{"_id":"60eb3dbf8ebc3ebf5409c11c","slug":"aligarh-news-aligarh-news-ali267859217","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ः चीन से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे 20 हजार भारतीय विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ः चीन से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे 20 हजार भारतीय विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में
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राजा तिवारी
चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे भारत के लगभग 20 हजार विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में है। कोरोना संक्रमण के कारण जनवरी, 2020 से ही चीन में विश्वविद्यालय बंद हैं। पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है, लेकिन प्रेक्टिकल न होने से एमबीबीएस की शिक्षा अधूरी है। चीन में पढ़ रहे भावी डॉक्टरों ने अपनी इस समस्या से निजात पाने के लिए ट्विटर पर ‘टेक अस बैक टू चाइना’ हैशटेग के साथ अभियान छेड़ रखा है। इनकी भारतीय दूतावास से मांग है कि चीन से बात कर उनकी इस समस्या का निदान कराया जाए।
महानगर के जीटी रोड स्थित दर्शन विहार कॉलोनी निवासी दवा कारोबारी मनोज कुमार शर्मा की बेटी वंशिका शर्मा चीन के युजोंग जिला स्थित चोंगकिंग मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही हैं। उन्होंने अक्तूबर 2019 में दाखिला लिया था। अभी पढ़ाई शुरू ही हुई थी कि चीन में कोरोना संक्रमण फैल गया। इस वजह से जनवरी, 2020 में वहां के विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया और विदेशी छात्रों को उनके देश वापस भेज दिया गया। इसके बाद ऑनलाइन पढ़ाई चलती रही।
वंशिका ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के आधार पर ही एमबीबीएस के पहले वर्ष की परीक्षाएं दी। कोरोना संक्रमण की वजह से ही दूसरे साल की पढ़ाई भी यूनिवर्सिटी पहुंचे बिना ही शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि सितंबर, 2021 में एमबीबीएस की दूसरे सत्र की परीक्षाएं होंगी। लेकिन अभी तक वह प्रेक्टिकल में भाग नहीं ले सकीं हैं। वंशिका ने बताया कि दूसरे साल में जीव-जंतुओं के शरीर पर प्रेक्टिकल कराया जाता है, जो ऑनलाइन पढ़ाई के चलते संभव न हो सका। तीसरे सत्र से मानव शरीर के अंगों के बारे में जानकारी देकर चीरने से लेकर स्ट्रिचिंग तक का प्रेक्टिकल कराया जाता है। उन्होंने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे करीब 20 हजार भारतीय विद्यार्थी परेशान हैं कि उन्हें चीन के विश्वविद्यालयों से कोई जानकारी नहीं दी जा रही है कि कब तक उनको बुलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिना प्रेक्टिकल मेडिकल की पढ़ाई अधूरी है। वंशिका की मांग है कि भारतीय दूतावास इस मामले में हस्तक्षेप कर हजारों भारतीय छात्रों का भविष्य बर्बाद होने से बचा ले।
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पढ़ाई के साथ आर्थिक क्षति भी
दर्शन विहार कॉलोनी निवासी वंशिका ने बताया कि उन्होंने अक्तूबर, 2019 में चीन के चोंगकिंग मेडिकल यूनिवर्सिटी तीन लाख रुपये सालाना की ट्यूशन फीस पर अपना दाखिला कराया था। इस पर 50 हजार रुपये का अलग से ट्राजेंक्शन चार्ज भी लगता है। अलीगढ़ से अन्य दो छात्रों को वह जानती हैं, जो वहां अपना एडमिशन ले रखा है। एटा, आगरा, दिल्ली आदि जगहों के बच्चे भी वहां पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि 2019 में लगभग 20 हजार छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई के लिए नामांकन कराया था। वहीं, अन्य छात्रों से बातचीत करने पर पता चला कि वंशिका की फीस बहुत ही कम है। चीन के अन्य मेडिकल विश्वविद्यालयों में छह से सात लाख रुपये सालाना की फीस जाती है।
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चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे भारत के लगभग 20 हजार विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में है। कोरोना संक्रमण के कारण जनवरी, 2020 से ही चीन में विश्वविद्यालय बंद हैं। पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है, लेकिन प्रेक्टिकल न होने से एमबीबीएस की शिक्षा अधूरी है। चीन में पढ़ रहे भावी डॉक्टरों ने अपनी इस समस्या से निजात पाने के लिए ट्विटर पर ‘टेक अस बैक टू चाइना’ हैशटेग के साथ अभियान छेड़ रखा है। इनकी भारतीय दूतावास से मांग है कि चीन से बात कर उनकी इस समस्या का निदान कराया जाए।
महानगर के जीटी रोड स्थित दर्शन विहार कॉलोनी निवासी दवा कारोबारी मनोज कुमार शर्मा की बेटी वंशिका शर्मा चीन के युजोंग जिला स्थित चोंगकिंग मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही हैं। उन्होंने अक्तूबर 2019 में दाखिला लिया था। अभी पढ़ाई शुरू ही हुई थी कि चीन में कोरोना संक्रमण फैल गया। इस वजह से जनवरी, 2020 में वहां के विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया और विदेशी छात्रों को उनके देश वापस भेज दिया गया। इसके बाद ऑनलाइन पढ़ाई चलती रही।
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वंशिका ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के आधार पर ही एमबीबीएस के पहले वर्ष की परीक्षाएं दी। कोरोना संक्रमण की वजह से ही दूसरे साल की पढ़ाई भी यूनिवर्सिटी पहुंचे बिना ही शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि सितंबर, 2021 में एमबीबीएस की दूसरे सत्र की परीक्षाएं होंगी। लेकिन अभी तक वह प्रेक्टिकल में भाग नहीं ले सकीं हैं। वंशिका ने बताया कि दूसरे साल में जीव-जंतुओं के शरीर पर प्रेक्टिकल कराया जाता है, जो ऑनलाइन पढ़ाई के चलते संभव न हो सका। तीसरे सत्र से मानव शरीर के अंगों के बारे में जानकारी देकर चीरने से लेकर स्ट्रिचिंग तक का प्रेक्टिकल कराया जाता है। उन्होंने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे करीब 20 हजार भारतीय विद्यार्थी परेशान हैं कि उन्हें चीन के विश्वविद्यालयों से कोई जानकारी नहीं दी जा रही है कि कब तक उनको बुलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिना प्रेक्टिकल मेडिकल की पढ़ाई अधूरी है। वंशिका की मांग है कि भारतीय दूतावास इस मामले में हस्तक्षेप कर हजारों भारतीय छात्रों का भविष्य बर्बाद होने से बचा ले।
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पढ़ाई के साथ आर्थिक क्षति भी
दर्शन विहार कॉलोनी निवासी वंशिका ने बताया कि उन्होंने अक्तूबर, 2019 में चीन के चोंगकिंग मेडिकल यूनिवर्सिटी तीन लाख रुपये सालाना की ट्यूशन फीस पर अपना दाखिला कराया था। इस पर 50 हजार रुपये का अलग से ट्राजेंक्शन चार्ज भी लगता है। अलीगढ़ से अन्य दो छात्रों को वह जानती हैं, जो वहां अपना एडमिशन ले रखा है। एटा, आगरा, दिल्ली आदि जगहों के बच्चे भी वहां पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि 2019 में लगभग 20 हजार छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई के लिए नामांकन कराया था। वहीं, अन्य छात्रों से बातचीत करने पर पता चला कि वंशिका की फीस बहुत ही कम है। चीन के अन्य मेडिकल विश्वविद्यालयों में छह से सात लाख रुपये सालाना की फीस जाती है।