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डेंगू, संक्रामक रोग बने राजनीतिक मुद्दा
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2016 01:44 AM IST
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डेंगू, संक्रामक रोग बने राजनीतिक मुद्दा
- फोटो : Dig vishal
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जिले में फैल रहे संक्रामक रोग अब राजनीतिक मुद्दा बनने की ओर हैं। डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और बुखार आदि की प्रभावी तरीके से रोकथाम नहीं होने पर अब भाजपा ने 29 सितंबर को पूरे प्रदेश में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
महापौर शकुंतला भारती ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बेहाल हो चुकी हैं। पूरे राज्य में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया आदि से निपटने के लिए कुछ नहीं करा जा रहा है।
29 सितंबर को प्रदेश भर में भाजपा के प्रदर्शन के क्रम में वह भी सीएमओ और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगी। कहा कि नगर निगम लगातार फागिंग और सफाई कार्य करा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सहयोग नहीं कर रहा है।
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शिवसेना के प्रदेश सचिव मांगेराम शर्मा ने कहा कि जनता डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया आदि बीमारियों से लड़ रही है, लेकिन नसीमुद्दीन जैसे नेता जातिवाद की बीमारी फैलने में जुटे हैं। संक्रामक रोगों पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा और बहस छिड़ गई है। कहा जा रहा है कि अब इसे राजनीतिक मुद्दा बनना ही चाहिए तभी जिंदगी बचाई जा सकेंगी।
डेंगू से बचाव को अपनाएं यह घरेलू उपाय
विटामिन सी- खाने में जितना हो सके, विटामिन सी से युक्त पदार्थों का सेवन करें। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है। संक्रमण को फैलने से भी रोकता है।
हल्दी का प्रयोग- किसी भी रूप में खान पान में हल्दी का सेवन करें। हल्दी वाले दूध का प्रयोग बेहद लाभकारी है। इसमें मौजूद एंटीबायोटिक तत्व प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत कर बीमारियों से रक्षा करते हैं।
तुलसी और शहद- तुलसी को पानी में उबालकर और इसमें शहद डालकर पिया जा सकता है। काढ़ा या चाय में तुलसी का प्रयोग कर सकते हैं।
पपीते के पत्ते- पपीते के पत्ते का रस निकालकर दिन में दो बार 2-3 चम्मच मात्रा लेने से डेंगू से बचाव किया जा सकता है।
इसमें प्रोटीन से भरपूर पपेन एंजाइम पाया जाता है।
अनार- डेंगू में होने वाली रक्त की कमी और कमजोरी को दूर करने के लिए अनार बेहद फायदेमंद है। यह लाल रक्त कणों के निर्माण में बेहद अहम है।
मेथी- मेथी की हरी पत्तियों में उबालकर प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा मेथीदाने का प्रयोग भी किया जा सकता है।
गिलोय- गिलोय हर तरह की बीमारी में अमृत के समान होती है। इसके प्रयोग से लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण होता है। तुलसी के साथ काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है।
बकरी का दूध- बकरी का कच्चा दूध दिन में दो से तीन बार थोड़ी मात्रा में पीने से लाभ होता है। शरीर व जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
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महापौर शकुंतला भारती ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बेहाल हो चुकी हैं। पूरे राज्य में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया आदि से निपटने के लिए कुछ नहीं करा जा रहा है।
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29 सितंबर को प्रदेश भर में भाजपा के प्रदर्शन के क्रम में वह भी सीएमओ और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगी। कहा कि नगर निगम लगातार फागिंग और सफाई कार्य करा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सहयोग नहीं कर रहा है।
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शिवसेना के प्रदेश सचिव मांगेराम शर्मा ने कहा कि जनता डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया आदि बीमारियों से लड़ रही है, लेकिन नसीमुद्दीन जैसे नेता जातिवाद की बीमारी फैलने में जुटे हैं। संक्रामक रोगों पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा और बहस छिड़ गई है। कहा जा रहा है कि अब इसे राजनीतिक मुद्दा बनना ही चाहिए तभी जिंदगी बचाई जा सकेंगी।
डेंगू से बचाव को अपनाएं यह घरेलू उपाय
विटामिन सी- खाने में जितना हो सके, विटामिन सी से युक्त पदार्थों का सेवन करें। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है। संक्रमण को फैलने से भी रोकता है।
हल्दी का प्रयोग- किसी भी रूप में खान पान में हल्दी का सेवन करें। हल्दी वाले दूध का प्रयोग बेहद लाभकारी है। इसमें मौजूद एंटीबायोटिक तत्व प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत कर बीमारियों से रक्षा करते हैं।
तुलसी और शहद- तुलसी को पानी में उबालकर और इसमें शहद डालकर पिया जा सकता है। काढ़ा या चाय में तुलसी का प्रयोग कर सकते हैं।
पपीते के पत्ते- पपीते के पत्ते का रस निकालकर दिन में दो बार 2-3 चम्मच मात्रा लेने से डेंगू से बचाव किया जा सकता है।
इसमें प्रोटीन से भरपूर पपेन एंजाइम पाया जाता है।
अनार- डेंगू में होने वाली रक्त की कमी और कमजोरी को दूर करने के लिए अनार बेहद फायदेमंद है। यह लाल रक्त कणों के निर्माण में बेहद अहम है।
मेथी- मेथी की हरी पत्तियों में उबालकर प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा मेथीदाने का प्रयोग भी किया जा सकता है।
गिलोय- गिलोय हर तरह की बीमारी में अमृत के समान होती है। इसके प्रयोग से लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण होता है। तुलसी के साथ काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है।
बकरी का दूध- बकरी का कच्चा दूध दिन में दो से तीन बार थोड़ी मात्रा में पीने से लाभ होता है। शरीर व जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।