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जहरीली शराब कांडः शराब ने कर दी जिंदगी खराब, खाई कसम, न पियूंगा, न पीने दूंगा
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अभिषेक शर्मा
लोधा का गांव करसुआ। इन दिनों किसी पहचान का मोहताज नहीं है। इसी गांव से जहरीली शराब ने मौत का तांडव मचाना शुरू किया। गांव में दस मौतें हुईं। कई ऐसे भी हैं, जो मौत को मात देकर घर लौट आए हैं। मगर उनके डर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे खुद के जीवन के बचने और अपनों की मौत पर साफ कह रहे हैं कि जहरीली शराब ने जिंदगी खराब कर दी। शराब ने उनके परिवार की खुशियों को बे-रौनक कर दिया। शराब पीकर मौत को मात देने वालों ने कसम खाई है कि वह जिंदगी में कभी न तो शराब पिएंगे और न ही परिवार के किसी भी व्यक्ति को पीने देंगे। जेएन मेडिकल कॉलेज में जीवन-मृत्यु से संघर्ष करके अपने घर लौटे पीड़ितों ने अपने हृदय की बात कही।
गांव के ही देसी शराब के ठेके से शराब खरीदकर पी थी। शुरुआत में लगा कि अब शायद न बचूंगा। जेएन मेडिकल कॉलेज में इलाज हुआ। प्रतिज्ञा की है कि कभी जीवन में शराब नहीं पियूंगा और न ही परिवार में किसी को शराब के नजदीक आने दूंगा। पिता संतोष की जहरीली शराब से हुई मौत को लेकर परिवार में मातम छाया हुआ है। - राकेश, करसुआ
जहरीली शराब खरीद कर पी थी। उसके बाद दौरा पड़ गया। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। लगा कि अब दिखाई नहीं दे रहा है। नव ज्योति अस्पताल रामघाट रोड में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला। स्वस्थ होकर अपने घर जिंदा वापस आ गया। मैंने प्रतिज्ञा कर ली है कि जब तक जिंदा रहूंगा, तब तक शराब का सेवन नहीं करूंगा। - सतीश कुमार, रायट
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अलीगढ़ से बैलगाड़ी में भूसा बेचकर शाम को घर आ रहा था, तो गांव करसुआ के शराब के ठेके से शराब खरीदकर पी ली। शराब पीने के बाद हालत बिगड़ गई। मुझे अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां उपचार मिला। इसके बाद स्वस्थ हो गया। अब मैंने प्रतिज्ञा कर ली है कि कभी शराब नहीं पियूंगा। अब मुझे नया जीवन मिला है। - भगवान सिंह, करसुआ
मजदूरी कर शाम को मैंने गांव के ठेके से शराब खरीदी और पी ली। इसके बाद मेरी हालत बिगड़ गई। अस्पताल में मुझे भर्ती कराया गया, जहां मेरा इलाज हुआ। अब मैं स्वस्थ हूं। मेरे परिवार में शराब के सेवन से दो लोगों की मौत हो गई है। मैं प्रतिज्ञा करता हूं, कभी शराब का सेवन नहीं करूंगा और नहीं मैं अपने परिवार में किसी करने दूंगा। -ऋ षिपाल, करसुआ
27 अप्रैल को पचपेड़ा से शराब खरीदकर पी ली थी। शराब पीने से हालत बिगड़ गई। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। मलखान सिंह जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मेडिकल के लिए रेफर कर दिया। मेडिकल में लोगों की मौत की लंबी लाइन को देखकर कलेजा कांप उठा। घर चला आया। अब आयुर्वेदिक उपचार करा रहा हूं। शराब ही नहीं, पान मसाला छोड़ दिया है। -देवकरण, रायट
27 अप्रैल को खेत पर काम किया। काम खत्म करने के बाद शराब के ठेके से शराब खरीदी, फिर पी। शराब पीने के बाद मेरी हालत खराब हो गई। मुझे अस्पताल भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज चला। कई दिनों तक इलाज के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हैं। मैंने प्रतिज्ञा ली है कि जीवन में कभी शराब नहीं पियूंगा। - सुरजीत, करसुआ
करसुआ वालों ने मुख्यमंत्री को भेजा अपने दर्द का पत्र
मृतकों के परिजन को ढांढस बंधाने कोई अफसर नहीं आया : गांववासी
जहरीली शराब पीकर गांव करसुआ के 10 लोग काल के गाल में समा गए, लेकिन उनके परिजनों को ढांढस बंधाने न तो कोई सरकारी अधिकारी आया और न ही शासन का कोई प्रतिनिधि। मदद भी नहीं की। अलबत्ता, शराब माफिया से मिलीभगत कर ली। यह आरोप करसुआ के लोगों ने लगाया है। ग्रामीणों ने कहा कि गांव के अजय कुमार, दिनेश कुमार, सुनील, महेश सिंह, राजेश, संतोष, ओम प्रकाश, जयपाल सिंह, सतीश, रामचरण की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई है। उन्होंने कहा कि इस घटना से लोगों में शासन-प्रशासन के प्रति गुस्सा है, जो कभी भी फूट सकता है। लोगों ने मृतक के परिजन को सरकारी नौकरी, मुआवजा दिया जाए, ताकि उनके बच्चों का भरण-पोषण हो सके। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, डीएम, एसएसपी, मुख्य सचिव, आयुक्त सहित उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा है।
