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थाना बदलते ही बिटिया के मुकदमे की चाल सुस्त

Sun, 07 Feb 2016 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ हरदुआगंज (अलीगढ़)।
अमर उजाला ब्यूरो/ हरदुआगंज (अलीगढ़)। Updated Sun, 07 Feb 2016 01:42 AM IST
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बिटिया संग दरिंदगी और उसको मौत के घाट उतारने के मुकदमे की विवेचना के लिए थाना बदलते ही विवेचना की चाल बदल गई। अब इस मुकदमे की चाल इतनी सुस्त गति से चल रही है कि न तो आरोपियों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर कोई ठोस प्रयास किए जा रहे और न विवेचना में ही कोई प्रगति हुई है।
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 इसे लेकर फिलहाल परिजनों में एक बार फिर नाराजगी है और अगले एक-दो दिन में परिजन इस मसले पर एसएसपी से मिलने की तैयारी में हैं। साफ कहना है कि फिर से आवाज उठाई जाएगी। या फिर कोई कदम उठाया जाएगा।
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दिसंबर माह में हुई बिटिया संग दरिंदगी और उसकी हत्या के मामले की विवेचना पिछले सप्ताह एसएसपी स्तर से नियमानुसार महिला थाना ट्रांसफर कर दी गई। नियम है कि महिला संबंधी अपराध के इस तरह के मुकदमों की विवेचना व चार्जशीट का काम महिला विवेचक स्तर से किया जाता है।
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 इसी नियम के तहत यह काम एसओ महिला थाना को सौंपा गया। मगर परिजनों का आरोप है कि जिस दिन से मुकदमा महिला थाने पहुंचा है, उस दिन से विवेचना की गति बेहद धीमी हो गई। एक तरफ न तो आज तक गोल्डी की गिरफ्तारी के मसले पर कोई कदम उठाया गया। न जेल गए गांव के ही मुख्य आरोपी चतरा के भाई की गिरफ्तारी के मुद्दे पर कोई प्रयास हुआ।

परिजनों की मानें तो विवेचना की धीमी गति से तो लगता है कि कहीं चतरा के भाई को लाभ देने का प्रयास तो नहीं चल रहा। वरना जिस तरह गोल्डी के खिलाफ अदालत से कुर्की नोटिस लिया गया था। उस तरह से चतरा के भाई के खिलाफ भी कुर्की की कार्रवाई होनी चाहिए थी।

 परिजनों का यहां तक आरोप है कि महिला थाने जाकर जब भी इस संबंध में जानकारी की कोशिश होती है तो वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। इसे लेकर परिजनों के स्तर से एसएसपी से मुलाकात करने की तैयारी है। इधर, इस संबंध में एसओ महिला थाना मांगे देवी तोमर का कहना है कि विवेचना अपनी गति से चल रही है। चतरा के भाई व गोल्डी की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं। चतरा के भाई के लिए अदालत से एक-दो दिन में गैरजमानती वारंट लिए जाएंगे।


--बॉक्स--
प्रयोगशाला दाखिल हुआ नाबालिग का डीएनए सैंपल
इस मामले में अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस स्तर से नाबालिग आरोपी का डीएनए सैंपल लिया गया। जिसे बाद में खुद पुलिस लखनऊ राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में दाखिल कराया गया है। जहां से तीन माह का समय दिया गया है।
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