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मैथिली, पंजाबी, ब्रज भाषा के लोक गीतों पर झूमे श्रोता
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कोहिनूर मंच पर आयोजित भजन संध्या में प्रस्तुति देती मैथिली ठाकुर ।
- फोटो : CITY OFFICE
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नुमाइश के कोहिनूर मंच पर मंगलवार को मैथिली ठाकुर की भजन संध्या का आयोजन किया गया। मैथिली ठाकुर और उनके भाइयों की संगत में श्रोता झूम उठे। मैथिली ने पंजाबी, ब्रज भाषा, मैथिली में लोक गीत और सूफी, कव्वाली के साथ होली के रसिया सुनाए तो दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। देर शाम तक उनके भजनों का लोग आनंद लेते रहे। इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन गिलहराज मंदिर के महंत काशलनाथ योगी महाराज, मधु गौतम, ज्ञानी विशालदीप सिंह, एडीएम सिटी राकेश मालपाणी, एसीएम प्रथम कुलदेव सिंह, एसीएम 2 रंजीत सिंह, कोल तहसीलदार संतोष कुमार ने दीप जलाकर किया।
मैथिली ठाकुर के साथ उनके छोटे भाई ऋषभ ठाकुर ने तबले पर साथ दिया तो अयाची ने ताली बजाकर कोरस गाया। तीनों की जुगलबंदी ने दर्शकों को देर शाम तक बांध रखा। मैथिली ने सूफी गायकी में छाप तिलक सब छीनी रे, तोसे नैना मिलाए के.., झूले लालन.. के साथ नुसरत फतेह अली खां के मेरे रश्के कमर और सोचता हूं कि कितने मासूम थे की प्रस्तुति दी तो दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। उन्होंने पंजाबी में टप्पे और लोक गीत भी गाए। वहीं मिथिला और ब्रज की होली सुनाई तो लोग थिरक भी उठे। होली गीतों में खेले मसानी में होरी दिगंबर, रसिया को नार बनाओ री सखि, रसिया को.. और मिथिला में राम खेले होरी के पद सुनाए। दर्शक देर रात मैथिली की गायकी में झूमते रहे।
मैथिली से मिलने के लिए उत्सुक रहे लोग
पूरे देश में मैथिली ठाकुर के प्रशंसक मिल जाएंगे तो अलीगढ़ भी पीछे कैसे रहता। यही वजह रही कि लोगों ने जहां मैथिली की गायकी सुनी। वहीं उनसे मिलने के लिए जुगत भी लगाते रहे। कुछ लोग मैथिली के पास तक पहुंचे तो उन्होंने सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर डाली।
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मैथिली ठाकुर के साथ उनके छोटे भाई ऋषभ ठाकुर ने तबले पर साथ दिया तो अयाची ने ताली बजाकर कोरस गाया। तीनों की जुगलबंदी ने दर्शकों को देर शाम तक बांध रखा। मैथिली ने सूफी गायकी में छाप तिलक सब छीनी रे, तोसे नैना मिलाए के.., झूले लालन.. के साथ नुसरत फतेह अली खां के मेरे रश्के कमर और सोचता हूं कि कितने मासूम थे की प्रस्तुति दी तो दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। उन्होंने पंजाबी में टप्पे और लोक गीत भी गाए। वहीं मिथिला और ब्रज की होली सुनाई तो लोग थिरक भी उठे। होली गीतों में खेले मसानी में होरी दिगंबर, रसिया को नार बनाओ री सखि, रसिया को.. और मिथिला में राम खेले होरी के पद सुनाए। दर्शक देर रात मैथिली की गायकी में झूमते रहे।
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मैथिली से मिलने के लिए उत्सुक रहे लोग
पूरे देश में मैथिली ठाकुर के प्रशंसक मिल जाएंगे तो अलीगढ़ भी पीछे कैसे रहता। यही वजह रही कि लोगों ने जहां मैथिली की गायकी सुनी। वहीं उनसे मिलने के लिए जुगत भी लगाते रहे। कुछ लोग मैथिली के पास तक पहुंचे तो उन्होंने सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर डाली।
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