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अलीगढ़ : कांग्रेस-बसपा का वोट खिसका अनिल को हुआ बड़ा फायदा
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कौशल कुमार ओझा
कोल विधान सभा में भाजपा प्रत्याशी अनिल पाराशर को 2017 की तुलना में 13681 वोट अधिक मिले हैं। इन्हीं वोटों ने उनकी डूबती नैया को किनारे तक पहुंचाया। ध्रुवीकरण का नुकसान कांग्रेस के प्रत्याशी विवेक बंसल और बसपा के प्रत्याशी मो. बिलाल को उठाना पड़ा। इनका परंपरागत वोट सपा एवं भाजपा में चला गया।
2017 के विधान सभा चुनाव में अनिल पाराशर को 93814 वोट पड़े थे, जो इस बार 107495 मिले हैं। इस तरह 13681 वोटर अनिल पाराशर की नैया को मझधार से निकाल कर लाए हैं। पिछले दो चुनावों के परिणाम पर नजर दौड़ाए तो साफ हो जाता है कि इस बार सबसे अधिक नुकसान में कांग्रेस के विवेक बंसल एवं बसपा के मो. बिलाल रहे। ध्रुवीकरण की आंधी में कांग्रेस के के हजारों वोट सपा एवं भाजपा के खाते में पहुंच गए। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार विवेक बंसल को सीधे-सीधे 23171 वोट कम पड़े हैं। 2017 में बसपा प्रत्याशी रामकुमार शर्मा को 37909 वोट पड़े थे। इस बार के बसपा प्रत्याशी मो. बिलाल को 22880 वोट से संतोष करना पड़ा है। यानी पिछली बार से 15029 वोट कम पड़े हैं। वर्ष 2017 में सपा के शाज इशाक उर्फ अज्जू इशाक को 42851 वोट पड़े थे, जो इस बार बढ़कर 101968 तक पहुंच गए हैं। यानी पिछले चुनाव की तुलना में अज्जू को इस बार 59117 वोट अधिक पड़े हैं।
73289 वोटरों की रही निर्णायक भूमिका
2017 के चुनाव की तुलना में कांग्रेस एवं बसपा के घटे वोटों (23171 और 15029) को जोड़ दें तो संख्या 38200 बैठती है। 2017 के चुनाव में सपा के पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह खान निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में थे और उनको 10912 वोट मिले थे। इसमें हाजी जमीरउल्लाह के वोटों को जोड़ने पर कुल संख्या 49109 बैठती है। 2017 में 228587 एवं 2022 में 252764 वोट पड़े थे, जिसका अंतर 24177 है। सभी वोटों को जोड़ने पर संख्या 73289 बैठती है। इस बार के चुनाव में सपा प्रत्याशी अज्जू एवं भाजपा प्रत्याशी अनिल के बढ़े हुए वोटों को जोड़ दे तो संख्या 72798 आती है। ध्रुवीकरण के बाद यही वोट जीत और हार के कारण बने।
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पिछली बार 13, इस बार 9 प्रत्याशी
कोल विधान सभा क्षेत्र में 2017 में 13 प्रत्याशी थे। जबकि इस बार 9 प्रत्याशी किस्मत अजमा रहे थे। दोनों चुनावों में भाजपा, सपा, कांग्रेस एवं बसपा को छोड़कर एक मात्र जमीरउल्लाह निर्दलीय प्रत्याशी थे, जिनको दस हजार से अधिक वोट मिले थे। बाकी प्रत्याशियों को 675 से लेकर 155 के बीच वोट हैं।
चुनाव परिणाम कल्पना से परे है। ध्रुवीकरण के कारण वोट संप्रदायों में बंट गए। चुनाव के दिन तक क्षेत्र में कहा गया कि साइकिल चल रही है। इसका असर पड़ा और वोटरों का रुख बदल गया। इससे भाजपा एवं सपा को फायदा हुआ। पूरे प्रदेश में यहीं हुआ है।
- विवेक बंसल, कांग्रेस प्रत्याशी
ध्रुवीकरण की वजह से वोटों का बंटवारा हो गया। बसपा का कुछ प्रतिशत वोट प्रभावित हुआ है। भाजपा एवं सपा को लाभ हुआ है। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। गांव में भाजपा का विरोध हो रहा था। चुनाव परिणाम में उसके वोट बढ़ गए हैं। गठबंधन का वोट भी भाजपा को पड़ा है।
- रतनदीप सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष
दो विधान सभा चुनावों पर एक नजर
प्रत्याशी पार्टी 2017 में पडे़ वोट 2022 में पड़े वोट
अनिल पाराशर भाजपा 93814 107495
अज्जू इशहाक सपा 42851 101968
विवेक बंसल कांग्रेस 38623 15452
रामकुमार शर्मा/मो. बिलाल बसपा 37909 22880
जमीरउल्लाह खान निर्दलीय 10912 -
- 2017 में कुल मतदान - 228587
