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Aligarh News: अलीगढ़ में 43 महिलाओं को मिलेगी ड्रोन दीदी बनने की उड़ान, चयन की तैयारी
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स्रोत स्वयं फोटो
नीरज और सीमा बनीं मिसाल, ड्रोन से खेतों में छिड़काव कर कमा रहीं हजारों रुपये से लेकर लाखों तक
अलीगढ़। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की नमो ड्रोन दीदी योजना से अलीगढ़ में रोजगार और तकनीक के नए रास्ते खुल रहे हैं। जिले में अब तक दो महिलाएं ड्रोन दीदी बनकर किसानों के खेतों में कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं। उनकी सफलता को देखते हुए अब जिले में 43 और महिलाओं के चयन की तैयारी है। इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक तकनीक सीखने और रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित इस योजना में महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर कृषि सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना भी है। अलीगढ़ में धनीपुर और टप्पल विकासखंड की दो महिलाएं इस दिशा में मिसाल बनकर उभरी हैं।
174 हेक्टेयर में छिड़काव कर नीरज ने कमाए 69,600 रुपये
धनीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत आजमाबाद मछुआ निवासी नीरज देवी शिव शंकर स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने किसानों के खेतों में कीटनाशक का छिड़काव शुरू किया। अब तक वह 29 किसानों की करीब 174 हेक्टेयर भूमि में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं। इससे उन्हें लगभग 69,600 रुपये की आमदनी हुई है।
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295 हेक्टेयर में छिड़काव कर सीमा ने कमाए 1.18 लाख रुपये
टप्पल विकासखंड की ग्राम पंचायत मालव निवासी सीमा देवी सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। वह भी ड्रोन के जरिए किसानों के खेतों में कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं। अब तक सीमा देवी 29 किसानों के करीब 295 हेक्टेयर खेतों में छिड़काव कर चुकी हैं। इस काम से उन्होंने लगभग 1.18 लाख रुपये की आमदनी अर्जित की है।
दोनों महिलाएं मिलकर अब तक 469 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि दूसरी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। साथ ही किसानों को भी कम समय में बड़े क्षेत्र में छिड़काव की सुविधा मिल रही है।
अब 43 महिलाओं के चयन से बढ़ेगा योजना का दायरा
जिले में अब 43 महिलाओं का चयन किए जाने की तैयारी है। इससे अधिक महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर कृषि सेवाओं से जोड़ने का अवसर मिलेगा। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए यह पहल रोजगार का नया माध्यम बन सकती है। ड्रोन के इस्तेमाल से खेतों में दवा का छिड़काव कम समय में और अपेक्षाकृत समान रूप से किया जा सकता है, जिससे किसानों की मेहनत भी कम होती है।
तकनीक ने बढ़ाया आत्मविश्वास
नीरज और सीमा का कहना है कि प्रशिक्षण से पहले उन्हें भी ड्रोन संचालन को लेकर आशंकाएं थीं, लेकिन अब वे आत्मविश्वास के साथ यह काम कर रही हैं। इससे उन्हें आमदनी का साधन मिला है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है। उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
अलीगढ़ में 43 महिलाओं के चयन की प्रस्तावित पहल से नमो ड्रोन दीदी योजना को और विस्तार मिलने की उम्मीद है। इससे एक ओर किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक की पहुंच बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर मिल सकेंगे।
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अलीगढ़। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की नमो ड्रोन दीदी योजना से अलीगढ़ में रोजगार और तकनीक के नए रास्ते खुल रहे हैं। जिले में अब तक दो महिलाएं ड्रोन दीदी बनकर किसानों के खेतों में कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं। उनकी सफलता को देखते हुए अब जिले में 43 और महिलाओं के चयन की तैयारी है। इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक तकनीक सीखने और रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित इस योजना में महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर कृषि सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना भी है। अलीगढ़ में धनीपुर और टप्पल विकासखंड की दो महिलाएं इस दिशा में मिसाल बनकर उभरी हैं।
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174 हेक्टेयर में छिड़काव कर नीरज ने कमाए 69,600 रुपये
धनीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत आजमाबाद मछुआ निवासी नीरज देवी शिव शंकर स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने किसानों के खेतों में कीटनाशक का छिड़काव शुरू किया। अब तक वह 29 किसानों की करीब 174 हेक्टेयर भूमि में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं। इससे उन्हें लगभग 69,600 रुपये की आमदनी हुई है।
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295 हेक्टेयर में छिड़काव कर सीमा ने कमाए 1.18 लाख रुपये
टप्पल विकासखंड की ग्राम पंचायत मालव निवासी सीमा देवी सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। वह भी ड्रोन के जरिए किसानों के खेतों में कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं। अब तक सीमा देवी 29 किसानों के करीब 295 हेक्टेयर खेतों में छिड़काव कर चुकी हैं। इस काम से उन्होंने लगभग 1.18 लाख रुपये की आमदनी अर्जित की है।
दोनों महिलाएं मिलकर अब तक 469 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि दूसरी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। साथ ही किसानों को भी कम समय में बड़े क्षेत्र में छिड़काव की सुविधा मिल रही है।
अब 43 महिलाओं के चयन से बढ़ेगा योजना का दायरा
जिले में अब 43 महिलाओं का चयन किए जाने की तैयारी है। इससे अधिक महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर कृषि सेवाओं से जोड़ने का अवसर मिलेगा। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए यह पहल रोजगार का नया माध्यम बन सकती है। ड्रोन के इस्तेमाल से खेतों में दवा का छिड़काव कम समय में और अपेक्षाकृत समान रूप से किया जा सकता है, जिससे किसानों की मेहनत भी कम होती है।
तकनीक ने बढ़ाया आत्मविश्वास
नीरज और सीमा का कहना है कि प्रशिक्षण से पहले उन्हें भी ड्रोन संचालन को लेकर आशंकाएं थीं, लेकिन अब वे आत्मविश्वास के साथ यह काम कर रही हैं। इससे उन्हें आमदनी का साधन मिला है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है। उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
अलीगढ़ में 43 महिलाओं के चयन की प्रस्तावित पहल से नमो ड्रोन दीदी योजना को और विस्तार मिलने की उम्मीद है। इससे एक ओर किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक की पहुंच बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर मिल सकेंगे।