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बच्चों के लिए धीमा जहर हैं प्लास्टिक के लंच बाक्स
Updated Thu, 19 Jul 2018 02:04 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्कूल जाने वाले बच्चों को प्लास्टिक के टिफिन में दिया जा रहा लंच और ब्रेकफास्ट उनके लिए धीमा जहर साबित हो रहा है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के डाक्टर और जिला महिला अस्पताल की सीएमएस कहती हैं कि बच्चों को फंगल और दमे के प्रारंभिक लक्षणों के कई मामले सामने आए हैं। जिसके बाद डाक्टर अभिभावकों को सलाह दे रहे हैं कि बच्चों को प्लास्टिक के टिफिन में खाना देने से बचें।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के डा. ताजुद्दीन कहते हैं कि इन दिनों बच्चों में फंगल इंफेक्शन के मामले आ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह बच्चों का गर्म खाना प्लास्टिक के लंच बाक्स में रख देना होता है। गर्म खाना कई घंटों तक प्लास्टिक के संपर्क में रहता है जिससे केमिकल रिएक्शन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
बच्चों में अस्थमा का एक बड़ा कारण यही प्लास्टिक है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं कि यह प्लास्टिक के टिफिन कितना खतरनाक होंगे इस बात से अंदाजा लगाएं कि बाल झड़ने के 92 प्रतिशत मामलों में एक केमिकल जिसे बीपीए (बिसफेनोल) कहते हैं, जिम्मेदार होता है। यही केमिकल प्लास्टिक में पाया जाता है।
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‘प्लास्टिक का जो टेक्चर होता है वह गंध और रंग को सोखने वाला होता है। लंबे समय तक प्लास्टिक का कंटेनर खाद्य सामग्री के लिए इस्तेमाल करने से खाद्य सामग्री में प्लास्टिक के केमिकल के प्रभाव आ जाते हैं जो बच्चों के मौलिक विकास के लिए बेहद खतरनाक हैं। बच्चों में इसके दीर्घगामी प्रभाव मोटापा, त्वचा संबंधी समस्या, एसिडिटी के रूप में भी आ सकता है’
- डॉ. गीता प्रधान, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
क्या हो सकता है समाधान
- बच्चों को स्टील, कापर आदि धातु से बने लंच बाक्स दें
- ब्रांडेड कंपनी के ऐसे लंच बाक्स जिनका अंदर का हिस्सा स्टील का है, वह दें
- अगर प्लास्टिक का लंच बाक्स ही दे रहे हैं तो खाना सीधे सतह के संपर्क में न हो, फाइल पेपर में पैक कर दें
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स्कूल जाने वाले बच्चों को प्लास्टिक के टिफिन में दिया जा रहा लंच और ब्रेकफास्ट उनके लिए धीमा जहर साबित हो रहा है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के डाक्टर और जिला महिला अस्पताल की सीएमएस कहती हैं कि बच्चों को फंगल और दमे के प्रारंभिक लक्षणों के कई मामले सामने आए हैं। जिसके बाद डाक्टर अभिभावकों को सलाह दे रहे हैं कि बच्चों को प्लास्टिक के टिफिन में खाना देने से बचें।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के डा. ताजुद्दीन कहते हैं कि इन दिनों बच्चों में फंगल इंफेक्शन के मामले आ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह बच्चों का गर्म खाना प्लास्टिक के लंच बाक्स में रख देना होता है। गर्म खाना कई घंटों तक प्लास्टिक के संपर्क में रहता है जिससे केमिकल रिएक्शन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
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बच्चों में अस्थमा का एक बड़ा कारण यही प्लास्टिक है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं कि यह प्लास्टिक के टिफिन कितना खतरनाक होंगे इस बात से अंदाजा लगाएं कि बाल झड़ने के 92 प्रतिशत मामलों में एक केमिकल जिसे बीपीए (बिसफेनोल) कहते हैं, जिम्मेदार होता है। यही केमिकल प्लास्टिक में पाया जाता है।
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‘प्लास्टिक का जो टेक्चर होता है वह गंध और रंग को सोखने वाला होता है। लंबे समय तक प्लास्टिक का कंटेनर खाद्य सामग्री के लिए इस्तेमाल करने से खाद्य सामग्री में प्लास्टिक के केमिकल के प्रभाव आ जाते हैं जो बच्चों के मौलिक विकास के लिए बेहद खतरनाक हैं। बच्चों में इसके दीर्घगामी प्रभाव मोटापा, त्वचा संबंधी समस्या, एसिडिटी के रूप में भी आ सकता है’
- डॉ. गीता प्रधान, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
क्या हो सकता है समाधान
- बच्चों को स्टील, कापर आदि धातु से बने लंच बाक्स दें
- ब्रांडेड कंपनी के ऐसे लंच बाक्स जिनका अंदर का हिस्सा स्टील का है, वह दें
- अगर प्लास्टिक का लंच बाक्स ही दे रहे हैं तो खाना सीधे सतह के संपर्क में न हो, फाइल पेपर में पैक कर दें