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कारोबार: धातु और सिलिंडर की कीमतों में उछाल, युद्ध की मार में जकड़ी अलीगढ़ की हथकड़ी, पुलिस बैज भी हुए महंगे
Fri, 05 Jun 2026 06:03 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Fri, 05 Jun 2026 06:03 PM IST
सार
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले स्थित दिवाक माता मंदिर में श्रद्धालु हथकड़ी और बेड़ियां चढ़ाते हैं। मान्यता है कि माता की कृपा से बंधन स्वतः खुल जाते हैं। मंदिर में दो सौ वर्ष से अधिक पुरानी बेड़ियां आज भी सुरक्षित रखी गई हैं।
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अलीगढ़ में तैयार की गई हथकड़ी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
दुनिया भर की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचने वाली अलीगढ़ की हथकड़ियां इन दिनों खुद महंगाई की गिरफ्त में हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध के कारण पीतल, स्टील, जिंक, कॉपर समेत धातुओं की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है। साथ ही गैस सिलिंडर और मजदूरी की बढ़ी लागत ने उत्पादन महंगा कर दिया है। नतीजा यह है कि 35 देशों को निर्यात होने वाली इन हथकड़ियों की कीमतें 15 और पुलिस के बैज 40 फीसदी तक महंगे हुए। इससे नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
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दरअसल अलीगढ़ की पहचान ताला उद्योग है लेकिन यहां एक परिवार ऐसा भी है जो तीन पीढ़ी से हथकड़ी और पुलिस के बैज बना रहा है। इनके कारीगर भी दादा के जमाने से काम कर रहे हैं। भारत के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मलेशिया, नेपाल, श्रीलंका, केन्या और नाइजीरिया सहित 35 देशों तक हथकड़ी जा रही हैं। 1932 से शुरू इस कारोबार में अब हथकड़ी के फिक्स्ड हैंडकफ, एडजस्टेबल हैंडकफ, आरई मॉडल, हिंज्ड हैंडकफ और लेग-कफ जैसे कई आधुनिक मॉडल बनाए जा रहे हैं। स्टेनलेस स्टील और नए लॉकिंग सिस्टम लगाया जा रहा है जिसमें धातु का इस्तेमाल बढ़ा है। युद्ध से पहले रोजाना 40 से 50 लाख रुपये और विदेशों में एक करोड़ रुपये का कारोबार चल रहा था लेकिन अब यह काफी प्रभावित हुआ है।
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सराय मान सिंह स्थित हथकड़ी उद्योग के संचालक सुधांशु मिश्रा बताते हैं कि स्टील, जिंक, ब्रास और कॉपर की कीमतों में भी लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। गैस सिलिंडर, बिजली और मजदूरी महंगी होने से उत्पादन लागत तेजी से बढ़ी है। युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के कारण कई देशों में गैर-जरूरी खरीद कम हो गई है। सुरक्षा उपकरणों के ऑर्डर तो मिल रहे हैं, लेकिन पहले की तुलना में संख्या घटी है। पुलिस वर्दी पर लगने वाले बैजों की मांग बढ़ी है, जबकि हथकड़ियों के नए ऑर्डर अपेक्षाकृत कम आए हैं।
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राजस्थान में देवी को चढ़ती हैं हथकड़ी-बेड़ियां
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले स्थित दिवाक माता मंदिर में श्रद्धालु हथकड़ी और बेड़ियां चढ़ाते हैं। मान्यता है कि माता की कृपा से बंधन स्वतः खुल जाते हैं। मंदिर में दो सौ वर्ष से अधिक पुरानी बेड़ियां आज भी सुरक्षित रखी गई हैं।