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डीएलएड पेपर लीक मामला: फरार सरगना भी पांडेय...कहीं नाम तो नहीं बदला
Fri, 07 Nov 2025 02:25 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 07 Nov 2025 02:25 PM IST
सार
फरार नितेश पांडेय की तलाश शुरू कर दी। मगर तीसरे दिन भी उसके विषय में कोई सुराग नहीं मिला है। इस विषय में विभागीय सूत्र बताते हैं कि पूर्व में पुलिस भर्ती व टीईटी पेपर लीक में भी अंकित व जितेश पांडेय नाम के सरगना सामने आए थे। कहीं ये उन्हीं से जुड़ा तो नहीं या नाम बदलकर तो फिर धंधा न शुरू किया हो।
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पकड़े गए दोनों आरोपी भाई
- फोटो : पुलिस
विस्तार
डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) के पेपर लीक मामले में फरार सरगना नितेश पांडेय का एसटीएफ व इगलास पुलिस को अभी तक कोई सुराग नहीं मिला। मगर एक सवाल जरूर उठ रहा है कि कहीं पूर्व की परीक्षाओं के पेपर लीक सरगनाओं के उपनाम भी पांडेय थे। कहीं इस परीक्षा में भी तो उसने नाम बदलकर फिर से गोरखधंधा न शुरू किया हो। इस सवाल पर भी काम करते हुए फरार नितेश पांडेय को तलाशा जा रहा है। पूर्व की परीक्षाओं में सामने आए पांडेय उपनाम के सरगनाओं की वर्तमान गतिविधियां देखी जा रही हैं।
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एसटीएफ ने मंंगलवार को इगलस क्षेत्र के गांव नगला हरिकरना के दो भाइयों धमेंद्र कुमार और पुष्पेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जिन पर टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से डीएलएड प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के प्रश्नपत्र आउट करने वाले गिरोह के नितेश पांडेय से पेपर मंगाकर सॉल्व करने व परीक्षार्थियों को बेचने का आरोप है। दोनों ने टेलीग्राम व व्हापट्सएप ग्रुपों के जरिये 80 करीब परीक्षार्थियों को पेपर बेचना स्वीकारा। दोनों को जेल भेजने के साथ एसटीएफ ने इगलास में मुकदमा दर्ज कराया।
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फरार नितेश पांडेय की तलाश शुरू कर दी। मगर तीसरे दिन भी उसके विषय में कोई सुराग नहीं मिला है। इस विषय में विभागीय सूत्र बताते हैं कि पूर्व में पुलिस भर्ती व टीईटी पेपर लीक में भी अंकित व जितेश पांडेय नाम के सरगना सामने आए थे। कहीं ये उन्हीं से जुड़ा तो नहीं या नाम बदलकर तो फिर धंधा न शुरू किया हो। इस दिशा में काम करते हुए उसे तलाशा जा रहा है। सीओ इगलास महेश कुमार इतना ही बताते हैं कि प्रयास जारी हैं। अभी कोई महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आया है।
टेलीग्राम से रिपोर्ट मिलने का इंतजार
पकड़े गए आरोपियों से ग्रुपों के नाम, उनमें शामिल नंबर व ऑनलाइन रुपये लेने के चलते उनके यूपीआईडी खातों के साक्ष्य भी मिले हैं। जिनके जरिये टेलीग्राम से इन सभी के नाम पतों की सूची मांगी गई है। मगर अभी यह सूची न मिलने के कारण खरीदारों के नाम भी उजागर नहीं हुए हैं।