{"_id":"5ffa10278ebc3e333759872e","slug":"atif-was-a-friend-of-the-notorious-munir-shooter-zubair","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुख्यात मुनीर के शूटर जुबैर का दोस्त था आतिफ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
कुख्यात मुनीर के शूटर जुबैर का दोस्त था आतिफ
Sun, 10 Jan 2021 01:51 AM IST
राजेश सिंह
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: राजेश सिंह
Updated Sun, 10 Jan 2021 01:51 AM IST
विज्ञापन
मोहम्मद आतिफ खान का फाइल फोटो।
- फोटो : neeraj
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एएमयू छात्र आतिफ की हत्या वर्ष 2018 में जमालपुर में हुई शाहबेज की हत्या के क्रम में है या वजह कोई और है? इस सवाल का जवाब तो पुलिस जांच के बाद ही मिलेगा। मगर इतना जरूर है कि आतिफ दिल्ली की तिहाड़ जेल में निरुद्ध उस जुबैर का दोस्त था, जो कुख्यात अपराधी मुनीर मेहताब का शूटर है। उसी जुबैर की एक लड़की से जुड़ी रंजिश और जुबैर संग हुई मारपीट के बदले शाहबेज की हत्या हुई थी, जिसमें आज मारे गए आतिफ ने हथियार मुहैया कराए थे। उसी आरोप में पुलिस ने उसे जेल भेजा था।
ये है इस गैंगवार का मुनीर गैंग से जुड़ाव
इस गैंग के बीच चल रही पुरानी रंजिश पर गौर करें तो आतिफ अपने पिता का इकलौता व घर का बड़ा बेटा था। इसके बाद दो छोटी बहनें हैं। वह खुद एएमयू से बीए ऑनर्स अर्थशास्त्र द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। स्कूल में पढ़ाई के दौरान उसकी बरला नौसा के जुबैर से दोस्ती हुई। बाद में जुबैर व उसके तीन बड़े भाई यासिर, फहद व सद्दाम जरायम पेशे में आए। इसी क्रम में जुबैर भी उनके साथ जुड़ गया। बाद में सद्दाम व जुबैर कुख्यात अपराधी मुनीर मेहताब के साथ काम करने लगे। बाद में आपसी टशन में सद्दाम की मुनीर ने हत्या कर दी। मगर जुबैर मुनीर के साथ बराबर काम करता रहा।
पहले हमले में चली गई थी बच्ची की जान
मुनीर के जेल जाने के बाद जुबैर स्थानीय स्तर पर उसके लिए काम करता था। इसी बीच आपसी टसन में उसका जमालपुर के शाहबेज ग्रुप से झगड़ा हुआ। इस झगड़े की वजह एक लड़की भी रही। इसी बीच जुबैर पर हमला हुआ। उसे पीटा गया। इसके बदले शाहबेज की हत्या की प्लानिंग बनी। इस प्लानिंग के क्रम में एक मर्तबा अब्दुल्ला कॉलेज के सामने दिनदहाड़े फायरिंग हुई, जिसमें ऊपरकोट की एक बच्ची की गोली लगने से मौत हो गई। उसके कुछ दिन बार फिर सितंबर 208 में शाहबेज की हत्या की गई। इस हत्याकांड में कुल 14 नाम पुलिस ने खोले, उन्हीं में आतिफ भी जेल भेजा गया था।
विज्ञापन
मौत की खबर पर पिता की तबियत बिगड़ी
जाकिर नगर में देर रात हुई घटना के बाद जब शोर मचा तो आतिफ का परिवार भी मौके पर पहुंच गया था। मगर वहां जब उन्हें अपना बेटा घायल मिला तो वे आनन-फानन उसे मेडिकल ले गए। मगर कुछ ही देर में उसे जब मृत घोषित कर दिया तो पिता की तबियत बिगड़ने लगी। इस पर पुलिस ने तत्काल पिता को वहां से घर भेजा गया। बाद में शव को पोस्टमार्टम केंद्र भेज दिया।
मौके पर खंगाले जा रहे सीसीटीवी से सुराग
इस घटना में कौन लोग शामिल रहे हैं, इसे लेकर पुलिस की एक टीम इलाके में सीसीटीवी खंगाल रही है। यह प्रयास किया जा रहा है कि शमशाद मार्केट से लेकर जाकिर नगर तक के सीसीटीवी देखे जाएं। ताकि आतिफ जहां से चला था, वहां से घटनास्थल तक के किसी सीसीटीवी में कोई पीछा करता हुआ शायद कैद पाया जाए।
इसके अलावा इन बिंदुओं पर भी पुलिस की जांच
इस हत्याकांड में गैंगवार से जुड़ी रंजिश के अलावा किसी लड़की से जुड़े विवाद या अन्य कोई रंजिश तो नहीं, इस पर भी पुलिस ध्यान केंद्रित किए हुए है। हां, इतना जरूर है कि पुलिस की फौरी जांच में समझ में आ रहा है कि इस वारदात को भाड़े के शूटरों से अंजाम दिलाया गया है। तीन हमलावर बाइक पर थे और उन्होंने सिर्फ आतिफ को ही निशाना बनाया। उसके साथ कौन था, हमलावरों को उससे कोई मतलब नहीं था। वह चुपचाप बचकर निकल गया।
