फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Electricity generated from stubble

Good News: अब खेतों में नहीं जलेगी पराली, फसलों के अवशेष से बनेगी बिजली, होंगे घर रोशन

Tue, 20 Jan 2026 10:52 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 20 Jan 2026 10:52 PM IST
सार

एकत्र की गई पराली को नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी), विभिन्न तापीय विद्युत परियोजनाओं और कंप्रैस्ड बायो गैस (सीबीजी) संयंत्रों में भेजा जाएगा। इससे न केवल जहरीले धुएं से मुक्ति मिलेगी, बल्कि कचरे के प्रबंधन का एक स्थायी समाधान भी निकलेगा।

विज्ञापन
Electricity generated from stubble
पराली - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

अब खेतों में बेकार समझी जाने वाली और प्रदूषण का कारण बनने वाली पराली बिजली पैदा करने का जरिया बनेगी। अलीगढ़ जिला प्रशासन और कृषि विभाग की नई योजना के तहत जिले में हर साल पैदा होने वाली करीब 50 हजार मीट्रिक टन पराली का उपयोग विद्युत उत्पादन और बायो गैस बनाने में किया जाएगा। इससे लोगों का घर भी रोशन होगा।

विज्ञापन


लंबे समय से पराली जलाना किसानों की मजबूरी और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था, लेकिन अब इस पराली को कचरा नहीं, बल्कि कैश माना जा रहा है। योजना के अनुसार, एकत्र की गई पराली को नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी), विभिन्न तापीय विद्युत परियोजनाओं और कंप्रैस्ड बायो गैस (सीबीजी) संयंत्रों में भेजा जाएगा। इससे न केवल जहरीले धुएं से मुक्ति मिलेगी, बल्कि कचरे के प्रबंधन का एक स्थायी समाधान भी निकलेगा।

विज्ञापन

जिले की करीब 50 हजार मीट्रिक टन पराली को विद्युत परियोजनाओं और बायो गैस प्लांट तक पहुंचाने की योजना तैयार है। इसमें गन्ने और सरसों की फसल के अवशेष का भी सदुपयोग होगा, जिससे प्रदूषण पर लगाम लगेगी।- राजेंद्र पचौरी, संयोजक, प्रशिक्षण जागरूकता कार्यक्रम, मिशन समर्थ

विज्ञापन
विज्ञापन

सिर्फ पराली ही नहीं, गन्ने और सरसों का अवशेष भी होगा इस्तेमाल 

इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें केवल धान की पराली ही शामिल नहीं है। बिजली और बायो गैस उत्पादन के लिए गन्ने की खोई (अवशेष) और सरसों के डंठल का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। पराली को पेलेट्स बनाकर कोयले के साथ इस्तेमाल किया जाएगा। पराली और फसल के अवशेषों से सीएनजी तैयार होगी। इससे खेतों में आग लगाने की घटनाओं में भारी कमी आने की उम्मीद है।

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिले में पराली और अन्य फसल अवशेषों के कलेक्शन की व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसानों को इन्हें जलाने की जरूरत न पड़े। इससे एक ओर जहां मिट्टी की उर्वरक शक्ति बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों को उनके अवशेषों का उचित मूल्य मिल सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed