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मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव ऊर्जा किए तलब, जांच को आए सयुक्त निदेशक
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न्यूज डेस्क, आशीष श्रीवास्तव, अलीगढ़।
पीएम मोदी के नुमाइश मैदान के मंच पर पीएम व सीएम की मौजूदगी में शार्ट सर्किट से स्पार्क मामले की गूंज लखनऊ और दिल्ली तक पहुंच गई है। एक तरफ जहां इस मामले में खुद मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को तलब कर लिया है। वहीं इस मामले में रविवार देर रात विद्युत सुरक्षा परिषद के संयुक्त निदेशक वीपी श्रीवास्तव अलीगढ़ पहुंच गए थे, जिन्होंने सोमवार को घटनास्थल पर पहुंचकर जांच पड़ताल की और सुरक्षा परिषद के स्थानीय अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए।
इस दौरान पावर कारपोरेशन के अधिकारियों ने जांच में सहयोग नहीं किया और बयान देने भी नहीं आए। इसे लेकर संयुक्त निदेशक ने नाराजगी जताई है। वह अपनी रिपोर्ट लखनऊ ले गए हैं, जिसे सोमवार को प्रमुख सचिव ऊर्जा के समक्ष पेश करेंगे। वहां से जिम्मेदारी व कार्रवाई तय होगी।
इधर, इस मामले में प्रशासन ने भी अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जिसमें प्रथम दृष्टया उप निदेशक व सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा को दोषी ठहराया है। दोनों अफसर इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके।
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उन्होंने जांच अधिकारी से मंगलवार तक का समय मांगा है। वहीं मंच, बिजली से लेकर पीएमओ तक तैयार करने वाले कानपुर के ठेकेदार को भी दोषी ठहराया गया है। उसे ब्लैक लिस्ट कर जेल भेजने की तैयारी है। अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि उसके पास लाइसेंस तक नहीं था।
इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को तलब करते हुए उनसे सुरक्षा में हुई चूक मामले में रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन ने भी मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को भेजी है। प्रमुख सचिव ऊर्जा के निर्देश पर यहां जांच को आए संयुक्त निदेशक वीपी श्रीवास्तव घटनास्थल पर पहुंचे।
इस दौरान उनके साथ स्थानीय डिप्टी डायरेक्टर संजय माथुर भी मौजूद रहे। यहां उन्होंने बारीकी से जांच के साथ एनओसी देने वाले दोनों अधिकारियों के बयान दर्ज किए। हालांकि वह कुछ देरी से पहुंचे। इस दौरान पावर कारपोरेशन अधिकारियों के स्तर से सहयोग नहीं मिलने पर संयुक्त निदेशक नाराज दिखे।
जांच में पाया गया कि ठेकेदार ने जेनरेटर से पावर सप्लाई दे रखी थी। मगर उसके पास लाइसेंस नहीं था। इस विषय में डिप्टी डायरेक्टर संजय माथुर ने इतना ही बताया कि मामले में प्रमुख सचिव ऊर्जा के स्तर से कार्रवाई व जवाबदेही तय होगी।
- शासन को भेजी रिपोर्ट में विद्युत व्यवस्था मामले में संयुक्त रिपोर्ट देने वाले उप निदेशक विद्युत सुरक्षा संजय माथुर व सहायक निदेशक उदयभान यादव को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया गया है। मंच व्यवस्था से लेकर पीएमओ तक का इंतजाम करने वाले कानपुर के ठेकेदार संजीव चौहान की फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के आदेश आए हैं। उसके पंजीकरण की जांच करायी जा रही है।
-चंद्रभूषण सिंह, डीएम
आरोपी नंबर-1:-उप निदेशक विद्युत सुरक्षा संजय माथुर
-पीएम की रैली के लाइट व साउंड सिस्टम की बारीकी से चेकिंग का जिम्मा था। लाइटिंग व साउंड के विद्युत तार, उनके ज्वाइंट, तारों की मजबूती, समूचे सिस्टम को विद्युत सुरक्षा के मानकों की कसौटी पर कसना और उसके बाद ही एनओसी जारी करना।
आरोपी नंबर-2:- सहायक निदेशक उदयभान यादव
