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Aligarh News: नेपाल बार्डर पर 500 करोड़ का माल फंसा
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प्रदीप चौधरी, महासचिव (इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन)
नेपाल सरकार द्वारा आयातित वस्तुओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य अनिवार्य करने के फैसले के छह दिन बाद भी अलीगढ़ सहित प्रदेश के करीब पांच हजार से अधिक कारोबारियों का संकट हल नहीं हुआ है। करीब 500 करोड़ रुपये का माल फंस गया है। (स्रोत- इंडो-नेपाल एक्सपोर्ट एसोसिएशन)
ताला-हार्डवेयर और अन्य उत्पादों के हजारों डिब्बे गोदामों और कस्टम बॉर्डर पर सड़ रहे हैं, क्योंकि उन पर नई गाइडलाइन के अनुसार एमआरपी प्रिंट नहीं है। हाल ही में नेपाल सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत विदेश से आने वाले हर उत्पाद पर एमआरपी का होना अनिवार्य कर दिया गया है। कारोबारियों का कहना है कि उनके पास पहले से ही भारी मात्रा में पैकिंग मेटेरियल तैयार है, जिसमें अब संशोधन करना नामुमकिन है।
बॉर्डर और गोदामों में थमा माल
वर्तमान में स्थिति यह है कि हजारों टन माल ट्रांसपोर्टरों के गोदामों में पड़ा है। भारी मात्रा में माल नेपाल कस्टम (सीमा) पर अटका हुआ है। निर्यातकों के पास करोड़ों रुपये के ऑर्डर पैक रखे हैं, जिन्हें अब दोबारा खोलना पड़ेगा। निर्यातक नेपाल सरकार और भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मांग है कि या तो आदेश को वापस लिया जाए या फिर पुराने स्टॉक को निकालने के लिए कम से कम छह महीने की राहत दी जाए।
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क्या कहते हैं कारोबारी
नेपाल सरकार को कम से कम छह महीने का समय देना चाहिए था। अचानक लिए इस फैसले से पूरा व्यापार रुक गया है और व्यापारी मानसिक व आर्थिक दबाव में हैं।
- प्रदीप चौधरी, महासचिव (इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन)
पैकिंग मेटेरियल फिर से बनवाना पड़ेगा। जो माल पैक हो चुका है, उसे खोलकर दोबारा एमआरपी प्रिंट करनी होगी। इस प्रक्रिया में करोड़ों का नुकसान तय है।
- मधु गुप्ता, अध्यक्ष
हमारे ऑर्डर पैक रखे हैं, कुछ कस्टम पर फंसे हैं। नेपाल के व्यापारी भी कुछ स्पष्ट नहीं कह पा रहे हैं। हमारा पैसा और माल दोनों बीच में फंस गए हैं। - संजीव गुप्ता, निर्यातक
यह सरकार का निंदनीय फैसला है, जिसमें व्यापारियों के हितों की अनदेखी की गई है। अचानक काम रुकने से भारी क्षति होने की संभावना है। -अमित गुप्ता सुपर, निर्यातक
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ताला-हार्डवेयर और अन्य उत्पादों के हजारों डिब्बे गोदामों और कस्टम बॉर्डर पर सड़ रहे हैं, क्योंकि उन पर नई गाइडलाइन के अनुसार एमआरपी प्रिंट नहीं है। हाल ही में नेपाल सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत विदेश से आने वाले हर उत्पाद पर एमआरपी का होना अनिवार्य कर दिया गया है। कारोबारियों का कहना है कि उनके पास पहले से ही भारी मात्रा में पैकिंग मेटेरियल तैयार है, जिसमें अब संशोधन करना नामुमकिन है।
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बॉर्डर और गोदामों में थमा माल
वर्तमान में स्थिति यह है कि हजारों टन माल ट्रांसपोर्टरों के गोदामों में पड़ा है। भारी मात्रा में माल नेपाल कस्टम (सीमा) पर अटका हुआ है। निर्यातकों के पास करोड़ों रुपये के ऑर्डर पैक रखे हैं, जिन्हें अब दोबारा खोलना पड़ेगा। निर्यातक नेपाल सरकार और भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मांग है कि या तो आदेश को वापस लिया जाए या फिर पुराने स्टॉक को निकालने के लिए कम से कम छह महीने की राहत दी जाए।
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क्या कहते हैं कारोबारी
नेपाल सरकार को कम से कम छह महीने का समय देना चाहिए था। अचानक लिए इस फैसले से पूरा व्यापार रुक गया है और व्यापारी मानसिक व आर्थिक दबाव में हैं।
- प्रदीप चौधरी, महासचिव (इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन)
पैकिंग मेटेरियल फिर से बनवाना पड़ेगा। जो माल पैक हो चुका है, उसे खोलकर दोबारा एमआरपी प्रिंट करनी होगी। इस प्रक्रिया में करोड़ों का नुकसान तय है।
- मधु गुप्ता, अध्यक्ष
हमारे ऑर्डर पैक रखे हैं, कुछ कस्टम पर फंसे हैं। नेपाल के व्यापारी भी कुछ स्पष्ट नहीं कह पा रहे हैं। हमारा पैसा और माल दोनों बीच में फंस गए हैं। - संजीव गुप्ता, निर्यातक
यह सरकार का निंदनीय फैसला है, जिसमें व्यापारियों के हितों की अनदेखी की गई है। अचानक काम रुकने से भारी क्षति होने की संभावना है। -अमित गुप्ता सुपर, निर्यातक

प्रदीप चौधरी, महासचिव (इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन)

प्रदीप चौधरी, महासचिव (इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन)

प्रदीप चौधरी, महासचिव (इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन)

प्रदीप चौधरी, महासचिव (इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन)