{"_id":"5980e2a34f1c1b61198b4610","slug":"191501618851-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ में भाजपा की राजनीति में एक और घराने का उदय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ में भाजपा की राजनीति में एक और घराने का उदय
Updated Wed, 02 Aug 2017 01:59 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा में एक और ‘घराने’ का उदय
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
बसपा के दिग्गज नेता एवं पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह के भाजपा में शामिल होने से अलीगढ़ में एक नए ‘घराने’ का उदय हो गया है। यह बात भाजपा के अंदर चर्चा का विषय बनी हुई है।
लोग इसे ‘परिवारवाद’ से भी जोड़ कर देख रहे हैं। जिले की राजनीति को करीब से जानने वाले लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले समय में जीटी रोड स्थित ठाकुर जयवीर सिंह का कार्यालय राजनीति का केंद्र बनेगा।
ठाकुर जयवीर सिंह राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी हैं। पिछले 20 साल से जिले की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। 12 साल से जिला पंचायत की राजनीति उनकी मुट्ठी में है। जिस तरह मैरिस रोड स्थित राजपैलेस भाजपा की राजनीति के केंद्र में रहता है।
विज्ञापन
उसी तरह पिछले डेढ़ दशक से जीटी रोड स्थित ठाकुर जयवीर सिंह का कार्यालय एवं किशोरनगर स्थित आवास बसपा की राजनीति का केंद्र्र रहा। 2002 में जयवीर सिंह स्वयं बरौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और मंत्री भी बने। बाद में भी विधायक और मंत्री बने।
2004 में बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़े। 2009 में पत्नी राजकुमार चौहान बसपा के टिकट से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचीं। 2014 में जयवीर सिंह के पुत्र अरविंद कुमार बसपा के टिकट से लोकसभा का चुनाव लड़े। 2015 में भतीजा उपेंद्र सिंह नीटू जिला पंचायत के अध्यक्ष बने। उससे पूर्व वे जवां के ब्लाक प्रमुख चुने गए।
वर्तमान में जिले में 7 विधायक एवं एक सांसद हैं। बरौली विधायक दलवीर सिंह को छोड़कर सभी पहली बार विधायक चुने गए हैं। इसमें अतरौली विधायक और शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह राजस्थान के राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रपौत्र हैं।
संदीप के पिता राजवीर सिंह राजू सांसद हैं, जबकि मां प्रेमलता वर्मा अतरौली विधानसभा से प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। जयवीर के आने के बाद दबी जुबान राजनीति में ‘परिवारवाद’ हावी होने की चर्चा है।
लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लखनऊ में दिए गए उस बयान का उल्लेख भी कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं होता, उसमें परिवारवाद को बढ़ावा मिलता है।
विज्ञापन
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
बसपा के दिग्गज नेता एवं पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह के भाजपा में शामिल होने से अलीगढ़ में एक नए ‘घराने’ का उदय हो गया है। यह बात भाजपा के अंदर चर्चा का विषय बनी हुई है।
लोग इसे ‘परिवारवाद’ से भी जोड़ कर देख रहे हैं। जिले की राजनीति को करीब से जानने वाले लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले समय में जीटी रोड स्थित ठाकुर जयवीर सिंह का कार्यालय राजनीति का केंद्र बनेगा।
विज्ञापन
ठाकुर जयवीर सिंह राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी हैं। पिछले 20 साल से जिले की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। 12 साल से जिला पंचायत की राजनीति उनकी मुट्ठी में है। जिस तरह मैरिस रोड स्थित राजपैलेस भाजपा की राजनीति के केंद्र में रहता है।
विज्ञापन
उसी तरह पिछले डेढ़ दशक से जीटी रोड स्थित ठाकुर जयवीर सिंह का कार्यालय एवं किशोरनगर स्थित आवास बसपा की राजनीति का केंद्र्र रहा। 2002 में जयवीर सिंह स्वयं बरौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और मंत्री भी बने। बाद में भी विधायक और मंत्री बने।
2004 में बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़े। 2009 में पत्नी राजकुमार चौहान बसपा के टिकट से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचीं। 2014 में जयवीर सिंह के पुत्र अरविंद कुमार बसपा के टिकट से लोकसभा का चुनाव लड़े। 2015 में भतीजा उपेंद्र सिंह नीटू जिला पंचायत के अध्यक्ष बने। उससे पूर्व वे जवां के ब्लाक प्रमुख चुने गए।
वर्तमान में जिले में 7 विधायक एवं एक सांसद हैं। बरौली विधायक दलवीर सिंह को छोड़कर सभी पहली बार विधायक चुने गए हैं। इसमें अतरौली विधायक और शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह राजस्थान के राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रपौत्र हैं।
संदीप के पिता राजवीर सिंह राजू सांसद हैं, जबकि मां प्रेमलता वर्मा अतरौली विधानसभा से प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। जयवीर के आने के बाद दबी जुबान राजनीति में ‘परिवारवाद’ हावी होने की चर्चा है।
लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लखनऊ में दिए गए उस बयान का उल्लेख भी कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं होता, उसमें परिवारवाद को बढ़ावा मिलता है।