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पहियों पर थाम रही जिंदगी की डोर, 108 एंबुलेंस सेवा

Fri, 18 Mar 2016 01:52 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला,अलीगढ़/ दीपक शर्मा
ब्यूराे/अमर उजाला,अलीगढ़/ दीपक शर्मा Updated Fri, 18 Mar 2016 01:52 AM IST
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Getting hold the strings of life on wheels , the 108 ambulance service
एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूराे

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हादसे के बाद घटना स्थल से नजदीकी अस्पताल तक पहुंचने की अवधि में एक वाहन जिसके पहियों पर जिंदगी का सफर ठहरा हुआ होता है उसे एंबुलेंस कहते हैं।
कुछ दिनों पहले बदायूं में हुए हादसे में बिलारी के विधायक इरफान की मौत के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि हादसे के बाद जीवन की डोर थामने में मददगार यह एंबुलेंस अपने जिले में कितनी कामयाबी के साथ काम कर रही हैं। क्योंकि जिस एंबुलेंस में विधायक को अस्पताल से बड़े अस्पताल ले जाया जा रहा था,

उसके सिलेंडर में ऑक्सीजन नहीं थी। माना जा रहा है कि इसी के चलते विधायक की जान गई। क्या होना चाहिए इन एंबुलेंस में ड्रेसिंग मैटेरियल- बैंडएड (20), बैटाडिन सोल्यूशन (500 एमएल बोटल), कॉटन रौल (500 जीएम), क्रैप बैंडेज (15 सेंटीमीटर और 7 सेंटीमीटर)ड्रैसिंग पैड, इलास्टो प्लास्ट, गेज क्लाथ, प्लेन बैंडेज, हाइड्रोजिन पैरोक्साइड, माइक्रोपोर टेप, सर्जिकल स्पिरिट बॉटल (500 एमएल) सर्जिकल- एयरवेज नैसोफैरांजल, एंबुलेंस सर्विकल कॉलर, बेड पैन(प्लास्टिक), क्लिक क्लैंप्स, डिस्पो डिलिवरी किट, डिस्पो सिरिंज, फेस मास्क रेस्पाइरेटर, फेस मास्क बॉक्स, मैकिनतोश, ऑक्सीजन सिलेंडर पोर्टेबल, ऑक्सीजन मास्क(चिल्ड्रन और एडल्ट) स्ट्रिप ग्लूकोमीटर अन्य- व्हील चेयर, स्ट्रैचर कम ट्रॉली अन्य क्या है।
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जिले में स्थिति? अलीगढ़ जिले में 108 सेवा की 22 और 102 सेवा की 43 एंबुलेंस हैं। 108 सेवा इमरजेंसी जैसे एक्सीडेंट, विषाक्त पदार्थ का सेवन, अचानक तबियत खराब होना सहित कोई भी आपात सेवा हो, और उसके पीड़ित को नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल पुहंचाना हो, तो उस स्थिति में कॉल किया जाता है। जबकि 102 एंबुलेंस सेवा गर्भवती महिलाएं, जिन्हें तीन महीने का गर्भ है, उनको पीएचसी, सीएचसी, जिला महिला अस्पताल तक ले जाना और वापस लाने के लिए, प्रसूति के लिए महिला को अस्पताल ले जाने और वहां से वापस घर छोड़ने के लिए है।
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यह पूरी तरह नि:शुल्क सेवा है। कैसे होती है निगरानी? प्रत्येक एंबुलेंस में जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) है। एक कंपनी जो स्वास्थ्य विभाग को यह सेवा उपलब्ध करा रही, महीने में दो बार इनकी रेंडम चेकिंग करती है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त रिपोर्ट विभाग को भेजी जाती है। क्या है हालत जिले में एंबुलेंस की शहर में अधिकांश एंबुलेंस सही हालत में मिलीं। उममें आक्सीजन सिलेंडर, स्ट्रेचर, बैंडेज आदि सभी जरूरी उपकरण मौजूद थे।


सेवा 108 और सेवा 102 एंबुलेंस सेवा लगातार अच्छा काम कर रही है। कासिमपुर पावर हाउस में विस्फोट हुआ या कुछ बस पलटने के हादसे हुए हैं, उनमें सेवा ने बेहतर काम किया है -नीरज, जिला कोआर्डिनेटर ‘जब से एंबुलेंस सेवा शुरू हुई है, तब से अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत आदि मिली नहीं हैा। हम लगातार चेकिंग और निरीक्षण का काम करते हैं और रिपोर्ट शासन को भेजते हैं’ - अरूप कुमार राय, सीएमओ
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