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प्रकृति को सही तरह से समझने पर आपदा पर पा सकते हैं काबू
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के शिक्षा विभाग में ‘प्राकृतिक आपदा : शिक्षकों की भूमिका’ विषय पर आयोजित सेमिनार में गुरु जंबेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी हिसार (हरियाणा) के पर्यावरण विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. आर बास्कर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ से प्राकृतिक आपदा की रोकथाम व उसके प्रबंधन के लिए दिशा निर्देश तैयार किए हैं।
भारत में वर्ष 2005 में आपदा प्रबंधन एक्ट पास किया गया। इससे पूर्व देश में 1999 में उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित की गई थी।
उन्होंने कहा कि प्रकृति को अगर हम सही प्रकार से समझने में सफल होते हैं तो आपदा पर काबू पाया जा सकता है या उससे होने वाली हानि को कम किया जा सकता है।
बास्कर ने कहा कि भारत पहला देश है, जिसने विशेष तौर से नेशनल डिजास्टर रिस्पांस स्थापित किया, ताकि कुदरती और तकनीकी हर प्रकार की आपदा में मदद पहुंचायी जा सके।
विभाग की अध्यक्ष प्रो. नसरीन ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो. नबी अहमद ने पवित्र कुरान की सूरा जलजला के हवाले से चर्चा की। की। प्रो. गुंजन दुबे ने सभी का आभार जताया।
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एएमयू के शिक्षा विभाग में ‘प्राकृतिक आपदा : शिक्षकों की भूमिका’ विषय पर आयोजित सेमिनार में गुरु जंबेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी हिसार (हरियाणा) के पर्यावरण विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. आर बास्कर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ से प्राकृतिक आपदा की रोकथाम व उसके प्रबंधन के लिए दिशा निर्देश तैयार किए हैं।
भारत में वर्ष 2005 में आपदा प्रबंधन एक्ट पास किया गया। इससे पूर्व देश में 1999 में उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित की गई थी।
उन्होंने कहा कि प्रकृति को अगर हम सही प्रकार से समझने में सफल होते हैं तो आपदा पर काबू पाया जा सकता है या उससे होने वाली हानि को कम किया जा सकता है।
बास्कर ने कहा कि भारत पहला देश है, जिसने विशेष तौर से नेशनल डिजास्टर रिस्पांस स्थापित किया, ताकि कुदरती और तकनीकी हर प्रकार की आपदा में मदद पहुंचायी जा सके।
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विभाग की अध्यक्ष प्रो. नसरीन ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो. नबी अहमद ने पवित्र कुरान की सूरा जलजला के हवाले से चर्चा की। की। प्रो. गुंजन दुबे ने सभी का आभार जताया।
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