- सतही चेकिंग के बाद दोनों अफसरों ने संयुक्त हस्ताक्षरों से एनओसी जारी कर दी। बावजूद इसके पीएम जैसे हाई प्रोफाइल कार्यक्रम में कमजोर तार का इस्तेमाल किया, तारों के ज्वाइंट पर कनेक्टर व डीपी तक नहीं लगाई गई। मिनी पीएमओ में एसी तक नहीं लगा तो मुख्यमंत्री के केबिन का एसी इतनी घटिया क्वालिटी का था कि ठंडक तक नहीं कर रहा था।
आरोपी नंबर-3:-ठेकेदार कानपुर का संजीव चौहान
-मंच, गैलरी, टेंट, कुर्सी, मिनी पीएमओ, सीएम केबिन, साउंड, लाइट समेत अन्य कामों के संपादन की जिम्मेदारी। कमजोर तारों का प्रयोग, पैसे बचाने के लिए तारों के ज्वाइंट पर कनेक्टर, डीपी आदि तक नहीं लगवायी। साउंड सिस्टम इतना घटिया था कि पीएम के भाषण की शुरुआत में ही साउंड सिस्टम बोल गया।
आरोपी नंबर-4:-प्रभारी मजिस्ट्रेट एडीएम वित्त एवं राजस्व उदय सिंह
-जनसभा मंच से लेकर प्रधानमंत्री एवं अन्य वीआईपी की सुरक्षा से लेकर उनके लिए किए गए समूचे इंतजामों का सुपरविजन करना।
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आरोपी नंबर 5:-मजिस्ट्रेट एसडीएम कोल रंजीत सिंह
- नुमाइश मैदान पर बने जनसभा मंच एवं मंच के दांये एवं बांयी और पीछे की ओर के क्षेत्र में उपस्थित रहकर सुरक्षा, कानून व शांति व्यवस्था सुनिश्चित करना। मंच पर अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति देना।
- प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में विद्युत व्यवस्था समेत अन्य इंतजामों में लापरवाही के दोषी माने जा रहे उप निदेशक विद्युत सुरक्षा संजय माथुर व सहायक निदेशक उदयभान यादव ने अपना स्पष्टीकरण देने के लिए मंगलवार तक का समय मांगा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व व एसडीएम कोल ने अपनी-अपनी रिपोर्ट दे दी हैं। मंगलवार को दोनों अफसरों के स्पष्टीकरण के बाद फाइनल रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी।
कृष्ण लाल तिवारी, एडीएम प्रशासन व जांच अधिकारी
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पीएम मोदी के नुमाइश मैदान के मंच पर पीएम व सीएम की मौजूदगी में शार्ट सर्किट से स्पार्क मामले की गूंज लखनऊ और दिल्ली तक पहुंच गई है। एक तरफ जहां इस मामले में खुद मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को तलब कर लिया है। वहीं इस मामले में रविवार देर रात विद्युत सुरक्षा परिषद के संयुक्त निदेशक वीपी श्रीवास्तव अलीगढ़ पहुंच गए थे, जिन्होंने सोमवार को घटनास्थल पर पहुंचकर जांच पड़ताल की और सुरक्षा परिषद के स्थानीय अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए।
इस दौरान पावर कारपोरेशन के अधिकारियों ने जांच में सहयोग नहीं किया और बयान देने भी नहीं आए। इसे लेकर संयुक्त निदेशक ने नाराजगी जताई है। वह अपनी रिपोर्ट लखनऊ ले गए हैं, जिसे सोमवार को प्रमुख सचिव ऊर्जा के समक्ष पेश करेंगे। वहां से जिम्मेदारी व कार्रवाई तय होगी।
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इधर, इस मामले में प्रशासन ने भी अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जिसमें प्रथम दृष्टया उप निदेशक व सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा को दोषी ठहराया है। दोनों अफसर इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके।
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उन्होंने जांच अधिकारी से मंगलवार तक का समय मांगा है। वहीं मंच, बिजली से लेकर पीएमओ तक तैयार करने वाले कानपुर के ठेकेदार को भी दोषी ठहराया गया है। उसे ब्लैक लिस्ट कर जेल भेजने की तैयारी है। अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि उसके पास लाइसेंस तक नहीं था।
इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को तलब करते हुए उनसे सुरक्षा में हुई चूक मामले में रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन ने भी मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को भेजी है। प्रमुख सचिव ऊर्जा के निर्देश पर यहां जांच को आए संयुक्त निदेशक वीपी श्रीवास्तव घटनास्थल पर पहुंचे।
इस दौरान उनके साथ स्थानीय डिप्टी डायरेक्टर संजय माथुर भी मौजूद रहे। यहां उन्होंने बारीकी से जांच के साथ एनओसी देने वाले दोनों अधिकारियों के बयान दर्ज किए। हालांकि वह कुछ देरी से पहुंचे। इस दौरान पावर कारपोरेशन अधिकारियों के स्तर से सहयोग नहीं मिलने पर संयुक्त निदेशक नाराज दिखे।
जांच में पाया गया कि ठेकेदार ने जेनरेटर से पावर सप्लाई दे रखी थी। मगर उसके पास लाइसेंस नहीं था। इस विषय में डिप्टी डायरेक्टर संजय माथुर ने इतना ही बताया कि मामले में प्रमुख सचिव ऊर्जा के स्तर से कार्रवाई व जवाबदेही तय होगी।
- शासन को भेजी रिपोर्ट में विद्युत व्यवस्था मामले में संयुक्त रिपोर्ट देने वाले उप निदेशक विद्युत सुरक्षा संजय माथुर व सहायक निदेशक उदयभान यादव को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया गया है। मंच व्यवस्था से लेकर पीएमओ तक का इंतजाम करने वाले कानपुर के ठेकेदार संजीव चौहान की फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के आदेश आए हैं। उसके पंजीकरण की जांच करायी जा रही है।
-चंद्रभूषण सिंह, डीएम
आरोपी नंबर-1:-उप निदेशक विद्युत सुरक्षा संजय माथुर
-पीएम की रैली के लाइट व साउंड सिस्टम की बारीकी से चेकिंग का जिम्मा था। लाइटिंग व साउंड के विद्युत तार, उनके ज्वाइंट, तारों की मजबूती, समूचे सिस्टम को विद्युत सुरक्षा के मानकों की कसौटी पर कसना और उसके बाद ही एनओसी जारी करना।
आरोपी नंबर-2:- सहायक निदेशक उदयभान यादव
- सतही चेकिंग के बाद दोनों अफसरों ने संयुक्त हस्ताक्षरों से एनओसी जारी कर दी। बावजूद इसके पीएम जैसे हाई प्रोफाइल कार्यक्रम में कमजोर तार का इस्तेमाल किया, तारों के ज्वाइंट पर कनेक्टर व डीपी तक नहीं लगाई गई। मिनी पीएमओ में एसी तक नहीं लगा तो मुख्यमंत्री के केबिन का एसी इतनी घटिया क्वालिटी का था कि ठंडक तक नहीं कर रहा था।
आरोपी नंबर-3:-ठेकेदार कानपुर का संजीव चौहान
-मंच, गैलरी, टेंट, कुर्सी, मिनी पीएमओ, सीएम केबिन, साउंड, लाइट समेत अन्य कामों के संपादन की जिम्मेदारी। कमजोर तारों का प्रयोग, पैसे बचाने के लिए तारों के ज्वाइंट पर कनेक्टर, डीपी आदि तक नहीं लगवायी। साउंड सिस्टम इतना घटिया था कि पीएम के भाषण की शुरुआत में ही साउंड सिस्टम बोल गया।
आरोपी नंबर-4:-प्रभारी मजिस्ट्रेट एडीएम वित्त एवं राजस्व उदय सिंह
-जनसभा मंच से लेकर प्रधानमंत्री एवं अन्य वीआईपी की सुरक्षा से लेकर उनके लिए किए गए समूचे इंतजामों का सुपरविजन करना।
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आरोपी नंबर 5:-मजिस्ट्रेट एसडीएम कोल रंजीत सिंह
- नुमाइश मैदान पर बने जनसभा मंच एवं मंच के दांये एवं बांयी और पीछे की ओर के क्षेत्र में उपस्थित रहकर सुरक्षा, कानून व शांति व्यवस्था सुनिश्चित करना। मंच पर अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति देना।
- प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में विद्युत व्यवस्था समेत अन्य इंतजामों में लापरवाही के दोषी माने जा रहे उप निदेशक विद्युत सुरक्षा संजय माथुर व सहायक निदेशक उदयभान यादव ने अपना स्पष्टीकरण देने के लिए मंगलवार तक का समय मांगा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व व एसडीएम कोल ने अपनी-अपनी रिपोर्ट दे दी हैं। मंगलवार को दोनों अफसरों के स्पष्टीकरण के बाद फाइनल रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी।
कृष्ण लाल तिवारी, एडीएम प्रशासन व जांच अधिकारी