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मतगणना : भाग्य का फैसला कल... तेजी से धड़क रहे नेताओं के दिल
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विधानसभा का चुनावी समर पूरा हो चुका है। भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद है। परिणाम में सिर्फ 24 घंटे शेष हैं। मतलब 10 मार्च की दोपहर 12 बजे तक तस्वीर लगभग साफ हो जाएगी कि किस सीट पर मतदाता किसके लिए भाग्य विधाता बने। इससे पहले एग्जिट पोल ने नेताओं की धड़कनें बढ़ा रखी हैं। कोई अपनी सीट को लेकर चिंतित है? कोई अपने दल की सरकार को लेकर? बस एक ही चिंता है कि आखिर परिणाम क्या होगा? अगर पिछले चुनाव परिणाम पर गौर करें तो जिले की सातों सीटों पर भाजपा का कब्जा था। क्या इस बार जिले में भाजपा इसी बहुमत के साथ वापसी करेगी? या सपा-रालोद, बसपा या कांग्रेस खेमा कोई कमाल कर दिखाएगा?
मतदान के परिणाम और सरकार बनने को लेकर मतदाता भी चिंतित हैं। सभी की नजर एग्जिट पोल से लेकर चुनावी गणित पर लगी हैं। सबके अपने अपने दावे हैं। समर्थकों में भी गुणाभाग बहुत तेजी से लगाया जा रहा है। सट्टा बाजार भी चरम पर है। कोई सीट वार सट्टा लगा रहा है तो कोई प्रत्याशी वार और कोई सरकार की हार जीत पर सट्टा लगा रहा है। इसके साथ ही इस चुनाव परिणाम में जिले के कई सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। हालांकि, दस मार्च को यह तय हो जाएगा कि जिले के मतदाताओं में किस दल और किस नेता की कितनी पैंठ है।
भाजपा को बेहतर नतीजों संग वापसी की उम्मीद
2012 में शून्य से 2017 में जिले की सातों सीटों पर कब्जा जमाने वाली भाजपा को इस बार भी बेहतर नतीजों के साथ सातों सीटों पर वापसी उम्मीद है। हां, भाजपा इस बार बेहद दमदारी से चुनाव भी लड़ी है। बरौली छोड़कर सभी सीटों पर मौजूदा विधायकों को मौका दिया गया है। सरकार के काम के सहारे मतदाताओं से समर्थन जुटाया है। इसी सब के दम पर भाजपा के अलंबरदार नेता दावा कर रहे हैं कि हम 2017 विधानसभा और 2019 लोकसभा का परिणाम दोहराने जा रहे हैं। जैसे गत दोनों चुनावों में जिले की सातों सीटों पर जीत दर्ज की है। इस बार भी परिणाम वही आएंगे। हालांकि इस बार कल्याण सिंह नहीं हैं। मगर उनके पुत्र व पौत्र दमखम से चुनाव मैदान में हैं। अतरौली से कल्याण सिंह पौत्र संदीप सिंह, बरौली से पूर्व मंत्री जयवीर सिंह, कोल से विधायक अनिल पाराशर, शहर से विधायक संजीव राजा की पत्नी मुक्ता राजा, छर्रा से विधायक रविंद्रपाल सिंह, खैर से अनूप प्रधान व इगलास से राजकुमार सहयोगी मैदान में हैं। जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह ने सातों सीट पर जीत का दावा किया है।
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नतीजे तय करेंगे सपा-रालोद गंठबंधन कैसा रहा
2012 के चुनाव तक जिले की सियासत में अच्छा दखल रखने वाले दोनों दल 2017 के चुनाव में शून्य पर आ गए थे। इस चुनाव में दोनों दल गठबंधन के साथ चुनाव लड़े हैं। जिले की चार सीटों पर सपा व तीन पर रालोद प्रत्याशी मैदान में हैं। जिनमें कोल पर अज्जू इशहाक, शहर पर जफर आलम, अतरौली पर वीरेश यादव सपा खेमे से हैं, जबकि छर्रा पर सपा खेमे से नया चेहरा लक्ष्मी धनगर के रूप में है। इसी तरह बरौली पर रालोद से प्रमोद गौड़, इगलास पर वीरपाल, खैर पर भगवती प्रसाद भाग्य आजमा रहे हैं। 2012 के चुनाव में जिले की सातों सीटों पर इन दोनों दलों का कब्जा था। इस बार उसी प्रदर्शन को दोहराने का प्रयास इस गठबंधन के स्तर से हुआ है। मगर चुनौतियों भी बहुत सामने रही हैं। अब 10 मार्च को तय हो जाएगा कि लोगों ने इस गठबंधन को कितना पसंद किया है। हालांकि रालोद जिलाध्यक्ष कालीचरण सिंह व सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव सातों सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं।
