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नौ वजहों से नहीं बढ़ा मतदान..
Updated Mon, 27 Nov 2017 01:50 AM IST
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नौ वजहों से नहीं बढ़ा मतदान..
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
नगर निगम चुनाव के मतदान में अपेक्षाकृत बढ़ोत्तरी नहीं होने के कई कारण रहे। पहला- ई-रिक्शा, टिर्री, छोटा हाथी और रिक्शा सहित अन्य छोटे वाहनों की आवाजाही पर रोक। जिससे दूर दूर बने पोलिंग स्टेशनों तक आम आदमी नहीं पहुंच सका। प्रशासन ने एहतियातन सुरक्षा की दृष्टि से इन वाहनों पर प्रतिबंध लगाया था, ताकि वोटराें को ढोने की परंपरा रोकी जाए।
दूसरा-पोलिंग स्टेशनों के अंदर स्मार्ट मोबाइल फोन ले जाने को लेकर कहीं कहीं हुई मनाही। तीसरा-आम लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि पोलिंग स्टेशनों के आसपास कार पार्किंग, दुपहिया पार्किंग की व्यवस्था है या नहीं? चौथा-मतदाता की आशंका कि उसका निजी वाहन पोलिंग स्टेशन तक पहुंचेंगे या नहीं? पांचवां परिसीमन, जिसकी वजह से दर्जनों मोहल्ले एक वार्ड से दूसरे वार्ड में चले गए। छठवां-हजारों मतदाता अपना पोलिंग स्टेशन, पोलिंग बूथ, वोटर पर्ची और वोटर लिस्ट के बारे में नहीं जान पाए। सातवां जो कुछ जागरूक मतदाता मतदान केंद्र पर पहुंचे तो पता चला कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है।
मोहल्ले के इतने घर गायब हैं। जब ये बात उनके मोहल्लों तक पहुंची तो मतदान के लिए आने वाले अन्य लोग भी ठिठक गए और तैयार होने के बाद भी घरों से नहीं निकले। आठवां- व्यस्त जीवन शैली में वोटरों को घर से मतदान केंद्र तक पहुंचाने में मेयर, पार्षद प्रत्याशी, पोलिंग एजेंट व पार्टी कार्यकर्ता सफल नहीं हो सके। नौंवा-इस चुनाव से पहले बीएलओ के जिम्मेदारी भर काम वोटर पर्ची बांटने, वोटर लिस्ट से मिलान कराने की कहीं किसी स्तर से समीक्षा नहीं हुई। इन्हीं नौ वजहों से मतदान फीसद ज्यादा नहीं बढ़ा, जितना बढ़ना चाहिए था।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
नगर निगम चुनाव के मतदान में अपेक्षाकृत बढ़ोत्तरी नहीं होने के कई कारण रहे। पहला- ई-रिक्शा, टिर्री, छोटा हाथी और रिक्शा सहित अन्य छोटे वाहनों की आवाजाही पर रोक। जिससे दूर दूर बने पोलिंग स्टेशनों तक आम आदमी नहीं पहुंच सका। प्रशासन ने एहतियातन सुरक्षा की दृष्टि से इन वाहनों पर प्रतिबंध लगाया था, ताकि वोटराें को ढोने की परंपरा रोकी जाए।
दूसरा-पोलिंग स्टेशनों के अंदर स्मार्ट मोबाइल फोन ले जाने को लेकर कहीं कहीं हुई मनाही। तीसरा-आम लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि पोलिंग स्टेशनों के आसपास कार पार्किंग, दुपहिया पार्किंग की व्यवस्था है या नहीं? चौथा-मतदाता की आशंका कि उसका निजी वाहन पोलिंग स्टेशन तक पहुंचेंगे या नहीं? पांचवां परिसीमन, जिसकी वजह से दर्जनों मोहल्ले एक वार्ड से दूसरे वार्ड में चले गए। छठवां-हजारों मतदाता अपना पोलिंग स्टेशन, पोलिंग बूथ, वोटर पर्ची और वोटर लिस्ट के बारे में नहीं जान पाए। सातवां जो कुछ जागरूक मतदाता मतदान केंद्र पर पहुंचे तो पता चला कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है।
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मोहल्ले के इतने घर गायब हैं। जब ये बात उनके मोहल्लों तक पहुंची तो मतदान के लिए आने वाले अन्य लोग भी ठिठक गए और तैयार होने के बाद भी घरों से नहीं निकले। आठवां- व्यस्त जीवन शैली में वोटरों को घर से मतदान केंद्र तक पहुंचाने में मेयर, पार्षद प्रत्याशी, पोलिंग एजेंट व पार्टी कार्यकर्ता सफल नहीं हो सके। नौंवा-इस चुनाव से पहले बीएलओ के जिम्मेदारी भर काम वोटर पर्ची बांटने, वोटर लिस्ट से मिलान कराने की कहीं किसी स्तर से समीक्षा नहीं हुई। इन्हीं नौ वजहों से मतदान फीसद ज्यादा नहीं बढ़ा, जितना बढ़ना चाहिए था।
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