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हरियाणा के आसरे है अलीगढ़ की कुपोषित बेटी-ᄋᄂ₩ᅦU¢₩
Updated Sat, 13 Jan 2018 01:13 AM IST
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अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
मुंह से लार, नाक से धार और उसके हाथ पैर सूखकर सिकुड़ चुके थे। बीती रात करीब साढ़े तीन बजे कड़ाके की ठंड में अतरौली बस अड्डे पर खड़ा एक व्यक्ति अपने गमछे से महज हड्डियों का ढांचा बन चुकी उस बच्ची को ढकने का प्रयास कर रहा था। गोद में सिमटी बच्ची उसकी बेटी लक्ष्मी थी।
एक सज्जन ने मानवतावश उसको अपना कंबल दिया। साथ ही लक्ष्मी के मजदूर पिता ने जो जानकारी दी उससे बच्ची के कुपोषण का शिकार होना तो जाहिर हुआ ही, साथ ही राज्य पोषण मिशन के क्रियान्वयन की कड़वी हकीकत भी सामने आ गई। राज्य सरकार के लिए सबसे शर्मनाक बात तो ये है कि यह बिटिया उपचार के लिए दूसरे राज्य हरियाणा के आसरे है। वह बीती रात हरियाणा से ही लौट रही थी।
जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर बिजौली ब्लॉक के गांव सिरसा के हरिकिशन पुत्र शिवलाल की बेटी है लक्ष्मी। हरिकिशन बताते हैं कि चार वर्ष पूर्व लक्ष्मी का जन्म बिजौली स्वास्थ्य केंद्र में ही हुआ था। तब जननी सुरक्षा योजना का 1400 रुपये का चेक भी मिला। वैसे टीके भी लक्ष्मी को लगवाए, लेकिन लक्ष्मी का स्वास्थ्य कभी नहीं सुधरा। आज भी उसका वजन नौ किग्रा है।
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राज्य पोषण मिशन का नाम सुन हरिकिशन बड़ी हैरानी से बोलते हैं कि ये क्या होता है साहब। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी शुरू से ही बहुत कमजोर है। उसके तालू में भी छेद है। गत 8 जनवरी को अतरौली में एक स्वास्थ्य कैंप लगा था वहां वे भी पहुंचे। लक्ष्मी का चेकअप कराया। कैंप वाले ही उन्हें हरियाणा स्थित हिसार ले गए।
वहीं लक्ष्मी के तालू का निशुल्क ऑपरेशन किया और अन्य उपचार देकर लौटने के लिए 800 रुपये भी दिए। हरिकिशन का दर्द है कि अलीगढ़ में किसी भी सरकारी आदमी ने उनकी बेटी की खबर नहीं ली कभी। जमीन के नाम पर सिर्फ दो बीघा खेत, घर के नाम पर एक कमरा और काम के नाम पर खेत मालिकों की मजदूरी। न शौचालय मिला और मनरेगा में मजदूरी।
इन सवालों के जवाब कौन देगा
सवाल यह है कि 4 वर्षों में लक्ष्मी का वजन कभी 9 किग्रा के पार क्यों नहीं गया। राज्य पोषण मिशन कहां चल रहा है। जिला पोषण समिति किन बच्चों पर कुपोषणमुक्ति का दम भरती आ रही है। उन 22 हजार कुपोषितों में लक्ष्मी का नाम 4 वर्ष में क्यों दर्ज नहीं हो सका। तब से अब तक हर माह डीएम स्तर पर 192 समीक्षा बैठकों में किन बच्चों की समीक्षा की गई। जिले के 110 गांव गोद लेकर अफसर 6 माह में ही जिले को कुपोषण से मुक्त करने का दावा किस आधार पर कर रहे हैं।
लक्ष्मी के पिता ने उसके कुपोषण के मामले में संपर्क नहीं किया है। मामला चार साल पुराना है। मैने तो अभी चार्ज लिया है। यदि मामला संज्ञान में आता है तो यथोचित कार्रवाई की जाएगी।
- श्रेयस कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग
110 चयनित गांवों में सिरसा नहीं है शामिल
जिन 110 गांवों को गोद लेकर अफसर अगले 6 माह में ही पूरे जिले को कुपोषण मुक्त करने का दावा कर रहे हैं उनमें बिजौली क्षेत्र के 11 गांव बिजौली, दीनापुर, हारुनपुर कलां, दरी अलावलपुर, खड़ऊआ, नरुपुर कटका, दादों, दत्तचोली बुजुर्ग, रायपुर चंदियाना, तेवतू और बुलापुर हैं, लेकिन उनमें सिरसा नहीं है।
