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नाला सफाई का काम कछुआ गति से, होगा जलभराव
Updated Tue, 12 Jun 2018 01:41 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जून महीने के आधा गुजर जाने के बाद भी अभी नाला सफाई का काम आधा भी नहीं हुआ है। कुछ दिन बाद मानसून का आगमन होगा। इससे एक बार फिर से बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति हो सकती है। इसके अलावा नाला सफाई के काम में सकर मशीन और पोकलैंड मशीन के इस्तेमाल न होने को लेकर नगर निगम कार्यकारिणी के पूर्व उप सभापति ने सवाल उठाए हैं।
नगर निगम में करीब 25 वर्ष सभासद रहे कार्यकारिणी के पूर्व उप सभापति कुलदीप पांडेय कहते हैं कि जून तक नाला सफाई का काम पूरी तरह समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी देखा जा रहा है कि शहर में 30 फीसदी भी नाले साफ नहीं हुए हैं।
जो हुए हैं उनमें नालों को बीच-बीच में से सिल्ट निकाल दी गई है। नालों की पूरी सफाई नहीं हुई है। अशोक नगर नाले की पुलिया, सराय लबरिया नाला, घुड़िया बाग नाला, देहली गेट नाला, चरखवालान, खैर रोड पर नालों की स्थिति साफ देखी जा सकती है।
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इस हालत के चलते शहर में सामान्य बारिश में भी जलभराव होना तो तय है। कुलदीप पांडेय कहते हैं कि शहर में सकर मशीन, पोकलैंड मशीन के इस्तेमाल को भी नहीं देखा गया है। यह मशीनें कहां चल रही हैं इसका किसी को नहीं पता। खाना पूरी करने के लिए चलाते हुए दिखाने के लिए फोटो करवा लिए जाते हैं।
इसके अलावा सड़कों से धूल साफ करने की स्वीपिंग मशीन घंटा घर से यूनिवर्सिटी को जाने वाले रोड को छोड़कर अन्य सड़कों पर महीने में एक दिन सड़क पर चलती है बाकी के 29 दिन कागजों पर चलती है। अगर स्वीपिंग मशीन प्रतिदिन चले तो सड़कों और डिवाइडरों के कानों पर धूल का एक कण भी देखने को नहीं मिलेगा।
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जून महीने के आधा गुजर जाने के बाद भी अभी नाला सफाई का काम आधा भी नहीं हुआ है। कुछ दिन बाद मानसून का आगमन होगा। इससे एक बार फिर से बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति हो सकती है। इसके अलावा नाला सफाई के काम में सकर मशीन और पोकलैंड मशीन के इस्तेमाल न होने को लेकर नगर निगम कार्यकारिणी के पूर्व उप सभापति ने सवाल उठाए हैं।
नगर निगम में करीब 25 वर्ष सभासद रहे कार्यकारिणी के पूर्व उप सभापति कुलदीप पांडेय कहते हैं कि जून तक नाला सफाई का काम पूरी तरह समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी देखा जा रहा है कि शहर में 30 फीसदी भी नाले साफ नहीं हुए हैं।
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जो हुए हैं उनमें नालों को बीच-बीच में से सिल्ट निकाल दी गई है। नालों की पूरी सफाई नहीं हुई है। अशोक नगर नाले की पुलिया, सराय लबरिया नाला, घुड़िया बाग नाला, देहली गेट नाला, चरखवालान, खैर रोड पर नालों की स्थिति साफ देखी जा सकती है।
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इस हालत के चलते शहर में सामान्य बारिश में भी जलभराव होना तो तय है। कुलदीप पांडेय कहते हैं कि शहर में सकर मशीन, पोकलैंड मशीन के इस्तेमाल को भी नहीं देखा गया है। यह मशीनें कहां चल रही हैं इसका किसी को नहीं पता। खाना पूरी करने के लिए चलाते हुए दिखाने के लिए फोटो करवा लिए जाते हैं।
इसके अलावा सड़कों से धूल साफ करने की स्वीपिंग मशीन घंटा घर से यूनिवर्सिटी को जाने वाले रोड को छोड़कर अन्य सड़कों पर महीने में एक दिन सड़क पर चलती है बाकी के 29 दिन कागजों पर चलती है। अगर स्वीपिंग मशीन प्रतिदिन चले तो सड़कों और डिवाइडरों के कानों पर धूल का एक कण भी देखने को नहीं मिलेगा।