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अमां मियां फजीहत दूजे को नसीहत
Updated Fri, 16 Feb 2018 02:17 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
कहा जाता है कि आपकी सीख में तभी नैतिक बल होता है जब आप स्वयं अमल करें। लेकिन यातायात नियमों का पालन कराने वाले पुलिस कर्मी स्वयं नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
कम से कम हेलमेट पहनने के मामले में तो ऐसा ही प्रतीत होता है। गुरुवार को अमर उजाला की टीम ने महानगर के विभिन्न इलाकों में पड़ताल की तो कई बाइक सवार पुलिसकर्मी बगैर हेलमेट घूमते नजर आए।
अमां मियां फजीहत दूजे को नसीहत कहावत चरित्रार्थ करते हुए एक बाइक पर सवार दो पुलिसकर्मियों के पास हेलमेट तो था, लेकिन इसे सिर पर पहनने के बजाय वह हाथ में पकड़े बैठे थे। इस दृश्य को देखकर हर कोई भौचक्का था।
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कुछ लोग तो यह कहते सुनाई दिए कि बताओ हेलमेट न हो तो अलग बात है। ये तो हेलमेट पहनने के बजाय हाथ में ही पकड़े बैठा है। दूसरों को नियम सिखाता है।
पुलिसकर्मी खुद हेलमेट नहीं पहनते। वह स्वयं भी तो पालन करें। इसके बाद दूसरों को हेलमेट पहनने की सीख दें। तभी लोग उनके अभियानों पर ध्यान देंगे और जागरूक होंगे। लोगों को सोचना होगा कि वे दूसरी बातों के बजाय अपनी खुद की सुरक्षा के लिए नियमित रूप से हेलमेट पहनने का संकल्प लें।
कुणाल शर्मा, जयगंज
दोपहिया वाहन पर सवारी करते समय हेलमेट सुरक्षा कवच के समान है। आंकड़े बताते हैं कि दुर्घटना की स्थिति में अधिकांश मौतें हेड इंजरी से होती हैं। हम अपनी जान जोखिम में क्यों डाले, हेलमेट पहनकर ही क्यों न चलेें। अमर उजाला इस मामले में सार्थक प्रयास कर रहा है। इसकी जितनी सराहना की जाय कम है। हम सभी नागरिक इस अभियान में साथ हैं।
हेमंत गर्ग, व्यापारी, रघुवीर पुरी
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कहा जाता है कि आपकी सीख में तभी नैतिक बल होता है जब आप स्वयं अमल करें। लेकिन यातायात नियमों का पालन कराने वाले पुलिस कर्मी स्वयं नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
कम से कम हेलमेट पहनने के मामले में तो ऐसा ही प्रतीत होता है। गुरुवार को अमर उजाला की टीम ने महानगर के विभिन्न इलाकों में पड़ताल की तो कई बाइक सवार पुलिसकर्मी बगैर हेलमेट घूमते नजर आए।
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अमां मियां फजीहत दूजे को नसीहत कहावत चरित्रार्थ करते हुए एक बाइक पर सवार दो पुलिसकर्मियों के पास हेलमेट तो था, लेकिन इसे सिर पर पहनने के बजाय वह हाथ में पकड़े बैठे थे। इस दृश्य को देखकर हर कोई भौचक्का था।
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कुछ लोग तो यह कहते सुनाई दिए कि बताओ हेलमेट न हो तो अलग बात है। ये तो हेलमेट पहनने के बजाय हाथ में ही पकड़े बैठा है। दूसरों को नियम सिखाता है।
पुलिसकर्मी खुद हेलमेट नहीं पहनते। वह स्वयं भी तो पालन करें। इसके बाद दूसरों को हेलमेट पहनने की सीख दें। तभी लोग उनके अभियानों पर ध्यान देंगे और जागरूक होंगे। लोगों को सोचना होगा कि वे दूसरी बातों के बजाय अपनी खुद की सुरक्षा के लिए नियमित रूप से हेलमेट पहनने का संकल्प लें।
कुणाल शर्मा, जयगंज
दोपहिया वाहन पर सवारी करते समय हेलमेट सुरक्षा कवच के समान है। आंकड़े बताते हैं कि दुर्घटना की स्थिति में अधिकांश मौतें हेड इंजरी से होती हैं। हम अपनी जान जोखिम में क्यों डाले, हेलमेट पहनकर ही क्यों न चलेें। अमर उजाला इस मामले में सार्थक प्रयास कर रहा है। इसकी जितनी सराहना की जाय कम है। हम सभी नागरिक इस अभियान में साथ हैं।
हेमंत गर्ग, व्यापारी, रघुवीर पुरी