सिरसा में 34 कुपोषित, 67 फ ीसदी बेटियां
सिरसा गांव के 34 बच्चे कुपोषित दर्ज हैं। जिनमें 67 फ ीसदी बेटियां हैं, जिसमें आधे से ज्यादा अति कुपोषित हैं। सभी बच्चे जीरो से 5 वर्ष उम्र वर्ग के हैं। हैरत की बात है कि इस बेसलाइन सर्वे के आंकड़ों में भी कहीं भी लक्ष्मी का नाम नहीं है। हालांकि आंगनबाड़ी स्तर पर तर्क जरूर दिया गया कि लक्ष्मी का पिता न तो टीके लगवा रहे हैं न ही पोलियो ड्राप्स लेते हैं इसलिए उनकी बेटी का नाम नहीं है।
सिरसा के ये बच्चे हैं अतिकुपोषित
नीलम पुत्री लाखन, सलोनी पुत्री वीरेंद्र, मोहिनी पुत्री रिंकू, ललतेश पुत्री लालाराम, मोहिनी पुत्री हरेंद्र, डोली पुत्री मिश्री, होशियारी पुत्री प्रमोद, मयंक पुत्र रणवीर, विकास पुत्र अमित, पायल पुत्री लालाराम, भूमिका पुत्री शिवकुमार, अभिमन्यु पुत्र यतेंद्र, कृष्णा पुत्र अरुण शर्मा, दुष्यंत पुत्र शीलेश, पवन पुत्र बनी सिंह, कीर्ति पुत्री रेशमपाल, आरुषि पुत्री सोनू, गरिमा पुत्री सोनू और मानवी पुत्री सुमेश।
सिरसा में ये हैं कुपोषित
सविता पुत्री प्रेमपाल, माधुरी पुत्री बंसी, राधा पुत्री विनीत, गीता पुत्री राजेश, गीता पुत्री नवाब सिंह, नीतू पुत्री इंद्रपाल, मानवी पुत्री दौलतराम, खुशी पुत्री मुकेश, मोनू पुत्र मुकेश, लकी पुत्र राजेश, पवन पुत्र लालाराम, आदित्य पुत्र अजित, मीनाक्षी पुत्री चंद्रभान, आशिक पुत्र योगेंद्र और वीरा पुत्र मुकेश।
यह हकीकत भी जान लें
इसके अलावा गांव में इस समय 22 महिलाएं गर्भवती भी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लिए अब तक 12 से 20 पैकेट पोषाहार मिलता रहा है और ये भी पिछले 2 साल से। बमुश्किल 8-10 बार ही मिला है। पोषाहार के नाम पर मक्के या बाजरा का आटा भेजा जाता है, जिसे बच्चे खाते भी नहीं हैं। इसी पोषाहार को सरकार बीनिंग रिच एनर्जी और मॉर्निंग स्नैक्स बताती है।
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मुंह से लार, नाक से धार और उसके हाथ पैर सूखकर सिकुड़ चुके थे। बीती रात करीब साढ़े तीन बजे कड़ाके की ठंड में अतरौली बस अड्डे पर खड़ा एक व्यक्ति अपने गमछे से महज हड्डियों का ढांचा बन चुकी उस बच्ची को ढकने का प्रयास कर रहा था। गोद में सिमटी बच्ची उसकी बेटी लक्ष्मी थी।
एक सज्जन ने मानवतावश उसको अपना कंबल दिया। साथ ही लक्ष्मी के मजदूर पिता ने जो जानकारी दी उससे बच्ची के कुपोषण का शिकार होना तो जाहिर हुआ ही, साथ ही राज्य पोषण मिशन के क्रियान्वयन की कड़वी हकीकत भी सामने आ गई। राज्य सरकार के लिए सबसे शर्मनाक बात तो ये है कि यह बिटिया उपचार के लिए दूसरे राज्य हरियाणा के आसरे है। वह बीती रात हरियाणा से ही लौट रही थी।
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जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर बिजौली ब्लॉक के गांव सिरसा के हरिकिशन पुत्र शिवलाल की बेटी है लक्ष्मी। हरिकिशन बताते हैं कि चार वर्ष पूर्व लक्ष्मी का जन्म बिजौली स्वास्थ्य केंद्र में ही हुआ था। तब जननी सुरक्षा योजना का 1400 रुपये का चेक भी मिला। वैसे टीके भी लक्ष्मी को लगवाए, लेकिन लक्ष्मी का स्वास्थ्य कभी नहीं सुधरा। आज भी उसका वजन नौ किग्रा है।
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राज्य पोषण मिशन का नाम सुन हरिकिशन बड़ी हैरानी से बोलते हैं कि ये क्या होता है साहब। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी शुरू से ही बहुत कमजोर है। उसके तालू में भी छेद है। गत 8 जनवरी को अतरौली में एक स्वास्थ्य कैंप लगा था वहां वे भी पहुंचे। लक्ष्मी का चेकअप कराया। कैंप वाले ही उन्हें हरियाणा स्थित हिसार ले गए।
