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अलीगढ़ : परिवार के पांच सदस्यों की सामूहिक हत्या में तीन दोषी करार
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कस्बा खैर की ब्लॉक कॉलोनी में परिवार के चार सदस्यों की सामूहिक हत्या और परिवार के मुखिया की हत्या कर शव आगरा में फेंके जाने के तीन आरोपी दोषी करार दे दिए गए। शनिवार को तीनों आरोपियों को एडीजे प्रथम शाहिद रजा की अदालत ने दोषी करार दिया है और सजा सुनाए जाने के लिए 22 नवंबर की तारीख नियत कर दी है।
इस दौरान तीनों आरोपी न्यायालय में मौजूद रहे, जिन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। बता दें कि इस मामले में एक आरोपी नाबालिग करार दिए जाने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार, वाकया 22 अगस्त 2011 की दोपहर का है।
कस्बा खैर ब्लॉक कॉलोनी में केदार सिंह (मूल निवासी धूमरा, मांट जिला मथुरा) के मकान से तेज दुर्गंध आ रही थी। इस पर लोगों ने केदार सिंह के ससुरालियों व पुलिस को खबर दी। इस खबर पर पहुंची पुलिस व ससुरालियों ने पाया कि गृहस्वामी केदार सिंह की पत्नी हेमलता, दो बच्चों नवीन, स्वदेश व उनके पिता अतर सिंह की लाशें घर के अलग-अलग हिस्सों में पड़ी थीं।
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गरमी होने के कारण शव सड़ रहे थे। पोस्टमार्टम में इनकी करीब चार दिन पहले गला दबाकर हत्या होना उजागर हुआ। इसका मुकदमा अज्ञात में केदार सिंह के ससुर किशन सिंह निवासी मांट, मथुरा ने दर्ज कराया। जांच में पता चला कि केदार सिंह लापता हैं। बाद में उनका शव आगरा के बरहन क्षेत्र में पाया गया।
इन पांचों हत्याओं का खुलासा करते हुए पुलिस ने केदार के रिश्ते के भाई चंद्रवीर, उसके साथी रोहित, सेवानिवृत्त एसडीओ टेलीफोन परशुराम के पुत्र राजीव शर्मा व एक नाबालिग को गिरफ्तार किया। बाद में चारों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दायर कर दी। सत्र परीक्षण के दौरान नाबालिग आरोपी की पत्रावली अलग कर दी गई, जबकि तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमे का ट्रायल एडीजे प्रथम के न्यायालय में शुरू हुआ।
एडीजीसी के अनुसार मुकदमे में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस व साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने शनिवार को फैसले की तारीख नियत कर रखी थी। शनिवार को तीनों आरोपी न्यायालय में पेश हुए, जिन्हें न्यायालय ने सामूहिक हत्या के लिए दोषी करार दिया है।
अब सजा सुनाने के लिए 22 नवंबर की तारीख नियत की है। आरोपियों में से चंद्रवीर व रोहित जेल से तलब किए गए थे, जबकि राजीव जमानत पर था। चंद्रवीर व रोहित के साथ राजीव को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया है।
उधारी न दी तो संपत्ति की खातिर मार डाला परिवार
अभियोजन पक्ष के अनुसार पुलिस की जांच में उजागर हुआ था कि केदार के कोई अन्य भाई नहीं है। वह अपनी पैतृक गांव की संपत्ति बेचकर बच्चों को पढ़ाने के इरादे से खैर में आकर बस गए थे। चंद्रवीर ने एक मर्तबा दो लाख रुपये की रुपये की जरूरत पर केदार सिंह से रुपये उधार मांगे थे। मगर केदार ने उधार देने से मना कर दिया। इसी बात पर चंद्रवीर खफा हो गया और वह 12 अगस्त को केदार को अपने साथ ले गया।
फिर केदार नहीं लौटा। जांच में खुलासा हुआ कि केदार की हत्या कर शव आगरा के बरहन में फेंका गया। बाद में परिवार के अन्य सदस्यों को इसलिए मारा गया कि केदार के कोई भाई या अन्य वारिस नहीं हैं। परिवार के सभी सदस्यों को मारकर उनके मकान व संपत्तियों पर फर्जी वसीयत/बैनामे के आधार पर कब्जा कर लेंगे।
एक अन्य अपहरण-हत्या में सजायाफ्ता हैं दो आरोपी
