Aligarh: फॉरेंसिक लैब न खोल सकी दक्ष का मोबाइल, छिपी है उसमें अंतिम बातचीत की रिकार्डिंग
घटना पिछले वर्ष 30 मई की रात की है। ग्रीन पार्क निवासी कर अधिवक्ता व सीए अमित निर्मल अपनी पत्नी के साथ मसूरी गए थे। घर में बड़ा बेटा दक्ष अकेला था। दसवीं में 94 फीसदी अंक लाकर पास हुए दक्ष से माता-पिता की रात में आखिरी बार बात हुई और जब एक बजे वे घर पहुंचे तो फ्लैट में उसका शव लटका मिला।
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अलीगढ़ महानगर के थाना महुआखेड़ा क्षेत्र के ग्रीन पार्क अपार्टमेंट में दसवीं के छात्र दक्ष की आत्महत्या के मामले में परिवार के सवाल एक वर्ष बाद भी अनुत्तरित हैं। परिवार को फॉरेंसिक लैब से उम्मीद थी कि शायद वहां से बेटे के मोबाइल को खोलकर उसकी अंतिम बातचीत की रिकार्डिंग आत्महत्या का कारण उजागर करेगी। मगर फॉरेंसिक लैब ने एक वर्ष बाद यह जवाब भेज दिया कि मोबाइल खुल नहीं सका है। अब थाना पुलिस ने मामले में विधिक राय मांगी है। उसी अनुसार मुकदमे में आगामी कदम उठाया जाएगा। वहीं परिवार चार्जशीट दायर करने की मांग कर रहा है।
ये घटना पिछले वर्ष 30 मई की रात की है। ग्रीन पार्क निवासी कर अधिवक्ता व सीए अमित निर्मल अपनी पत्नी के साथ मसूरी गए थे। घर में बड़ा बेटा दक्ष अकेला था। दसवीं में 94 फीसदी अंक लाकर पास हुए दक्ष से माता-पिता की रात में आखिरी बार बात हुई और जब एक बजे वे घर पहुंचे तो फ्लैट में उसका शव लटका मिला। शुरुआत में शोर मच गया कि वह कम नंबर आने से असंतुष्ट था। मगर उस समय तक परिवार इस बात पर सहमत नहीं था। घटना के तीन दिन बाद पिता की ओर से दक्ष की गैर समुदाय की सिविल लाइंस इलाके की सहपाठी छात्रा के परिवार पर आत्महत्या के लिए दबाव बनाने का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
जिसमें आरोप था कि उस परिवार को दक्ष संग बेटी की दोस्ती पर एतराज था। इसी क्रम में 29 मई को छात्रा ने मोबाइल पर कॉल व टेलीग्राम पर संदेश दिया। दबाव बनाते हुए उसे आत्महत्या के लिए उकसा कर यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। इसी के चलते दक्ष ने ऐसा किया। आरोप है कि इस विषय में जब छात्रा की मां से बात हुई तो उसने बातचीत में यह बात स्वीकारी कि समुदाय अलग होने के कारण उनके पड़ोसी ने बेटी को दक्ष से अलग करने का दबाव बनाया था।
मुकदमे में छात्रा के माता-पिता व एक अन्य आरोपी बनाए गए। वहीं पुलिस ने दक्ष का मोबाइल व लैपटॉप जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा था। जिसमें ये उम्मीद थी कि मोबाइल में कॉल रिकार्डिंग से बातचीत सामने आएगी। उस आधार पर विवेचना आगे बढ़ाते हुए कार्रवाई की जाएगी। एक वर्ष तक यह रिपोर्ट आगे नहीं आई। इस पर पिता ने लगातार पैरवी की, तब जाकर पुलिस ने फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट मंगवाई। जिसमें वहां से इस जवाब के साथ मोबाइल वापस भेज दिया गया कि यह खुल नहीं पाया है।
अब पिता ने पुलिस से बयानों के आधार पर चार्जशीट दायर करने का अनुरोध किया है। कहा है कि उनके बेटे की मौत का राज बयानों में भी सामने आ सकता है। वहीं पुलिस ने मामले में विधिक राय ली है। यह पूछा गया है कि इस स्थिति में क्या कर सकते हैं। एसओ महुआ खेड़ा विदेश राठी ने बताया कि विधिक राय के आधार पर आगे विवेचना बढ़ाई जाएगी।