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लोधा का गांव करसुआ। इन दिनों किसी पहचान का मोहताज नहीं है। इसी गांव से जहरीली शराब ने मौत का तांडव मचाना शुरू किया। गांव में दस मौतें हुईं। कई ऐसे भी हैं, जो मौत को मात देकर घर लौट आए हैं। मगर उनके डर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे खुद के जीवन के बचने और अपनों की मौत पर साफ कह रहे हैं कि जहरीली शराब ने जिंदगी खराब कर दी। शराब ने उनके परिवार की खुशियों को बे-रौनक कर दिया। शराब पीकर मौत को मात देने वालों ने कसम खाई है कि वह जिंदगी में कभी न तो शराब पिएंगे और न ही परिवार के किसी भी व्यक्ति को पीने देंगे। जेएन मेडिकल कॉलेज में जीवन-मृत्यु से संघर्ष करके अपने घर लौटे पीड़ितों ने अपने हृदय की बात कही।
गांव के ही देसी शराब के ठेके से शराब खरीदकर पी थी। शुरुआत में लगा कि अब शायद न बचूंगा। जेएन मेडिकल कॉलेज में इलाज हुआ। प्रतिज्ञा की है कि कभी जीवन में शराब नहीं पियूंगा और न ही परिवार में किसी को शराब के नजदीक आने दूंगा। पिता संतोष की जहरीली शराब से हुई मौत को लेकर परिवार में मातम छाया हुआ है। - राकेश, करसुआ
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जहरीली शराब खरीद कर पी थी। उसके बाद दौरा पड़ गया। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। लगा कि अब दिखाई नहीं दे रहा है। नव ज्योति अस्पताल रामघाट रोड में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला। स्वस्थ होकर अपने घर जिंदा वापस आ गया। मैंने प्रतिज्ञा कर ली है कि जब तक जिंदा रहूंगा, तब तक शराब का सेवन नहीं करूंगा। - सतीश कुमार, रायट
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अलीगढ़ से बैलगाड़ी में भूसा बेचकर शाम को घर आ रहा था, तो गांव करसुआ के शराब के ठेके से शराब खरीदकर पी ली। शराब पीने के बाद हालत बिगड़ गई। मुझे अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां उपचार मिला। इसके बाद स्वस्थ हो गया। अब मैंने प्रतिज्ञा कर ली है कि कभी शराब नहीं पियूंगा। अब मुझे नया जीवन मिला है। - भगवान सिंह, करसुआ
मजदूरी कर शाम को मैंने गांव के ठेके से शराब खरीदी और पी ली। इसके बाद मेरी हालत बिगड़ गई। अस्पताल में मुझे भर्ती कराया गया, जहां मेरा इलाज हुआ। अब मैं स्वस्थ हूं। मेरे परिवार में शराब के सेवन से दो लोगों की मौत हो गई है। मैं प्रतिज्ञा करता हूं, कभी शराब का सेवन नहीं करूंगा और नहीं मैं अपने परिवार में किसी करने दूंगा। -ऋ षिपाल, करसुआ
27 अप्रैल को पचपेड़ा से शराब खरीदकर पी ली थी। शराब पीने से हालत बिगड़ गई। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। मलखान सिंह जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मेडिकल के लिए रेफर कर दिया। मेडिकल में लोगों की मौत की लंबी लाइन को देखकर कलेजा कांप उठा। घर चला आया। अब आयुर्वेदिक उपचार करा रहा हूं। शराब ही नहीं, पान मसाला छोड़ दिया है। -देवकरण, रायट
27 अप्रैल को खेत पर काम किया। काम खत्म करने के बाद शराब के ठेके से शराब खरीदी, फिर पी। शराब पीने के बाद मेरी हालत खराब हो गई। मुझे अस्पताल भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज चला। कई दिनों तक इलाज के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हैं। मैंने प्रतिज्ञा ली है कि जीवन में कभी शराब नहीं पियूंगा। - सुरजीत, करसुआ
करसुआ वालों ने मुख्यमंत्री को भेजा अपने दर्द का पत्र
मृतकों के परिजन को ढांढस बंधाने कोई अफसर नहीं आया : गांववासी
जहरीली शराब पीकर गांव करसुआ के 10 लोग काल के गाल में समा गए, लेकिन उनके परिजनों को ढांढस बंधाने न तो कोई सरकारी अधिकारी आया और न ही शासन का कोई प्रतिनिधि। मदद भी नहीं की। अलबत्ता, शराब माफिया से मिलीभगत कर ली। यह आरोप करसुआ के लोगों ने लगाया है। ग्रामीणों ने कहा कि गांव के अजय कुमार, दिनेश कुमार, सुनील, महेश सिंह, राजेश, संतोष, ओम प्रकाश, जयपाल सिंह, सतीश, रामचरण की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई है। उन्होंने कहा कि इस घटना से लोगों में शासन-प्रशासन के प्रति गुस्सा है, जो कभी भी फूट सकता है। लोगों ने मृतक के परिजन को सरकारी नौकरी, मुआवजा दिया जाए, ताकि उनके बच्चों का भरण-पोषण हो सके। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, डीएम, एसएसपी, मुख्य सचिव, आयुक्त सहित उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा है।