इस हत्याकांड में दोषी करार दिए गए चंद्रवीर व रोहित इगलास के एक अन्य अपहरण व हत्याकांड में सजायाफ्ता हैं। इसलिए वे पिछले काफी समय से जेल में हैं। चूंकि, रोहित को जमानत मिल चुकी थी। इसलिए उसे शनिवार को दोषी करार देते हुए न्यायिक अभिरक्षा में लिया गाया है।
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इस दौरान तीनों आरोपी न्यायालय में मौजूद रहे, जिन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। बता दें कि इस मामले में एक आरोपी नाबालिग करार दिए जाने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार, वाकया 22 अगस्त 2011 की दोपहर का है।
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कस्बा खैर ब्लॉक कॉलोनी में केदार सिंह (मूल निवासी धूमरा, मांट जिला मथुरा) के मकान से तेज दुर्गंध आ रही थी। इस पर लोगों ने केदार सिंह के ससुरालियों व पुलिस को खबर दी। इस खबर पर पहुंची पुलिस व ससुरालियों ने पाया कि गृहस्वामी केदार सिंह की पत्नी हेमलता, दो बच्चों नवीन, स्वदेश व उनके पिता अतर सिंह की लाशें घर के अलग-अलग हिस्सों में पड़ी थीं।
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गरमी होने के कारण शव सड़ रहे थे। पोस्टमार्टम में इनकी करीब चार दिन पहले गला दबाकर हत्या होना उजागर हुआ। इसका मुकदमा अज्ञात में केदार सिंह के ससुर किशन सिंह निवासी मांट, मथुरा ने दर्ज कराया। जांच में पता चला कि केदार सिंह लापता हैं। बाद में उनका शव आगरा के बरहन क्षेत्र में पाया गया।
इन पांचों हत्याओं का खुलासा करते हुए पुलिस ने केदार के रिश्ते के भाई चंद्रवीर, उसके साथी रोहित, सेवानिवृत्त एसडीओ टेलीफोन परशुराम के पुत्र राजीव शर्मा व एक नाबालिग को गिरफ्तार किया। बाद में चारों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दायर कर दी। सत्र परीक्षण के दौरान नाबालिग आरोपी की पत्रावली अलग कर दी गई, जबकि तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमे का ट्रायल एडीजे प्रथम के न्यायालय में शुरू हुआ।
एडीजीसी के अनुसार मुकदमे में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस व साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने शनिवार को फैसले की तारीख नियत कर रखी थी। शनिवार को तीनों आरोपी न्यायालय में पेश हुए, जिन्हें न्यायालय ने सामूहिक हत्या के लिए दोषी करार दिया है।
अब सजा सुनाने के लिए 22 नवंबर की तारीख नियत की है। आरोपियों में से चंद्रवीर व रोहित जेल से तलब किए गए थे, जबकि राजीव जमानत पर था। चंद्रवीर व रोहित के साथ राजीव को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया है।
उधारी न दी तो संपत्ति की खातिर मार डाला परिवार
अभियोजन पक्ष के अनुसार पुलिस की जांच में उजागर हुआ था कि केदार के कोई अन्य भाई नहीं है। वह अपनी पैतृक गांव की संपत्ति बेचकर बच्चों को पढ़ाने के इरादे से खैर में आकर बस गए थे। चंद्रवीर ने एक मर्तबा दो लाख रुपये की रुपये की जरूरत पर केदार सिंह से रुपये उधार मांगे थे। मगर केदार ने उधार देने से मना कर दिया। इसी बात पर चंद्रवीर खफा हो गया और वह 12 अगस्त को केदार को अपने साथ ले गया।
फिर केदार नहीं लौटा। जांच में खुलासा हुआ कि केदार की हत्या कर शव आगरा के बरहन में फेंका गया। बाद में परिवार के अन्य सदस्यों को इसलिए मारा गया कि केदार के कोई भाई या अन्य वारिस नहीं हैं। परिवार के सभी सदस्यों को मारकर उनके मकान व संपत्तियों पर फर्जी वसीयत/बैनामे के आधार पर कब्जा कर लेंगे।
एक अन्य अपहरण-हत्या में सजायाफ्ता हैं दो आरोपी
इस हत्याकांड में दोषी करार दिए गए चंद्रवीर व रोहित इगलास के एक अन्य अपहरण व हत्याकांड में सजायाफ्ता हैं। इसलिए वे पिछले काफी समय से जेल में हैं। चूंकि, रोहित को जमानत मिल चुकी थी। इसलिए उसे शनिवार को दोषी करार देते हुए न्यायिक अभिरक्षा में लिया गाया है।