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पूर्व विधायक सत्यपाल, जिलाध्यक्ष ने छोड़ी रालोद
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Tue, 11 Jul 2017 01:13 AM IST
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पूर्व विधायक सत्यपाल, जिलाध्यक्ष ने छोड़ी रालोद
- फोटो : Dig Vishal
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पूर्व विधायक चौधरी सत्यपाल सिंह ने रालोद से नाता तोड़ लिया है। उनके साथ जिलाध्यक्ष चौधरी कल्यान सिंह के अलावा तीन अन्य पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़ दी है। वजह चौधरी चरण सिंह के सपनों की पार्टी को अपने मूल सिद्धांत से भटकना बताया है। दोनों नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। उन्होंने कहा इस पर विचार करने के लिए 22 और 23 जुलाई को कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है।
रालोद के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष व खैर के पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह ने अमर उजाला को बताया कि पार्टी छोड़ने की जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को दी है। प्रदेश में किसान बदहाल है, खुदकुशी कर रहे हैं, बावजूद इसके पार्टी नेतृत्व संवेदनहीन है। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है, जबकि पार्टी अलग प्रदेश (हरित प्रदेश) के लिए संघर्ष छोड़ चुकी है। वे दूसरी पार्टी में जाने के सवाल से बचते रहे। कहा कि जल्द इस पर फैसला लेंगे। महानगर अध्यक्ष राज अग्रवाल, राजवीर सिंह, जयवीर सिंह ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है।
भाजपा में रह चुके हैं सत्यपाल
चौ. सत्यपाल सिंह पहले भी भाजपा में रह चुके हैं। 1994- 1995 में भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। विस टिकट न मिलने पर वह भाजपा से दूर हो गए। निर्दलीय लड़े तो हार गए। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह ने उन्हें वृंदावन में मिलने के लिए बुलाया तो वहां मान मनौव्वल हुआ। दोबारा भाजपा में आए और वर्ष 2000 तक रहे। वर्ष 2000 में रालोद में आए और 17 साल बाद अब रालोद छोड़ी है।
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रालोद के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष व खैर के पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह ने अमर उजाला को बताया कि पार्टी छोड़ने की जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को दी है। प्रदेश में किसान बदहाल है, खुदकुशी कर रहे हैं, बावजूद इसके पार्टी नेतृत्व संवेदनहीन है। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है, जबकि पार्टी अलग प्रदेश (हरित प्रदेश) के लिए संघर्ष छोड़ चुकी है। वे दूसरी पार्टी में जाने के सवाल से बचते रहे। कहा कि जल्द इस पर फैसला लेंगे। महानगर अध्यक्ष राज अग्रवाल, राजवीर सिंह, जयवीर सिंह ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है।
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भाजपा में रह चुके हैं सत्यपाल
चौ. सत्यपाल सिंह पहले भी भाजपा में रह चुके हैं। 1994- 1995 में भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। विस टिकट न मिलने पर वह भाजपा से दूर हो गए। निर्दलीय लड़े तो हार गए। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह ने उन्हें वृंदावन में मिलने के लिए बुलाया तो वहां मान मनौव्वल हुआ। दोबारा भाजपा में आए और वर्ष 2000 तक रहे। वर्ष 2000 में रालोद में आए और 17 साल बाद अब रालोद छोड़ी है।
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