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सऊदी प्रिंस के दादा 1955 में आए थे अलीगढ़, एएमयू ने दी थी मानद उपाधि
Wed, 20 Feb 2019 09:50 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 20 Feb 2019 09:50 PM IST
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Prince Mohammed Bin Salman and Prime Minister Narendra Modi
- फोटो : फाइल फोटो
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सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इन दिनों भारत की यात्रा पर हैं। इसके साथ प्रिंस के परिवार और सऊदी अरब से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से जुड़़ाव भी एक बार चर्चा में है। प्रिंस सलमान के दादा 1955 में एएमयू आए थे। यहां उन्हें डाक्टरेट की मानद उपाधि दी गई। बाद में उन्होंने एएमयू में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए एक लाख रुपये का दान भी दिया, जो उस समय बड़ी रकम थी।
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एएमयू के इतिहास से जुड़े मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार बताते हैं कि इस समय जो प्रिंस भारत में आए हैं, उनके दादा किंग शाह सऊद बिन अब्दुल अजीज 1955 में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह में एएमयू आए थे। उस समय डॉ. जाकिर हुसैन कुलपति थे और बोहरा समुदाय के धर्मगुरु सैयदाना ताहिर सैफुद्दीन चांसलर थे। किंग को उस समय एलएलडी यानि डाक्टरेट ऑफ लॉ की उपाधि दी गई। साथ ही एएमयू छात्र संघ ने भी किंग को छात्रसंघ की आजीवन सदस्यता दी। इसके बाद 1956 में एएमयू का एक प्रतिनिधि मंडल जिसमें नवाब छतारी भी शामिल थे, सऊदी अरब गया। इसका मकसद अलीगढ़ में खुलने वाले मेडिकल कॉलेज के लिए सहायता जुटाना था। किंग शाह सऊद बिन अब्दुल अजीज ने मेडिकल कॉलेज के लिए एक लाख रुपये दिये थे।
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आज भी मौजूद हैं अरब से आए खजूर के दोनों पेड़
डॉ. राहत अबरार बताते हैं कि 1875 में मोहम्डन एंग्लो ओरियंटल स्कूल शुरू करते समय सर सैयद अहमद ने अरब से खजूर के दो पेड़ मंगवाकर परिसर में स्थित स्ट्रैची हाल के बाहर लगवाए। सर सैयद खजूर के पेड़ के माध्यम से यह कहना चाहते थे कि जिस प्रकार खजूर का पेड़ फौरी तौर पर फल नहीं देता, लंबे समय बाद उसका लाभ मिलता है। उसी तरह इस संस्था के फल भविष्य में बहुत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। बाद में इस स्कूल के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बनने पर खजूर के पेड़ों को ही इसका मोनोग्राम बनाया गया।
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