जमानत पर आने के बाद बना ली थी गैंग से दूरी
घटना की खबर पर मौके पर पहुंचे परिवार व एएमयू से जुड़े दोस्तों ने एक बात जरूर पुलिस को बताई कि उस घटना में जेल जाने और जमानत पर छूटकर आने के बाद आतिफ ने उस गैंग से जुड़े अपराधी दोस्तों से दूरी बना ली थी। अब वह अपना ज्यादातर समय घर, परिवार, पढ़ाई और एएमयू से जुड़े दोस्तों को ही देता था। फिलहाल परिवार में मां व बहनों का हाल बेहाल था। कुछ करीबी दोस्तों की मदद से पुलिस घटना से जुड़े पहलुओं पर काम कर रही थी।
विज्ञापन
ये है इस गैंगवार का मुनीर गैंग से जुड़ाव
इस गैंग के बीच चल रही पुरानी रंजिश पर गौर करें तो आतिफ अपने पिता का इकलौता व घर का बड़ा बेटा था। इसके बाद दो छोटी बहनें हैं। वह खुद एएमयू से बीए ऑनर्स अर्थशास्त्र द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। स्कूल में पढ़ाई के दौरान उसकी बरला नौसा के जुबैर से दोस्ती हुई। बाद में जुबैर व उसके तीन बड़े भाई यासिर, फहद व सद्दाम जरायम पेशे में आए। इसी क्रम में जुबैर भी उनके साथ जुड़ गया। बाद में सद्दाम व जुबैर कुख्यात अपराधी मुनीर मेहताब के साथ काम करने लगे। बाद में आपसी टशन में सद्दाम की मुनीर ने हत्या कर दी। मगर जुबैर मुनीर के साथ बराबर काम करता रहा।
विज्ञापन
पहले हमले में चली गई थी बच्ची की जान
मुनीर के जेल जाने के बाद जुबैर स्थानीय स्तर पर उसके लिए काम करता था। इसी बीच आपसी टसन में उसका जमालपुर के शाहबेज ग्रुप से झगड़ा हुआ। इस झगड़े की वजह एक लड़की भी रही। इसी बीच जुबैर पर हमला हुआ। उसे पीटा गया। इसके बदले शाहबेज की हत्या की प्लानिंग बनी। इस प्लानिंग के क्रम में एक मर्तबा अब्दुल्ला कॉलेज के सामने दिनदहाड़े फायरिंग हुई, जिसमें ऊपरकोट की एक बच्ची की गोली लगने से मौत हो गई। उसके कुछ दिन बार फिर सितंबर 208 में शाहबेज की हत्या की गई। इस हत्याकांड में कुल 14 नाम पुलिस ने खोले, उन्हीं में आतिफ भी जेल भेजा गया था।
विज्ञापन
मौत की खबर पर पिता की तबियत बिगड़ी
जाकिर नगर में देर रात हुई घटना के बाद जब शोर मचा तो आतिफ का परिवार भी मौके पर पहुंच गया था। मगर वहां जब उन्हें अपना बेटा घायल मिला तो वे आनन-फानन उसे मेडिकल ले गए। मगर कुछ ही देर में उसे जब मृत घोषित कर दिया तो पिता की तबियत बिगड़ने लगी। इस पर पुलिस ने तत्काल पिता को वहां से घर भेजा गया। बाद में शव को पोस्टमार्टम केंद्र भेज दिया।
मौके पर खंगाले जा रहे सीसीटीवी से सुराग
इस घटना में कौन लोग शामिल रहे हैं, इसे लेकर पुलिस की एक टीम इलाके में सीसीटीवी खंगाल रही है। यह प्रयास किया जा रहा है कि शमशाद मार्केट से लेकर जाकिर नगर तक के सीसीटीवी देखे जाएं। ताकि आतिफ जहां से चला था, वहां से घटनास्थल तक के किसी सीसीटीवी में कोई पीछा करता हुआ शायद कैद पाया जाए।
इसके अलावा इन बिंदुओं पर भी पुलिस की जांच
इस हत्याकांड में गैंगवार से जुड़ी रंजिश के अलावा किसी लड़की से जुड़े विवाद या अन्य कोई रंजिश तो नहीं, इस पर भी पुलिस ध्यान केंद्रित किए हुए है। हां, इतना जरूर है कि पुलिस की फौरी जांच में समझ में आ रहा है कि इस वारदात को भाड़े के शूटरों से अंजाम दिलाया गया है। तीन हमलावर बाइक पर थे और उन्होंने सिर्फ आतिफ को ही निशाना बनाया। उसके साथ कौन था, हमलावरों को उससे कोई मतलब नहीं था। वह चुपचाप बचकर निकल गया।
जमानत पर आने के बाद बना ली थी गैंग से दूरी
घटना की खबर पर मौके पर पहुंचे परिवार व एएमयू से जुड़े दोस्तों ने एक बात जरूर पुलिस को बताई कि उस घटना में जेल जाने और जमानत पर छूटकर आने के बाद आतिफ ने उस गैंग से जुड़े अपराधी दोस्तों से दूरी बना ली थी। अब वह अपना ज्यादातर समय घर, परिवार, पढ़ाई और एएमयू से जुड़े दोस्तों को ही देता था। फिलहाल परिवार में मां व बहनों का हाल बेहाल था। कुछ करीबी दोस्तों की मदद से पुलिस घटना से जुड़े पहलुओं पर काम कर रही थी।