खाता खोलने को प्रयासरत बसपा के लिए चुनौती
2007 के बाद से बसपा जिले में लगातार पिछड़ रही है। 2012 व 2017 के चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई बसपा के सामने इस बार खाता खोलना बड़ी चुनौती है। हालांकि चुनाव बसपा ने बेहद मजबूती से लड़ा है। जिले की सातों में से बरौली पर नरेंद्र शर्मा, खैर पर चारू केन, इगलास पर सुशील कुमार, छर्रा पर तिलकराज यादव, शहर पर रजिया खान, कोल पर बिलाल व अतरौली पर ओमवीर सिंह चुनाव मैदान में रहे हैं। बसपा के बेस वोट बैंक के साथ-साथ सातों सीटों पर जातीय अंकगणित बैठाने का भी प्रयास किया गया है। अब सह गणित कितना कारगर होगा और परिणाम क्या होंगे, ये आने वाला समय ही बताएगा। मगर बसपा जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह बेहतर और अच्छे परिणाम का दावा कर रहे हैं।
नतीजे तय करेंगे जिले में कांग्रेस की साख
पिछले एक अर्से से कांग्रेस जिले की सियासत में चुनाव नहीं जीत पा रही है। मगर कांग्रेस के नेता मेहनत बेहद कर रहे हैं। इसी मेहनत का परिणाम है कि विवेक बंसल कांग्रेस के कोल के बेहद पसंदीदा नेताओं में शामिल हैं। मगर लोगों की ये पसंद वोट में कितनी बदली होगी। ये 10 मार्च को साफ होगा। जिले की सातों सीटों पर चुनाव मैदान में रही कांग्रेस ने कोल से विवेक बंसल, शहर से सलमान इम्तियाज, अतरौली से धर्मेंद्र लोधी, छर्रा से अखिलेश शर्मा, बरौली से गौरांग देव, इगलास से प्रीती, खैर से मोनिका को मैदान में उतारा है। साथ में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने भी जिले की चार सीटों पर रोड शो के जरिये जनता से जुड़ाव का प्रयास किया था। मगर इस सबके बाद परिणाम जिले में पार्टी की साख तय करेंगे। जिलाध्यक्ष संतोष सिंह बेहतर परिणाम का दावा कर रहे हैं।
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मतदान के परिणाम और सरकार बनने को लेकर मतदाता भी चिंतित हैं। सभी की नजर एग्जिट पोल से लेकर चुनावी गणित पर लगी हैं। सबके अपने अपने दावे हैं। समर्थकों में भी गुणाभाग बहुत तेजी से लगाया जा रहा है। सट्टा बाजार भी चरम पर है। कोई सीट वार सट्टा लगा रहा है तो कोई प्रत्याशी वार और कोई सरकार की हार जीत पर सट्टा लगा रहा है। इसके साथ ही इस चुनाव परिणाम में जिले के कई सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। हालांकि, दस मार्च को यह तय हो जाएगा कि जिले के मतदाताओं में किस दल और किस नेता की कितनी पैंठ है।
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भाजपा को बेहतर नतीजों संग वापसी की उम्मीद
2012 में शून्य से 2017 में जिले की सातों सीटों पर कब्जा जमाने वाली भाजपा को इस बार भी बेहतर नतीजों के साथ सातों सीटों पर वापसी उम्मीद है। हां, भाजपा इस बार बेहद दमदारी से चुनाव भी लड़ी है। बरौली छोड़कर सभी सीटों पर मौजूदा विधायकों को मौका दिया गया है। सरकार के काम के सहारे मतदाताओं से समर्थन जुटाया है। इसी सब के दम पर भाजपा के अलंबरदार नेता दावा कर रहे हैं कि हम 2017 विधानसभा और 2019 लोकसभा का परिणाम दोहराने जा रहे हैं। जैसे गत दोनों चुनावों में जिले की सातों सीटों पर जीत