पुलिस की पाठशाला: बच्चों के कॅरियर काउंसलर और गुरु बन गए डीआईजी शलभ माथुर, साइबर क्राइम से सुरक्षा का पढ़ाया
अमर उजाला ने विजडम पब्लिक स्कूल में पुलिस की पाठशाला लगाई। इसमें अलीगढ़ के डीआईजी शलभ माथुर ने बतौर शिक्षक विद्यार्थियों को जीवन में सफल होने के मंत्र बताए। उन्होंने साइबर क्राइम से सुरक्षा का पाठ पढ़ाया।
विस्तार
अमर उजाला के बैनर तले विजडम पब्लिक स्कूल में पुलिस की पाठशाला लगी। इस पाठशाला के शिक्षक अलीगढ़ परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) शलभ माथुर रहे। पाठशाला में डीआईजी शलभ माथुर बच्चों के कॅरियर काउंसलर और गुरु बन गए। बतौर शिक्षक उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में सफल होने के मंत्र बताए। यह भी उन्हें बताया कि समाज के प्रति उनकी बहुत जिम्मेदारी है। वह समाज की आकांक्षाओं पर खरा उतरें। जैसे- यातायात नियमों का पालन करें। समझदारी और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव है।
22 दिसंबर को स्कूल के भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में डीआईजी शलभ माथुर ने कहा कि विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करना चााहिए। जब आपका ड्राइविंग लाइसेंस बन जाए, वाहन चलाएं। हमेशा बायीं ओर चलना चाहिए। हेलमेट आपकी सुरक्षा करता है, लेकिन अधिकतर लोग केवल चालान से बचने के लिए हेलमेट लगाते हैं।
अगर केवल चालान से बचना होता है तो घटिया हेलमेट का प्रयोग करते हैं, जो सड़क हादसे में जान नहीं बचा पाता। उन्होंने कहा कि आने वाले दो साल में महानगर स्मार्ट बन जाएगा। ट्रैफिक लाइट भी दुरुस्त हो जाएगी। इस अवसर पर स्कूल के चेयरमैन प्रमोद गुप्ता, वाइस चेयरमैन महेश चंद्र गुप्ता, उप निदेशक नितिन अग्रवाल, सहायक निदेशक अतिन अग्रवाल, प्रधानाचार्या निर्मल अग्रवाल मौजूद रहीं।
अखबार पढ़ना चाहिए : शलभ
डीआईजी शलभ माथुर ने विद्यार्थियों से कहा कि देश-दुनिया की घटनाओं के बारे में जानकारी के लिए वह रोजाना अखबार पढ़ें। इससे आसपास होने वाले घटनाक्रम के बारे में जान सकेंगे। इससे सामान्य ज्ञान भी मजबूत होगा। कुछ विद्यार्थियों ने उनसे यूपीएससी परीक्षा को लेकर सवाल पूछे। इस पर उन्हाेंने कहा कि स्नातक के बाद यूपीएससी परीक्षा में बैठ सकते हैं, स्ट्रीम कोई भी हो। उन्होंने विद्यार्थियों से परीक्षा का दबाव को लेकर सवाल पूछा, उसके बाद विद्यार्थियों ने ही उसके जवाब भी दिए। सभागार में डीआईजी एक शिक्षक की तरह विद्यार्थियों के पास भी गए और उनके सवालों के जवाब भी दिए।
क्या करें
- पासवर्ड बनाने से पहले ध्यान रखें कि वो यूनिक और कठिन हो। हर ऑनलाइन अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखें।
- पासवर्ड में अपर केस, लोअर केस, नंबर और विशेष अक्षर रखें।
- कम से कम 45 दिन में अपना पासवर्ड जरूर बदल लें।
- सोशल मीडिया साइट्स के लिए सेकेंडरी ई-मेल एड्रेस बनाकर रखें।
- अगर कोई अकाउंट आप इस्तेमाल नहीं करते हैं तो उसे डिलीट कर दें।
- हमेशा प्रमाणिक व लाइसेंस वाले साफ्टवेयर का ही प्रयोग करें।
- ऑनलाइन बैंकिंग में ध्यान रखें कि आपने यूआरएल को मैन्युअली टाइप किया हो।
- अज्ञात ई-मेल में आए किसी भी अटैचमेंट को डाउनलोड करने से बचें।
- एप ऑफिशियल स्टोर गूगल प्ले स्टोर व एप्पल के फेयर एप स्टोर से लें।
- पासवर्ड सांझा न करें,इसमें सुरक्षा मानकों के अनुसार अंकों और अक्षरों का चयन करें।
- मुफ्त उपहार/ प्रस्ताव/संदेश /मेलों पर विश्वास न करें।

क्या न करें
- अपनी किसी भी जानकारी को पब्लिक प्लेटफॉर्म जैसे कि सोशल मीडिया पर शेयर न करें।
- ब्राउजर में सोशल मीडिया या अकाउंट में लॉग इन करते वक्त लॉग इन या रिमाइंडर मी को चेक न करें।
- सोशल मीडिया साइट्स के लिए ऑफिशियल ई-मेल का इस्तेमाल न करें।
- अपनी जन्मतिथि, नाम, मोबाइल नंबर आदि का इस्तेमाल कभी पासवर्ड में न करें।
- एक ही पासवर्ड का प्रयोग विभिन्न सेवाओं, वेबसाइट और एप में न करें।
- किसी भी पॉपअप विज्ञापन पर गौर न करें।
- किसी भी असुरक्षित और फेक वेबसाइट पर जाने से बचें।
- ऑनलाइन अकाउंट्स को हमेशा लॉग आउट करें।
- ईमेल अटैचमेंट के जरिए किसी साफ्टवेयर को डाउनलोड न करें।
- क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड की जानकारी वेब ब्राउजर में जमा न करें।
- निजी और बैंकिंग ब्योरा फोन या ई-मेल या एसएमएस से शेयर न करें।
- किसी भी प्रकार की ओटीपी भूलकर किसी के साथ शेयर न करें।
- अपनी व्यक्तिगत/ निजी तस्वीरें सार्वजनिक रूप से साझा न करें।
- शर्म, शर्मिंदगी और आत्म-दोष के कारण शिकायत दर्ज में संकोच न करें।
- साइबर धोखाधड़ी होने पर साबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
