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नगर निगम की सीमा में आए डेढ़ लाख वोटर नहीं चुन सकेंगे मेयर
Updated Sat, 14 Oct 2017 01:59 AM IST
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नगर निगम की सीमा में आए डेढ़ लाख वोटर नहीं चुन सकेंगे मेयर
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
नवंबर में संभावित निकाय चुनाव मई 2017 में जारी परिसीमन के आधार पर ही होगा। इससे हाल ही में हुए नए परिसीमन के बाद नगर निगम की सीमा में शामिल हुए 19 ग्राम पंचायतों एवं नवविकसित कालोनियों के करीब डेढ़ लाख वोटरों को निकाय चुनावों में मेयर एवं पार्षद चुनने के लिए पांच साल इंतजार करना होगा।
नगर विकास विभाग द्वारा नगर निगम एवं नगर निकायों में अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित करते ही निकाय चुनाव का डंका बज चुका है। हालांकि अभी इसकी तिथियों की घोषणा बाकी है। बावजूद इसके प्रशासनिक एवं राजनैतिक स्तर पर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
18 अक्तूबर को मतदाताओं की अंतिम सूची का प्रकाशन होना है। लेकिन इन चुनावों में पहली बार नगर निगम की मेयर एवं पार्षदों को चुनने का सपना पाले हाल ही में नगर निगम के सीमा विस्तार के बाद शामिल हुए 19 ग्राम पंचायत एवं 22 गांवों के वोटरों और बाहरी कालोनियों के करीब डेढ़ लाख वोटरों का यह सपना अब पांच साल बाद ही पूरा हो सकेगा।
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दरअसल यह चुनाव मई 2017 में जारी परिसीमन के आधार पर हो रहा है। इसमें हाल ही में संपन्न परिसीमन के बाद शामिल हुए वोटरों को मतदाता सूची में स्थान नहीं मिला है।
बताते चलें कि यदि नए परिसीमन से मतदाता सूची बनती तो नगर निगम के 80 वार्ड होते और मतदाताओं की संख्या होती करीब 7.60 लाख। लेकिन पुराने परिसीमन के आधार पर हो रहे मेयर एवं पार्षदों के चुनाव में पिछली बार की तरह 70 वार्ड और 6.10 लाख वोटर होंगे। सहायक निर्वाचन अधिकारी पंचायत कौशल कुमार ने स्वीकार किया कि चुनाव मई 2017 में हुए नोटिफिकेशन के आधार पर ही कराने के निर्देश मिले हैं।
डीएम ने 16 को बुलाई बैठक
नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन 2017 को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए डीएम की अध्यक्षता में निर्वाचन संबंधी व्यवस्थाओं की बैठक 16 अक्तूबर को शाम चार बजे से कलक्ट्रेट सभागार में होगी। यह जानकारी एडीएम वित्त बच्चू सिंह ने दी।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
नवंबर में संभावित निकाय चुनाव मई 2017 में जारी परिसीमन के आधार पर ही होगा। इससे हाल ही में हुए नए परिसीमन के बाद नगर निगम की सीमा में शामिल हुए 19 ग्राम पंचायतों एवं नवविकसित कालोनियों के करीब डेढ़ लाख वोटरों को निकाय चुनावों में मेयर एवं पार्षद चुनने के लिए पांच साल इंतजार करना होगा।
नगर विकास विभाग द्वारा नगर निगम एवं नगर निकायों में अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित करते ही निकाय चुनाव का डंका बज चुका है। हालांकि अभी इसकी तिथियों की घोषणा बाकी है। बावजूद इसके प्रशासनिक एवं राजनैतिक स्तर पर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
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18 अक्तूबर को मतदाताओं की अंतिम सूची का प्रकाशन होना है। लेकिन इन चुनावों में पहली बार नगर निगम की मेयर एवं पार्षदों को चुनने का सपना पाले हाल ही में नगर निगम के सीमा विस्तार के बाद शामिल हुए 19 ग्राम पंचायत एवं 22 गांवों के वोटरों और बाहरी कालोनियों के करीब डेढ़ लाख वोटरों का यह सपना अब पांच साल बाद ही पूरा हो सकेगा।
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दरअसल यह चुनाव मई 2017 में जारी परिसीमन के आधार पर हो रहा है। इसमें हाल ही में संपन्न परिसीमन के बाद शामिल हुए वोटरों को मतदाता सूची में स्थान नहीं मिला है।
बताते चलें कि यदि नए परिसीमन से मतदाता सूची बनती तो नगर निगम के 80 वार्ड होते और मतदाताओं की संख्या होती करीब 7.60 लाख। लेकिन पुराने परिसीमन के आधार पर हो रहे मेयर एवं पार्षदों के चुनाव में पिछली बार की तरह 70 वार्ड और 6.10 लाख वोटर होंगे। सहायक निर्वाचन अधिकारी पंचायत कौशल कुमार ने स्वीकार किया कि चुनाव मई 2017 में हुए नोटिफिकेशन के आधार पर ही कराने के निर्देश मिले हैं।
डीएम ने 16 को बुलाई बैठक
नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन 2017 को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए डीएम की अध्यक्षता में निर्वाचन संबंधी व्यवस्थाओं की बैठक 16 अक्तूबर को शाम चार बजे से कलक्ट्रेट सभागार में होगी। यह जानकारी एडीएम वित्त बच्चू सिंह ने दी।