वहीं लक्ष्मी के तालू का निशुल्क ऑपरेशन किया और अन्य उपचार देकर लौटने के लिए 800 रुपये भी दिए। हरिकिशन का दर्द है कि अलीगढ़ में किसी भी सरकारी आदमी ने उनकी बेटी की खबर नहीं ली कभी। जमीन के नाम पर सिर्फ दो बीघा खेत, घर के नाम पर एक कमरा और काम के नाम पर खेत मालिकों की मजदूरी। न शौचालय मिला और मनरेगा में मजदूरी।
इन सवालों के जवाब कौन देगा
सवाल यह है कि 4 वर्षों में लक्ष्मी का वजन कभी 9 किग्रा के पार क्यों नहीं गया। राज्य पोषण मिशन कहां चल रहा है। जिला पोषण समिति किन बच्चों पर कुपोषणमुक्ति का दम भरती आ रही है। उन 22 हजार कुपोषितों में लक्ष्मी का नाम 4 वर्ष में क्यों दर्ज नहीं हो सका। तब से अब तक हर माह डीएम स्तर पर 192 समीक्षा बैठकों में किन बच्चों की समीक्षा की गई। जिले के 110 गांव गोद लेकर अफसर 6 माह में ही जिले को कुपोषण से मुक्त करने का दावा किस आधार पर कर रहे हैं।
लक्ष्मी के पिता ने उसके कुपोषण के मामले में संपर्क नहीं किया है। मामला चार साल पुराना है। मैने तो अभी चार्ज लिया है। यदि मामला संज्ञान में आता है तो यथोचित कार्रवाई की जाएगी।
- श्रेयस कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग
110 चयनित गांवों में सिरसा नहीं है शामिल
जिन 110 गांवों को गोद लेकर अफसर अगले 6 माह में ही पूरे जिले को कुपोषण मुक्त करने का दावा कर रहे हैं उनमें बिजौली क्षेत्र के 11 गांव बिजौली, दीनापुर, हारुनपुर कलां, दरी अलावलपुर, खड़ऊआ, नरुपुर कटका, दादों, दत्तचोली बुजुर्ग, रायपुर चंदियाना, तेवतू और बुलापुर हैं, लेकिन उनमें सिरसा नहीं है।
सिरसा में 34 कुपोषित, 67 फ ीसदी बेटियां
सिरसा गांव के 34 बच्चे कुपोषित दर्ज हैं। जिनमें 67 फ ीसदी बेटियां हैं, जिसमें आधे से ज्यादा अति कुपोषित हैं। सभी बच्चे जीरो से 5 वर्ष उम्र वर्ग के हैं। हैरत की बात है कि इस बेसलाइन सर्वे के आंकड़ों में भी कहीं भी लक्ष्मी का नाम नहीं है। हालांकि आंगनबाड़ी स्तर पर तर्क जरूर दिया गया कि लक्ष्मी का पिता न तो टीके लगवा रहे हैं न ही पोलियो ड्राप्स लेते हैं इसलिए उनकी बेटी का नाम नहीं है।
सिरसा के ये बच्चे हैं अतिकुपोषित
नीलम पुत्री लाखन, सलोनी पुत्री वीरेंद्र, मोहिनी पुत्री रिंकू, ललतेश पुत्री लालाराम, मोहिनी पुत्री हरेंद्र, डोली पुत्री मिश्री, होशियारी पुत्री प्रमोद, मयंक पुत्र रणवीर, विकास पुत्र अमित, पायल पुत्री लालाराम, भूमिका पुत्री शिवकुमार, अभिमन्यु पुत्र यतेंद्र, कृष्णा पुत्र अरुण शर्मा, दुष्यंत पुत्र शीलेश, पवन पुत्र बनी सिंह, कीर्ति पुत्री रेशमपाल, आरुषि पुत्री सोनू, गरिमा पुत्री सोनू और मानवी पुत्री सुमेश।
सिरसा में ये हैं कुपोषित
सविता पुत्री प्रेमपाल, माधुरी पुत्री बंसी, राधा पुत्री विनीत, गीता पुत्री राजेश, गीता पुत्री नवाब सिंह, नीतू पुत्री इंद्रपाल, मानवी पुत्री दौलतराम, खुशी पुत्री मुकेश, मोनू पुत्र मुकेश, लकी पुत्र राजेश, पवन पुत्र लालाराम, आदित्य पुत्र अजित, मीनाक्षी पुत्री चंद्रभान, आशिक पुत्र योगेंद्र और वीरा पुत्र मुकेश।
यह हकीकत भी जान लें
इसके अलावा गांव में इस समय 22 महिलाएं गर्भवती भी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लिए अब तक 12 से 20 पैकेट पोषाहार मिलता रहा है और ये भी पिछले 2 साल से। बमुश्किल 8-10 बार ही मिला है। पोषाहार के नाम पर मक्के या बाजरा का आटा भेजा जाता है, जिसे बच्चे खाते भी नहीं हैं। इसी पोषाहार को सरकार बीनिंग रिच एनर्जी और मॉर्निंग स्नैक्स बताती है।