Driving Licence: सेंसरयुक्त ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट देने में चालक हो रहे फेल, यह बरतें सावधानी, हो जाएंगे पास
स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने से पहले अभ्यर्थी को सेंसरयुक्त ट्रैफिक ट्रैक पर वाहन चलाना जरूरी है। इसमें टेस्ट देने वाले चालक फेल हो रहे हैं।
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अलीगढ़ में बने मंडलीय ड्राइविंग ट्रैक पर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने वाले बड़ी संख्या में फेल हो जा रहे हैं। एक माह में ही 2230 अभ्यर्थियों में से 433 लोग इस टेस्ट में फेल हो चुके हैं। अभी तक लोगों को जुगाड़ से ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से मिल जाता था, इसलिए लोग डीएल की अहमियत नहीं समझते थे, लेकिन अब ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने में उनके पसीने छूट रहे हैं।
आरआई अनुराग वर्मा ने बताया कि मंडल स्तरीय ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ( डीटीआई ) में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने से पहले अभ्यर्थी को सेंसरयुक्त ट्रैफिक ट्रैक पर वाहन चलाना जरूरी है। इसमें टेस्ट देने वाले चालक फेल हो रहे हैं। सभी टेस्ट सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने के बाद ही आवेदकों का डीएल (ड्राइविंग लाइसेंस) जारी किया जा रहा है।
फेल होने पर सात दिन बाद दोबारा टेस्ट
यदि कोई अभ्यर्थी फेल होता है तो वह सात दिन बाद फार्म भरकर दोबारा स्लाॅट बुक कराकर टेस्ट दे सकता है। इसमें केवल आवेदक द्वारा ऑनलाइन टेस्ट की फीस जमा करनी पड़ेगी। लगातार तीन बार टेस्ट में फेल होने पर उसे लाइसेंस के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया जाएगा।- दीपक शाह,आरटीओ प्रशासन
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आधुनिक ट्रैक पर टेस्ट देते में बरतें सावधानी
- ड्राइविंग टेस्ट देने वाले की होती है ऑनलाइन वीडियोग्राफी रिकाॅर्डिंग
- कोई भी अपना या अपने परिवार के किसी भी सदस्य का ड्राइविंग टेस्ट देखना चाहता है तो ऑनलाइन देख सकता है
- ट्रैक में जगह-जगह सेंसर लगें हुए हैं। रिवर्स एस, रिवर्स पैरेलल पार्किंग में चालक की जरा सी गलती पर लाल बत्ती जलने लगती है। गियर या ब्रेक लगने या क्लच दबाने में चूक होने पर सेंसर फेल कर देता है
- निर्धारित समय में टेस्ट पूरा न करने पर भी फेल कर दिया जाता है
खास बातें
- लाइसेंस बनवाने के लिए प्रतिदिन 70 से 80 स्लाॅट बुक होते हैं
- 15- 20 अभ्यर्थी रोजाना होते हैं टेस्ट में अनुत्तीर्ण
- अनुत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थी का एक सप्ताह बाद होता है फिर से री- टेस्ट
- तीन बार लगातार अनुत्तीर्ण होने पर अभ्यर्थी को ठहरा दिया जाता है अनुपयुक्त