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रमजान में बढ़ी पाकिस्तानी मसालों की मांग
Sat, 11 May 2019 01:21 AM IST
राजेश सिंह
आशीष श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़
आशीष श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: राजेश सिंह
Updated Sat, 11 May 2019 01:21 AM IST
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पाकिस्तानी मसाले
- फोटो : Amar Ujala
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बीते चार माह से भारत पाकिस्तान सीमा पर भले ही तनाव हो और व्यापार प्रभावित हुआ हो, लेकिन खाद्य पदार्थों का कारोबार अभी भी जारी है। लोग इस तनाव के बावजूद भी अपने मुंह का जायका बदलने को तैयार नहीं हैं। विशेष रूप से मसालों के मामले में पाकिस्तान की ‘शान’ कंपनी के मसाले अलीगढ़ वासियों की खास पसंद बने हुए हैं।
बिरयानी हो या अन्य नानवेज डिश। इन्हीं मसालों का प्रयोग मुफीद माना जा रहा है। हालांकि तनाव के चलते इन मसालों के दामों में मामूली इजाफा हुआ है, लेकिन इन मसालों की बिक्री पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। उल्टे रमजान के दिनों में इनकी मांग बढ़ गई है।
नानवेज व्यंजनों की जान हैं ये मसाले
पाकिस्तान से आने वाले मसालों का प्रयोग मुख्यत: नानवेज व्यंजनों में होता है। बिरयानी, कोरमा, कबाब, चिकन फ्राई, आचारी चिकन, बटर चिकन, कढ़ाई चिकन, चिकन टिक्का, चिकन तंदूरी, चिकन जालफ्रेजी, चिकन चंगेजी हो या अन्य, सभी इन मसालों के बिना अधूरे हैं।
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दामों में हुआ मामूली इजाफा
दोदपुर स्थित सेलेक्शन प्वाइंट के मालिक एजाज ने बताया कि चार माह में शान कंपनी के मसालों में करीब दस से पंद्रह रुपये का इजाफा हुआ है। पहले यह मसाला 60 रुपये की एमआरपी पर 60 ग्राम प्रति पैक के हिसाब से मिलता था और वह उसे 55 रुपये में बेचते थे। अब यह 75 रुपये की एमआरपी पर आ रहा है। वह उसे 70 रुपये मेें बेचते हैं। दोदपुर स्थित मसाला विक्रेता असलम ने बताया कि सीमा पर तनाव व दामों में मामूली बढ़ोत्तरी से भी पाकिस्तानी मसालों में कोई अंतर नहीं आया है। अभी भी बाजार में इसकी मांग पहले जैसी ही है।
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बिरयानी हो या अन्य नानवेज डिश। इन्हीं मसालों का प्रयोग मुफीद माना जा रहा है। हालांकि तनाव के चलते इन मसालों के दामों में मामूली इजाफा हुआ है, लेकिन इन मसालों की बिक्री पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। उल्टे रमजान के दिनों में इनकी मांग बढ़ गई है।
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नानवेज व्यंजनों की जान हैं ये मसाले
पाकिस्तान से आने वाले मसालों का प्रयोग मुख्यत: नानवेज व्यंजनों में होता है। बिरयानी, कोरमा, कबाब, चिकन फ्राई, आचारी चिकन, बटर चिकन, कढ़ाई चिकन, चिकन टिक्का, चिकन तंदूरी, चिकन जालफ्रेजी, चिकन चंगेजी हो या अन्य, सभी इन मसालों के बिना अधूरे हैं।
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दामों में हुआ मामूली इजाफा
दोदपुर स्थित सेलेक्शन प्वाइंट के मालिक एजाज ने बताया कि चार माह में शान कंपनी के मसालों में करीब दस से पंद्रह रुपये का इजाफा हुआ है। पहले यह मसाला 60 रुपये की एमआरपी पर 60 ग्राम प्रति पैक के हिसाब से मिलता था और वह उसे 55 रुपये में बेचते थे। अब यह 75 रुपये की एमआरपी पर आ रहा है। वह उसे 70 रुपये मेें बेचते हैं। दोदपुर स्थित मसाला विक्रेता असलम ने बताया कि सीमा पर तनाव व दामों में मामूली बढ़ोत्तरी से भी पाकिस्तानी मसालों में कोई अंतर नहीं आया है। अभी भी बाजार में इसकी मांग पहले जैसी ही है।