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अलीगढ़ में शव दफनाने को लेकर आमने सामने आए दो समुदाय
Updated Fri, 13 Oct 2017 02:47 AM IST
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शव दफनाने को लेकर आमने-सामने आए दो समुदाय
ब्यूरो, अमर उजाला, लोधा (अलीगढ़)।
थाना क्षेत्र के गांव सलेमपुर में एक वृद्ध के शव को दफनाने को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ गए। गांव में एक ही भूखंड पर कब्रिस्तान और शमशान होने से यह विवाद था। मामला थाने से प्रशासन तक पहुंचा।
एसडीएम कोल पंकज कुमार वर्मा के अनुसार उन्होंने अपने सामने इस भूखंड में एक बीघा जमीन कब्रिस्तान के लिए आरक्षित कराई, जिसमें दोनों समुदाय के लोगों ने सहयोग कर शव दफन कराया। जमीन को लेकर विवाद का पूरी तरह पटाक्षेप करा दिया गया।
दरअसल गांव में छह बीघे जमीन श्मशान व कब्रिस्तान के नाम दर्ज है। इसी जमीन पर एक समुदाय शव को जलाता है, तो दूसरा समुदाय शव दफन करता है। दोनों समुदायों में इसी बात पर विवाद होता आ रहा था। बताते हैं कि शमसुद्दीन पुत्र इमदाद खां की बुधवार रात बीमारी के चलते मौत हो गई थी।
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परिवार के लोग एवं ग्रामीण जब शव लेकर कब्रिस्तान में दफनाने पहुंचे तो दूसरे समुदाय ने इस जमीन पर शव दफन करने का विरोध शुरू कर दिया। दो समुदायों से मामला जुड़ा होने पर लोधा के साथ ही थाना देहली गेट, सासनी गेट एसओ के साथ पीएसी, पीआरवी भी पहुंच गई।
एसडीएम कोल पंकज कुमार वर्मा के अनुसार अब तक कहीं भी शव जला दिया जाता था, अथवा दफन किया जाता था। अब दोनों समुदायों के लिए जमीन आरक्षित कर दी गई है।
दाह संस्कार से रोकने पर शुरू हुआ था विवाद
चर्चा है कि दो साल पहले एक युवक की मौत के बाद इस जमीन पर शव का दाह संस्कार करने पहुंचे परिवार वालों का समुदाय विशेष के लोगों ने विरोध किया था। इसी बात की खुन्नस खाए दूसरे समुदाय के लोग दफन के लिए पहुंचने वाले किसी शव का इंतजार कर रहे थे, ताकि विरोध कर सकें।
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ब्यूरो, अमर उजाला, लोधा (अलीगढ़)।
थाना क्षेत्र के गांव सलेमपुर में एक वृद्ध के शव को दफनाने को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ गए। गांव में एक ही भूखंड पर कब्रिस्तान और शमशान होने से यह विवाद था। मामला थाने से प्रशासन तक पहुंचा।
एसडीएम कोल पंकज कुमार वर्मा के अनुसार उन्होंने अपने सामने इस भूखंड में एक बीघा जमीन कब्रिस्तान के लिए आरक्षित कराई, जिसमें दोनों समुदाय के लोगों ने सहयोग कर शव दफन कराया। जमीन को लेकर विवाद का पूरी तरह पटाक्षेप करा दिया गया।
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दरअसल गांव में छह बीघे जमीन श्मशान व कब्रिस्तान के नाम दर्ज है। इसी जमीन पर एक समुदाय शव को जलाता है, तो दूसरा समुदाय शव दफन करता है। दोनों समुदायों में इसी बात पर विवाद होता आ रहा था। बताते हैं कि शमसुद्दीन पुत्र इमदाद खां की बुधवार रात बीमारी के चलते मौत हो गई थी।
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परिवार के लोग एवं ग्रामीण जब शव लेकर कब्रिस्तान में दफनाने पहुंचे तो दूसरे समुदाय ने इस जमीन पर शव दफन करने का विरोध शुरू कर दिया। दो समुदायों से मामला जुड़ा होने पर लोधा के साथ ही थाना देहली गेट, सासनी गेट एसओ के साथ पीएसी, पीआरवी भी पहुंच गई।
एसडीएम कोल पंकज कुमार वर्मा के अनुसार अब तक कहीं भी शव जला दिया जाता था, अथवा दफन किया जाता था। अब दोनों समुदायों के लिए जमीन आरक्षित कर दी गई है।
दाह संस्कार से रोकने पर शुरू हुआ था विवाद
चर्चा है कि दो साल पहले एक युवक की मौत के बाद इस जमीन पर शव का दाह संस्कार करने पहुंचे परिवार वालों का समुदाय विशेष के लोगों ने विरोध किया था। इसी बात की खुन्नस खाए दूसरे समुदाय के लोग दफन के लिए पहुंचने वाले किसी शव का इंतजार कर रहे थे, ताकि विरोध कर सकें।