- 2022 में कुल मतदान - 252764
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कोल विधान सभा में भाजपा प्रत्याशी अनिल पाराशर को 2017 की तुलना में 13681 वोट अधिक मिले हैं। इन्हीं वोटों ने उनकी डूबती नैया को किनारे तक पहुंचाया। ध्रुवीकरण का नुकसान कांग्रेस के प्रत्याशी विवेक बंसल और बसपा के प्रत्याशी मो. बिलाल को उठाना पड़ा। इनका परंपरागत वोट सपा एवं भाजपा में चला गया।
2017 के विधान सभा चुनाव में अनिल पाराशर को 93814 वोट पड़े थे, जो इस बार 107495 मिले हैं। इस तरह 13681 वोटर अनिल पाराशर की नैया को मझधार से निकाल कर लाए हैं। पिछले दो चुनावों के परिणाम पर नजर दौड़ाए तो साफ हो जाता है कि इस बार सबसे अधिक नुकसान में कांग्रेस के विवेक बंसल एवं बसपा के मो. बिलाल रहे। ध्रुवीकरण की आंधी में कांग्रेस के के हजारों वोट सपा एवं भाजपा के खाते में पहुंच गए। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार विवेक बंसल को सीधे-सीधे 23171 वोट कम पड़े हैं। 2017 में बसपा प्रत्याशी रामकुमार शर्मा को 37909 वोट पड़े थे। इस बार के बसपा प्रत्याशी मो. बिलाल को 22880 वोट से संतोष करना पड़ा है। यानी पिछली बार से 15029 वोट कम पड़े हैं। वर्ष 2017 में सपा के शाज इशाक उर्फ अज्जू इशाक को 42851 वोट पड़े थे, जो इस बार बढ़कर 101968 तक पहुंच गए हैं। यानी पिछले चुनाव की तुलना में अज्जू को इस बार 59117 वोट अधिक पड़े हैं।
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73289 वोटरों की रही निर्णायक भूमिका
2017 के चुनाव की तुलना में कांग्रेस एवं बसपा के घटे वोटों (23171 और 15029) को जोड़ दें तो संख्या 38200 बैठती है। 2017 के चुनाव में सपा के पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह खान निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में थे और उनको 10912 वोट मिले थे। इसमें हाजी जमीरउल्लाह के वोटों को जोड़ने पर कुल संख्या 49109 बैठती है। 2017 में 228587 एवं 2022 में 252764 वोट पड़े थे, जिसका अंतर 24177 है। सभी वोटों को जोड़ने पर संख्या 73289 बैठती है। इस बार के चुनाव में सपा प्रत्याशी अज्जू एवं भाजपा प्रत्याशी अनिल के बढ़े हुए वोटों को जोड़ दे तो संख्या 72798 आती है। ध्रुवीकरण के बाद यही वोट जीत और हार के कारण बने।
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पिछली बार 13, इस बार 9 प्रत्याशी
कोल विधान सभा क्षेत्र में 2017 में 13 प्रत्याशी थे। जबकि इस बार 9 प्रत्याशी किस्मत अजमा रहे थे। दोनों चुनावों में भाजपा, सपा, कांग्रेस एवं बसपा को छोड़कर एक मात्र जमीरउल्लाह निर्दलीय प्रत्याशी थे, जिनको दस हजार से अधिक वोट मिले थे। बाकी प्रत्याशियों को 675 से लेकर 155 के बीच वोट हैं।
चुनाव परिणाम कल्पना से परे है। ध्रुवीकरण के कारण वोट संप्रदायों में बंट गए। चुनाव के दिन तक क्षेत्र में कहा गया कि साइकिल चल रही है। इसका असर पड़ा और वोटरों का रुख बदल गया। इससे भाजपा एवं सपा को फायदा हुआ। पूरे प्रदेश में यहीं हुआ है।
- विवेक बंसल, कांग्रेस प्रत्याशी
ध्रुवीकरण की वजह से वोटों का बंटवारा हो गया। बसपा का कुछ प्रतिशत वोट प्रभावित हुआ है। भाजपा एवं सपा को लाभ हुआ है। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। गांव में भाजपा का विरोध हो रहा था। चुनाव परिणाम में उसके वोट बढ़ गए हैं। गठबंधन का वोट भी भाजपा को पड़ा है।
- रतनदीप सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष
दो विधान सभा चुनावों पर एक नजर
प्रत्याशी पार्टी 2017 में पडे़ वोट 2022 में पड़े वोट
अनिल पाराशर भाजपा 93814 107495
अज्जू इशहाक सपा 42851 101968
विवेक बंसल कांग्रेस 38623 15452
रामकुमार शर्मा/मो. बिलाल बसपा 37909 22880
जमीरउल्लाह खान निर्दलीय 10912 -
- 2017 में कुल मतदान - 228587
- 2022 में कुल मतदान - 252764