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ये कैसा ऑपरेशन कायाकल्प: यह मजबूरी की पाठशाला, कमरा एक और बच्चे 194, खुले में हो रही 'प' से पढ़ाई

Thu, 20 Aug 2026 05:28 PM IST
Chaman Kumar Sharma रूपेश शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
रूपेश शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 20 Aug 2026 05:28 PM IST
सार

विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 194 बच्चे पंजीकृत हैं। पांच कक्षाओं के लिए महज एक कमरा होने से सभी बच्चों को एक साथ बैठाना संभव नहीं है। ऐसे में बच्चों को खुले परिसर में बैठाकर पढ़ाया जाता है। टाट-पट्टी पर बैठे बच्चों की कक्षाएं मौसम के भरोसे चल रही हैं।

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Condition of Primary School of Talsapur Kalan
तालसपुर कलां प्राथमिक विद्यालय में खुले में क्लास - फोटो : संवाद

विस्तार

ऑपरेशन कायाकल्प के जरिये सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अलीगढ़ में जिला मुख्यालय से महज 13 किलोमीटर दूर एक सरकारी स्कूल अब भी बदहाली की तस्वीर दिखा रहा है। स्थिति यह है कि स्कूल में सिर्फ एक कमरा है और उसमें कक्षा एक से पांच तक के 194 बच्चों की पढ़ाई होती है। जगह कम पड़ने पर बच्चों को खुले में इंटरलॉकिंग पर टाट-पट्टी बिछाकर बैठना पड़ता है। इसी कमरे में नया फर्नीचर रखा है और प्राचार्या व शिक्षकों का कार्यालय भी चल रहा है। स्कूल में शिक्षक और शिक्षामित्र समेत आठ लोगों का स्टाफ तैनात है।

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यह तस्वीर तालसपुर कलां के प्राथमिक विद्यालय की है। स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल शिक्षा के दौर में यहां शिक्षक अब भी पारंपरिक बोर्ड पर बच्चों के लिए सवाल लिखकर पढ़ा रहे हैं। पंखे लगे हैं, लेकिन बिजली का कनेक्शन नहीं है। गर्मी और उमस में बच्चों को खुले में बैठना पड़ता है। बारिश में स्कूल के आसपास जलभराव और कीचड़ की समस्या बढ़ जाती है, जिसके कारण पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
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194 बच्चों के लिए एक ही कमरा
विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 194 बच्चे पंजीकृत हैं। पांच कक्षाओं के लिए महज एक कमरा होने से सभी बच्चों को एक साथ बैठाना संभव नहीं है। ऐसे में बच्चों को खुले परिसर में बैठाकर पढ़ाया जाता है। टाट-पट्टी पर बैठे बच्चों की कक्षाएं मौसम के भरोसे चल रही हैं।

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Condition of Primary School of Talsapur Kalan
कमरे में पड़ा फर्नीचर और उसी में चल रहा स्कूल का कार्यालय - फोटो : संवाद

पंखे लगे, बिजली नहीं
गर्मी से बचाव के लिए कमरे में पंखे लगाए गए हैं, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं होने से उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। खुले में बैठने वाले बच्चों को गर्मी और उमस के बीच पढ़ना पड़ता है। बारिश के दौरान परिसर में जलभराव होने से स्थिति और खराब हो जाती है।

विभाग को कई बार दी जानकारी
प्राचार्या सोनी माहेश्वरी ने बताया कि भवन में जगह कम होने के कारण बच्चों को बाहर बैठाना पड़ता है। इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में है। नए कमरे बनने के बाद बच्चों के बैठने की समस्या दूर हो जाएगी।

निरीक्षण कराएंगे, लेकिन सवाल कई
194 बच्चों की मौजूदा स्थिति के बारे में बीएसए आलोक सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि स्कूल का जल्द निरीक्षण कराया जाएगा और व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि जब 194 बच्चों के लिए सिर्फ एक कमरा है तो अब तक अतिरिक्त कक्ष की व्यवस्था क्यों नहीं हुई? भवन की जरूरत को लेकर प्रस्ताव भेजे जाने के बाद वह किस स्तर पर अटका है? पंखे लगाए जाने के बावजूद बिजली कनेक्शन अब तक क्यों नहीं कराया गया? और बारिश में पढ़ाई प्रभावित होने की जानकारी होने के बाद बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का अभियान चल रहा है, तब जिला मुख्यालय से महज 13 किलोमीटर दूर इस स्कूल के 194 बच्चों को अब भी खुले में पढ़ने की मजबूरी क्यों है?

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