फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Dharmendra Chaudhary clean chit by the court accused of murder

धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड के आरोपियों को हाईकोर्ट से भी क्लीनचिट

Wed, 15 Feb 2017 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Wed, 15 Feb 2017 01:13 AM IST
विज्ञापन
Dharmendra Chaudhary clean chit by the court accused of murder
धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड के आरोपियों को हाईकोर्ट से भी क्लीनचिट - फोटो : Amar Ujala
 महानगर के बहुचर्चित बिल्डर व बसपा नेता धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड के सभी 15 आरोपियों को हाईकोर्ट से भी क्लीनचिट मिल गई है। साक्ष्यों के अभाव में सत्र न्यायालय से आरोपियों के बरी किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट ने सही मानते हुए अभियोजन पक्ष की वह याचिका खारिज कर दी, जो सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।
विज्ञापन

बन्नादेवी के बारहद्वारी चौराहे पर 10 जनवरी 2015 की शाम आठ बजे धर्मेंद्र चौधरी निवासी कनक रेजीडेंसी क्वार्सी की हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में धर्मेंद्र के पिता चंद्रपाल सिंह ने अज्ञात पर मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने प्रकरण में आधा दर्जन शूटरों को गिरफ्तार करते हुए खुलासा किया था। मगर पुलिस भैय्याजी का नाम उजागर करने के नाम पर चुप्पी साधे रही। बचाव पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार प्रकरण में हरेंद्र-वीरेश को साजिश का आरोपी और 13 अन्य शूटरों व मुखबिरों को हत्या का आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दायर की। जिसमें सत्र परीक्षण के दौरान पुलिस व पब्लिक के 25 गवाह पेश हुए। मगर वह बचाव पक्ष की दलीलों पर खरे नहीं उतरे और साक्ष्य भी नहीं टिक पाए। इस आधार पर अदालत ने 7 सितंबर 2016 को सभी बरी कर दिए। इस आदेश के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट में न्यायाधीश शशिकांत गुप्ता व रेखा दीक्षित की डबल बैंच ने 25 जनवरी को यह अपील सत्र न्यायालय में बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर ही खारिज कर दी। डीजीसी डॉ. अबसार किदवई ने हाईकोर्ट में बचाव पक्ष की याचिका खारिज होने की बात स्वीकारी है।
विज्ञापन

---------
उधारी में हत्या की न साजिश खुली, न भैय्याजी मिला
अलीगढ़। धर्मेंद्र चौधरी की 10 जनवरी की देर शाम हत्या के बाद 25 जनवरी को जब तत्कालीन एसएसपी ने शूटरों द्वारा उधारी में हत्या का खुलासा किया था। उस समय कहा गया था कि बिल्डर एसोसिएशन और जमीन से जुड़े विवाद में हरेंद्र-वीरेश ने यह हत्या कराई है। इसके पीछे किसी कथित भैय्याजी का हाथ शूटरों ने स्वीकारा है। इसके बाद से लेकर आज तक पुलिस उस भैय्याजी का भी सुराग नहीं लगा पाई। इतना ही नहीं सबसे पहले तो धर्मेंद्र के पिता व पत्नी ने ही अदालत में अपनी गवाही के दौरान इस खुलासे पर यह कहते हुए सवाल खड़ा कर दिया कि उनका कोई विवाद इन लोगों से नहीं। इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान की दलीलों व सवालों का जवाब भी अभियेाजन पक्ष से गवाही देने आए पुलिस विवेचक व गवाह नहीं दे पाए। मुकदमे में पब्लिक के 12 व एक डॉक्टर की गवाही के अलावा बाकी पुलिस के गवाह थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

--------
- मेरे मुवक्किल पर अब तक अपनी रंजिश में अपराध दर्ज हुए। मगर यह पहला मौका हुआ, जब उन पर किसी बाहरी व्यक्ति की हत्या का आरोप लगाया गया। यह सब सियासी रंजिश के तहत हुआ। क्योंकि मेरे मुवक्किल ने अब खुद राजनीति में दखल का प्रयास शुरू किया था। मगर सत्र न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक अभियोजन साक्ष्य पेश न कर सका। इसलिए हमें न्याय मिला है। 

- नीरज चौहान एडवोकेट
- यह थे आरोपी -
हरेंद्र सिंह, वीरेश सिंह प्रधान निवासी भरतपुर लोधा (साजिश के आरोपी), पंकज, रॉबी निवासी शहबाजपुर विजयगढ़, दीपक शर्मा सुदामापुरी, दीपक ठाकुर अमरपुर लोधा, मोनू पचौरी पोहिना जवां, मोनी शर्मा निवासी भांकरी, ड्राइवर संजय नगला तिकौना, सिद्धांत रामबल नगला सासनी, अनुज मंडला, उदित गौतम विष्णुपुरी, सुनील उर्फ भोलू गढ़िया जवां, अविनाश सिंह अखईपुर हाथरस, बल्देव लोधा थे।
----
- बचाव पक्ष के सवाल और दलील-
- खुलासे के दूसरे ही दिन पिता ने मीडिया को दिए बयान में असहमति जताई
- हरेंद्र व वीरेश से जमीनी या किसी अन्य तरह की रंजिश सिरे से नकारी थी
- पहले दिन मुकदमे में बाइक सवार दो अज्ञात, फिर कई शूटरों के नाम खोले
- खुलासे व शूटरों तक पहुंचने के कोई साक्ष्य पुलिस ने विवेचना में नहीं खोले
-गिरफ्तार शूटरों के नाम व चेहरे मौके के गवाहों अपने बयानों में नहीं पहचाने
-गिरफ्तारी के बाद किसी गवाह से शूटरों की शिनाख्त कार्रवाई नहीं कराई गई
-घटना की साजिश हरेंद्र-वीरेश के मार्केट पर रचने की कहानी का गवाह नहीं
-कौन सी व कहां की जमीन का हरेंद्र-वीरेश से धर्मेंद्र का विवाद, नहीं पता है
-मौके पर .38 बोर के खोखा बरामद, शूटरों से 315 बोर के कट्टे बरामद किए
-इतने बड़े प्लांड मर्डर में प्रयोग कोई मोबाइल या सीडीआर तक नहीं दिखाई
-हत्या में प्रयुक्त कोई दुपहिया वाहन भी पुलिस आज तक बरामद नहीं कर पाई
----------------------------------------------
 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed