) के दो पुत्र थे। बड़ा बेटा राजीव (परिवर्तित नाम) बीटेक करने के बाद गुड़गांव में जॉब कर रहा था, जहां उसकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी। छोटा बेटा अरुण (परिवर्तित नाम) पढ़ाई कर रहा था, उसको ब्लड कैंसर हो गया, जिसमें कीमोथैरेपी की सलाह दी गई। चिकित्सकों का कहना था कि कैंसर थैरेपी के बाद अरुण के अंडकोष खराब हो जाएंगे और वह पिता बनने की क्षमता खो देगा। इसलिए उसका वीर्य कैंसर थैरेपी पूरा होने से पहले ही प्रिजर्व कर लिया गया। ताकि वह बाद में टेस्ट ट्यूब बेबी विधि से पिता बन सके। दुर्भाग्यवश इलाज के दौरान अरुण की असमय मृत्यु हो गई।
पूरी तरह टूटे हुए उसके माता-पिता ने डॉ. जयंत शर्मा व डॉ. दिव्या चौधरी से संपर्क किया। जीवन हॉस्पिटल के चिकित्सकों के प्रयास से मरणोपरांत व्यक्ति के प्रिजर्व्ड स्पर्म में से शुक्राणु अलग किए गए और एक सरोगेट मदर के अंदर भ्रूण बना कर प्रत्यारोपित कर दिए गए। नौ अप्रैल का दिन अपने दोनों बेटों को खो चुके पिता के लिए खुशियां लेकर आया। अस्पताल में डॉ. दिव्या चौधरी और डॉ. जयंत शर्मा की टीम ने सीजेरियन ऑपरेशन कर दो स्वस्थ बेटियों को जन्म दिलाया। एक बेटी का वजन 2 किलो 900 ग्राम और दूसरी बेटी का वजन 2 किलो 500 ग्राम है।
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हाथरस निवासी विनय कुमार एवं नीता सिंह (परिवर्तित नाम) के दो पुत्र थे। बड़ा बेटा राजीव (परिवर्तित नाम) बीटेक करने के बाद गुड़गांव में जॉब कर रहा था, जहां उसकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी। छोटा बेटा अरुण (परिवर्तित नाम) पढ़ाई कर रहा था, उसको ब्लड कैंसर हो गया, जिसमें कीमोथैरेपी की सलाह दी गई। चिकित्सकों का कहना था कि कैंसर थैरेपी के बाद अरुण के अंडकोष खराब हो जाएंगे और वह पिता बनने की क्षमता खो देगा। इसलिए उसका वीर्य कैंसर थैरेपी पूरा होने से पहले ही प्रिजर्व कर लिया गया। ताकि वह बाद में टेस्ट ट्यूब बेबी विधि से पिता बन सके। दुर्भाग्यवश इलाज के दौरान अरुण की असमय मृत्यु हो गई।
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पूरी तरह टूटे हुए उसके माता-पिता ने डॉ. जयंत शर्मा व डॉ. दिव्या चौधरी से संपर्क किया। जीवन हॉस्पिटल के चिकित्सकों के प्रयास से मरणोपरांत व्यक्ति के प्रिजर्व्ड स्पर्म में से शुक्राणु अलग किए गए और एक सरोगेट मदर के अंदर भ्रूण बना कर प्रत्यारोपित कर दिए गए। नौ अप्रैल का दिन अपने दोनों बेटों को खो चुके पिता के लिए खुशियां लेकर आया। अस्पताल में डॉ. दिव्या चौधरी और डॉ. जयंत शर्मा की टीम ने सीजेरियन ऑपरेशन कर दो स्वस्थ बेटियों को जन्म दिलाया। एक बेटी का वजन 2 किलो 900 ग्राम और दूसरी बेटी का वजन 2 किलो 500 ग्राम है।
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