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विदेश में अपराधियों को लग रही अलीगढ़ की हथकड़ी-Cordination

Tue, 04 Sep 2018 01:48 AM IST
Updated Tue, 04 Sep 2018 01:48 AM IST
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विदेश में अपराधियों को लग रही अलीगढ़ की हथकड़ी-Cordination
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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द्वापर युग में वासुदेव को कंस के सैनिकों ने जो हथकड़ी-बेड़ी लगाई थी, वैसी ही हथकड़ी-बेड़ी आज भी अलीगढ़ में बनती है। गले से लेकर पैरों तक जंजीर से जुड़ी इन हथकड़ियों-बेड़ियों की मांग विदेश में जबर्दस्त है। यह हॉलीवुड की फिल्मों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर इनकी प्रासंगिकता बढ़ जाती है, क्योंकि जिला मुख्यालय से मात्र 68 किमी दूर मथुरा में श्रीकृष्ण के माता देवकी व पिता वासुदेव को बंदी बना हथकड़ी-बेड़ी लगाकर कंस ने उन्हें कारागार में डाल दिया था। अलीगढ़ के मोहल्ला सराय मान सिंह स्थित रुद्रा इंटरप्राइजेज फैक्ट्री में बनने वाली हथकड़ियों- बेड़ियों को मलेशिया, नाइजीरिया आदि देशों के अपराधियों को लगाई जा रही है। जल्द ही यह कंपनी दो-तीन तरह के नए डिजाइन की हथकड़ियां बाजार में लाने वाली है।
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सूबे में छाई अलीगढ़ की हथकड़ी
वर्षों पहले अलीगढ़ के तत्कालीन एसएसपी असीम अरुण विदेश के दौरे पर गए थे। उन्होंने वहां की हथकड़ी को पारखी नजर से देखा। लौटने के बाद अलीगढ़ में भी वैसी ही हथकड़ी बनाने की एक कंपनी को जिम्मेदारी दी, जिसे ‘आरई मोड हैंड कप’ के रूप में तैयार किया। कंपनी से 30 जोड़ी हथकड़ी ली गईं, जो पुराने मॉडल से हल्की और खोलने-बंद करने में सुविधाजनक थी। एसएसपी ने ही लैपर्ड दस्ते को यही हथकड़ी इस्तेमाल करने को जिम्मा सौंपा। बाद में इस हथकड़ी की मांग पूरे प्रदेश में बढ़ी। खास बात यह है कि इस कंपनी ने इंग्लैंड से नमूना मंगाकर हथकड़ी बनानी शुरू की थी।
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चार साइज की बनती हैं हथकड़ियां
अलीगढ़ के मोहल्ला सराय मान सिंह स्थित फैक्ट्री में फिक्स्ड हैंड कप (वजन 450 से 500 ग्राम) अंग्रेजों के जमाने से बन रही है, जिसके 4 साइज हैं। 2 इंच, सवा 2 इंच, ढाई इंच व पौने तीन इंच। एडजस्टेबल हैंड कप (40 साल पुराना) जिसका वजन 450 से 500 है। साइज एक ही बनता है, जो कलाई के अनुसार घट बढ़ जाता है। 8 टाइप 2010 में (400 ग्राम) एक ही स्टैंडर्ड साइज होता है। आरई मोड हैंड कप 2008 में (350 ग्राम) एक ही साइज, घट बढ़ जाता है। तत्कालीन एसएसपी असीम अरुण के प्रस्ताव पर यही शुरू की थी, जो डबल लॉक में है। हिंजेस मोड हैंड कप्स (वजन 350 ग्राम) ये लेटेस्ट 2010 में लांच हुआ है। एक ही साइज को जो घट बढ़ जाता है। लेग कप 50 साल पुराना है, जो एक से डेढ़ किग्रा वजन है। साइज एक ही है, जो घट बढ़ सकता है। इससे भारी वजन के भी हथकड़ी बनती है, जो हॉलीवुड फिल्मों में इस्तेमाल होती है।

देवी को चढ़ती है हथकड़ी-बेड़ी
प्रतापगढ़ जिले के जोलर ग्राम पंचायत में दिवाक माता का एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर देवलिया के पास घने जंगल में स्थित है। ऊंची पहाड़ी पर बने मंदिर के चारों ओर घना जंगल है। देवी को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु हथकड़ी व बेड़ियां चढ़ाते हैं। मंदिर में रखी कुछ बेड़ियां तो 200 साल से भी अधिक पुरानी है। ऐसी मान्यता है कि दिवाक माता के नाम से ही ये हथकड़ी और बेड़ियां अपने आप खुल जाती हैं।

हथकड़ी वालों के नाम से मशहूर
अलीगढ़ में ही नहीं विदेश में भी इसके निर्माता हथकड़ी वाले मिश्रा जी के नाम से मशहूर हैं। इनका वास्तविक नाम उदय मिश्रा है। वर्ष 1932 में इनके पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एसपी मिश्रा ने हथकड़ी बनाने का कारोबार शुरू किया था। यह कारोबार उदय मिश्रा के बेटे यानी तीसरी पीढ़ी हर्ष वर्धन मिश्रा, हिमांशु मिश्रा, सुधांशु मिश्रा, चैतन्य मिश्रा संभाल रहे हैं।


कोट
- देश में ही नहीं, मलेशिया व नाइजीरिया में भी हमारे यहां बनी हथकड़ियों- बेड़ियों की सप्लाई हो रही है। कई देशों से मांग की जा रही है। हथकड़ी के मामले में मुकाबला सिर्फ चीन से है। देश में चीन को पछाड़ चुके हैं। विदेश में भी पछाड़ देंगे। जल्द ही दो-तीन तरह के नए डिजाइन की हथकड़ियां बाजार में लाने वाले हैं।
- उदय मिश्रा, रुद्रा इंटरप्राइजेज, सराय मान सिंह अलीगढ़।
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