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नुमाइश में एक शाम राष्ट्र के नाम का आयोजन
Updated Fri, 26 Jan 2018 02:36 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में गुरुवार की रात कृष्णांजलि मंच पर एक शाम राष्ट्र के नाम शीर्षक से कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें कवियों ने राष्ट्रवाद से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर सुनने वालों को ओज से भर दिया। साथ ही राष्ट्र के समक्ष खड़े खतरों से भी आगाह कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला जज कल्पना मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस मौके पर सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। प्रसिद्ध हास्य कवि प्रेम किशोर पटाखा ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘बम लहरी’ सुना कर सुनने वालों को वाह-वाह करने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम संयोजक वेद प्रकाश मणि की पंक्तियां ‘भोर की पहली किरणें वंदे मातरम, जल अर्पण देकर वंदे मातरम, भारत इस माटी का हर कण वंदे मातरम’ बहुत सराही गईं। राजस्थान के धौलपुर से आए कवि लालबत्ती मैनपुरी ने कहा कि ‘हमें तो चाहिए सिर्फ वफादारी की दो टूक रोटी, चाहे देश की खातिर मेरी मिट जाए बोटी बोटी’ सुनकर सुनने वालों को ओज से भर दिया।
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कार्यक्रम में इसके अलावा कासगंज से निर्मल सक्सेना, सिकंदराराऊ से देवेंद्र दीक्षित शूल, मैनपुरी से मनोज चौहान, इगलास से विजय प्रकाश भारद्वाज, खैर से भुवनेश चिंतन आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नृपेंद्र कुलश्रेष्ठ की पुस्तक ‘नया सवेरा’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में सहयोग करने वालों में चित्रकार शिवाशीष शर्मा, रत्नाकर आर्य, रविकर आर्य, तहसीलदार कोल जय प्रकाश आदि शामिल रहे।
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राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में गुरुवार की रात कृष्णांजलि मंच पर एक शाम राष्ट्र के नाम शीर्षक से कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें कवियों ने राष्ट्रवाद से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर सुनने वालों को ओज से भर दिया। साथ ही राष्ट्र के समक्ष खड़े खतरों से भी आगाह कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला जज कल्पना मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस मौके पर सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। प्रसिद्ध हास्य कवि प्रेम किशोर पटाखा ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘बम लहरी’ सुना कर सुनने वालों को वाह-वाह करने पर मजबूर कर दिया।
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कार्यक्रम संयोजक वेद प्रकाश मणि की पंक्तियां ‘भोर की पहली किरणें वंदे मातरम, जल अर्पण देकर वंदे मातरम, भारत इस माटी का हर कण वंदे मातरम’ बहुत सराही गईं। राजस्थान के धौलपुर से आए कवि लालबत्ती मैनपुरी ने कहा कि ‘हमें तो चाहिए सिर्फ वफादारी की दो टूक रोटी, चाहे देश की खातिर मेरी मिट जाए बोटी बोटी’ सुनकर सुनने वालों को ओज से भर दिया।
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कार्यक्रम में इसके अलावा कासगंज से निर्मल सक्सेना, सिकंदराराऊ से देवेंद्र दीक्षित शूल, मैनपुरी से मनोज चौहान, इगलास से विजय प्रकाश भारद्वाज, खैर से भुवनेश चिंतन आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नृपेंद्र कुलश्रेष्ठ की पुस्तक ‘नया सवेरा’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में सहयोग करने वालों में चित्रकार शिवाशीष शर्मा, रत्नाकर आर्य, रविकर आर्य, तहसीलदार कोल जय प्रकाश आदि शामिल रहे।