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नागरिकता कानून के विरोध में एएमयू में निकाला कैंडल मार्च

Tue, 24 Dec 2019 01:48 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Dec 2019 01:48 AM IST
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Candle march in AMU
एमयू के बाबे सैयद पर मार्च के दौरान कैंडल जलाकर छात्राओं ने विरोध प्रकट किया। - फोटो : CITY OFFICE
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में एएमयू में सोमवार को भी धरना-प्रदर्शन जारी रहे। एएमयू शिक्षिकाओं ने स्टाफ क्लब से बाब ए सैयद तक जुलूस निकाला। शाम को एएमयू छात्रों, शिक्षकों, सभी स्टाफ संगठनों आदि ने मिलकर कैंडल मार्च निकाला। साथ ही राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। जबकि स्थानीय छात्राओं का धरना जारी रहा।
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सोमवार शाम को एएमयू कैंपस में निकाले गए विशाल कैंडल मार्च में एएमयू छात्रों के अलावा शोध छात्र, शिक्षक, स्टाफ, टेक्निकल स्टाफ, स्थानीय छात्र आदि शामिल रहे। ये लोग कैंपस में चुंगी गेट के पास इकट्ठा हुए। यहां से फिजिक्स डिपार्टमेंट, इंजीनियरिंग कालेज, दीनियात विभाग, आर्ट फैकल्टी, पीवीसी लाज, स्टाफ क्लब होते हुए बाब ए सैयद गेट पर पहुंचे। यहां पर मोमबत्तियां एक स्थान पर रख दी र्गइं। सभी लोगों के हाथों में बैनर आदि लगे हुए थे।
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प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि नागरिकता कानून को रद्द करने, एनआरसी को अस्वीकार करने और एएमयू कैंपस में पुलिस के घुसकर अराजकता फैलाने के विरोध में शांतिपूर्वक कैंडल मार्च निकाला गया है। नागरिकता कानून संविधान की धारा 14 का उल्लंघन है। पूरे प्रकरण में एएमयू प्रशासन की भूमिका की भी निंदा की गई है। ज्ञापन में कैंपस में घुसने के जिम्मेदार पुलिस वालों के निलंबन की मांग भी की गई है। इसके अलावा जिन एएमयू छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं उनको भी वापस लिया जाए। इसके अलावा राष्ट्रव्यापी चले इस हिंसक दमन में मारे गए सभी लोगों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी के साथ मुआवजा भी दिया जाए।
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शिक्षिकाएं पोस्टर लेकर विरोध में उतरीं
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की शिक्षिकाओं ने एक विरोध मार्च निकाला।
यह मार्च स्टाफ क्लब से होकर गेस्ट हाउस और उसके बाद बाबे सैयद तक पहुंचा। यहां पर शिक्षिकाओं ने संबोधन किया, जिसमें कहा कि यह कानून भारत के संविधान की भावना के विपरीत है। इस कानून से धार्मिक आधार पर भेदभाव की जमीन तैयार होती है। साथ ही विश्व समुदाय में भी इस कानून को लेकर भारत की निंदा हो रही है। हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध करते हैं और केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि इस कानून को जल्द से जल्द वापस लिया जाए। अंग्रेजी विभाग की प्रो. समीना खान ने कहा कि यह कानून मानवाधिकारों का हनन करता है। राष्ट्रहित को प्रभावित करता है। प्रो. आयशा ने कहा कि हम किसी भी तरह का भेदभाव नहीं चाहते हैं।
हम चाहते हैं सभी को रोजगार मिले, सभी का विकास हो। इस तरह के भेदभाव से दुनिया में भारत की बदनामी हो रही है। प्रो. शादाब बानो ने कहा कि यह जनविरोधी सरकार है। जनमत का बिल्कुल भी ख्याल नहीं है। इतनी आर्थिक मंदी के दौर में इस कानून को लाने का कोई औचित्य नहीं था। यह बड़ी अजीब बात है कि गृह मंत्री संसद में कुछ और कहते हैं और प्रधानमंत्री रामलीला मैदान में कुछ और कह रहे हैं। इस तरह भ्रम की स्थिति यह स्वयं पैदा कर रहे हैं।

ओवैसी ने एएमयू में हुए घटनाक्रम की निंदा की
एआईएमआईएम के प्रमुख असदउद्दीन उवैसी ने कहा है कि जो कुछ एएमयू में हुआ, उसकी निंदा करता हूं। वीसी साहब जब आपका दुनिया से जाने का वक्त आएगा तो आपको उचित तरीके से नहीं देखा जाएगा। क्योंकि यह वीसी पुलिस को लिखकर देता है कि पुलिस कैंपस में प्रवेेश कर सकती है। उवैसी का यह बयान मीडिया की सुर्खियां बन रहा है।

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में एएमयू के बाबे सैयद पर कैंडल मार्च के दौरान जुटे छात्र-छात्राए?

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में एएमयू के बाबे सैयद पर कैंडल मार्च के दौरान जुटे छात्र-छात्राए?- फोटो : CITY OFFICE

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