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यूपी बोर्ड परीक्षा के चलते बेसिक शिक्षा विभाग की योजनाएं प्रभावित
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
यूपी बोर्ड परीक्षा सकुशल संपन्न कराने के लिए जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 2500 शिक्षकों को कक्ष निरीक्षक के रूप में तैनात किया गया है। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित होने लगीं हैं। बीएसए ने इस संबंध में बताया कि कहीं-कहीं आंशिक रूप से योजनाएं प्रभावित हुई हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि बोर्ड परीक्षा इन योजनाओं में बाधा नहीं बने।
बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी व उच्च प्राइमरी पाठशालाओं में सबसे पहले ग्रेडेड लर्निंग (शिक्षा कायाकल्प) योजना संचालित कराई गई। इसका प्रशिक्षण सभी बीईओ, एनपीआरसी, शिक्षकों को दिया जा चुका है। स्कूलों में अगर किसी विशेष विषय में अगर कोई छात्र कमजोर है, तो ग्रेडेड लर्निंग के माध्यम से उसका चिह्नांकन किया जाता है। इसके बाद कमजोरी वाले विषय के छात्रों का अलग से ग्रुप बनाया जाता है।
इन छात्रों पर विशेष ध्यान रखकर एक महीने बाद संबंधित विषय का टेस्ट लेकर ग्रेड तैयार कर ली जाती है। जिससे पता चल जाता है कि विशेष पढ़ाई ने बच्चे के मानसिक स्तर में क्या बढ़ोतरी की है। ऐसी ही एक योजना है शारदा-हर दिन स्कूल आएं। इस योजना के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा से वंचित बच्चों को ढूंढा जाएगा और लर्निंग आउटकम योजना के तहत इनका नामांकन कराया जाएगा।
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इन सभी योजनाओं को शिक्षक ही संचालित कराते हैं, लेकिन 2500 से अधिक शिक्षक बोर्ड परीक्षा में लगे हुए हैं। इस संबंध में बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि आंशिक रूप से प्रभाव पड़ा है। डीआईओएस डॉ. धर्मंद्र शर्मा से वार्ता कर शिक्षकों की ड्यूटी प्लान करवाई गई है। सभी बीईओ के माध्यम से हम प्रयास कर रहे हैं कि योजनाओं में बोर्ड परीक्षा बाधा नहीं बनेगी।
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यूपी बोर्ड परीक्षा सकुशल संपन्न कराने के लिए जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 2500 शिक्षकों को कक्ष निरीक्षक के रूप में तैनात किया गया है। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित होने लगीं हैं। बीएसए ने इस संबंध में बताया कि कहीं-कहीं आंशिक रूप से योजनाएं प्रभावित हुई हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि बोर्ड परीक्षा इन योजनाओं में बाधा नहीं बने।
बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी व उच्च प्राइमरी पाठशालाओं में सबसे पहले ग्रेडेड लर्निंग (शिक्षा कायाकल्प) योजना संचालित कराई गई। इसका प्रशिक्षण सभी बीईओ, एनपीआरसी, शिक्षकों को दिया जा चुका है। स्कूलों में अगर किसी विशेष विषय में अगर कोई छात्र कमजोर है, तो ग्रेडेड लर्निंग के माध्यम से उसका चिह्नांकन किया जाता है। इसके बाद कमजोरी वाले विषय के छात्रों का अलग से ग्रुप बनाया जाता है।
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इन छात्रों पर विशेष ध्यान रखकर एक महीने बाद संबंधित विषय का टेस्ट लेकर ग्रेड तैयार कर ली जाती है। जिससे पता चल जाता है कि विशेष पढ़ाई ने बच्चे के मानसिक स्तर में क्या बढ़ोतरी की है। ऐसी ही एक योजना है शारदा-हर दिन स्कूल आएं। इस योजना के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा से वंचित बच्चों को ढूंढा जाएगा और लर्निंग आउटकम योजना के तहत इनका नामांकन कराया जाएगा।
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इन सभी योजनाओं को शिक्षक ही संचालित कराते हैं, लेकिन 2500 से अधिक शिक्षक बोर्ड परीक्षा में लगे हुए हैं। इस संबंध में बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि आंशिक रूप से प्रभाव पड़ा है। डीआईओएस डॉ. धर्मंद्र शर्मा से वार्ता कर शिक्षकों की ड्यूटी प्लान करवाई गई है। सभी बीईओ के माध्यम से हम प्रयास कर रहे हैं कि योजनाओं में बोर्ड परीक्षा बाधा नहीं बनेगी।