दर्ज की है। इस बार भी परिणाम वही आएंगे। हालांकि इस बार कल्याण सिंह नहीं हैं। मगर उनके पुत्र व पौत्र दमखम से चुनाव मैदान में हैं। अतरौली से कल्याण सिंह पौत्र संदीप सिंह, बरौली से पूर्व मंत्री जयवीर सिंह, कोल से विधायक अनिल पाराशर, शहर से विधायक संजीव राजा की पत्नी मुक्ता राजा, छर्रा से विधायक रविंद्रपाल सिंह, खैर से अनूप प्रधान व इगलास से राजकुमार सहयोगी मैदान में हैं। जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह ने सातों सीट पर जीत का दावा किया है।
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नतीजे तय करेंगे सपा-रालोद गंठबंधन कैसा रहा
2012 के चुनाव तक जिले की सियासत में अच्छा दखल रखने वाले दोनों दल 2017 के चुनाव में शून्य पर आ गए थे। इस चुनाव में दोनों दल गठबंधन के साथ चुनाव लड़े हैं। जिले की चार सीटों पर सपा व तीन पर रालोद प्रत्याशी मैदान में हैं। जिनमें कोल पर अज्जू इशहाक, शहर पर जफर आलम, अतरौली पर वीरेश यादव सपा खेमे से हैं, जबकि छर्रा पर सपा खेमे से नया चेहरा लक्ष्मी धनगर के रूप में है। इसी तरह बरौली पर रालोद से प्रमोद गौड़, इगलास पर वीरपाल, खैर पर भगवती प्रसाद भाग्य आजमा रहे हैं। 2012 के चुनाव में जिले की सातों सीटों पर इन दोनों दलों का कब्जा था। इस बार उसी प्रदर्शन को दोहराने का प्रयास इस गठबंधन के स्तर से हुआ है। मगर चुनौतियों भी बहुत सामने रही हैं। अब 10 मार्च को तय हो जाएगा कि लोगों ने इस गठबंधन को कितना पसंद किया है। हालांकि रालोद जिलाध्यक्ष कालीचरण सिंह व सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव सातों सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं।
खाता खोलने को प्रयासरत बसपा के लिए चुनौती
2007 के बाद से बसपा जिले में लगातार पिछड़ रही है। 2012 व 2017 के चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई बसपा के सामने इस बार खाता खोलना बड़ी चुनौती है। हालांकि चुनाव बसपा ने बेहद मजबूती से लड़ा है। जिले की सातों में से बरौली पर नरेंद्र शर्मा, खैर पर चारू केन, इगलास पर सुशील कुमार, छर्रा पर तिलकराज यादव, शहर पर रजिया खान, कोल पर बिलाल व अतरौली पर ओमवीर सिंह चुनाव मैदान में रहे हैं। बसपा के बेस वोट बैंक के साथ-साथ सातों सीटों पर जातीय अंकगणित बैठाने का भी प्रयास किया गया है। अब सह गणित कितना कारगर होगा और परिणाम क्या होंगे, ये आने वाला समय ही बताएगा। मगर बसपा जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह बेहतर और अच्छे परिणाम का दावा कर रहे हैं।
नतीजे तय करेंगे जिले में कांग्रेस की साख
पिछले एक अर्से से कांग्रेस जिले की सियासत में चुनाव नहीं जीत पा रही है। मगर कांग्रेस के नेता मेहनत बेहद कर रहे हैं। इसी मेहनत का परिणाम है कि विवेक बंसल कांग्रेस के कोल के बेहद पसंदीदा नेताओं में शामिल हैं। मगर लोगों की ये पसंद वोट में कितनी बदली होगी। ये 10 मार्च को साफ होगा। जिले की सातों सीटों पर चुनाव मैदान में रही कांग्रेस ने कोल से विवेक बंसल, शहर से सलमान इम्तियाज, अतरौली से धर्मेंद्र लोधी, छर्रा से अखिलेश शर्मा, बरौली से गौरांग देव, इगलास से प्रीती, खैर से मोनिका को मैदान में उतारा है। साथ में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने भी जिले की चार सीटों पर रोड शो के जरिये जनता से जुड़ाव का प्रयास किया था। मगर इस सबके बाद परिणाम जिले में पार्टी की साख तय करेंगे। जिलाध्यक्ष संतोष सिंह बेहतर परिणाम का दावा कर रहे हैं।