{"_id":"595a9ddb4f1c1bef368b45ea","slug":"181499110875-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज से चार महीने तक नहीं होंगे कोई भी शुभ कार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज से चार महीने तक नहीं होंगे कोई भी शुभ कार्य
Updated Tue, 04 Jul 2017 01:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आज से चार महीने तक नहीं होंगे कोई भी शुभ कार्य
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
आज से पूरे चार महीने के लिए शुभ एवं मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। चूंकि मंगलवार को आषाढ़ शुल्क पक्ष की देवशयनी एकादशी है। इसलिए देवता चार महीने के लिए पाताल लोक में निवास करेंगे।
अवस्थी ज्योतिष संस्थान के प्रमुख आचार्य पं. आदित्य नारायण अवस्थी ने बताया कि मंगलवार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी है। पुराणों में उल्लेख है कि देवशयनी एकादशी से चार मास तक भगवान विष्णु पाताल लोक में निवास करते हैं। भगवान विष्णु चार मास क्षीर सागर की अनंत शैय्या में शयन करते हैं।
आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष देवशयनी एकादशी से कार्तिक मास शुक्ल पक्ष देव प्रबोधिनी एकादशी 31 अक्टूबर तक चातुर्मास रहेगा। चार मास यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह एवं मांगलिक शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। चातुर्मास में तपस्वी मुनि एक ही स्थान पर रहकर तपस्या करते हैं। 31 अक्तूबर को देवउठान एकादशी है और चार महीने के बाद योग निंद्रा से भगवान विष्णु जाग जाएंगे। तभी मांगलिक शुभ कार्य प्रारंभ होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
आज से पूरे चार महीने के लिए शुभ एवं मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। चूंकि मंगलवार को आषाढ़ शुल्क पक्ष की देवशयनी एकादशी है। इसलिए देवता चार महीने के लिए पाताल लोक में निवास करेंगे।
अवस्थी ज्योतिष संस्थान के प्रमुख आचार्य पं. आदित्य नारायण अवस्थी ने बताया कि मंगलवार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी है। पुराणों में उल्लेख है कि देवशयनी एकादशी से चार मास तक भगवान विष्णु पाताल लोक में निवास करते हैं। भगवान विष्णु चार मास क्षीर सागर की अनंत शैय्या में शयन करते हैं।
विज्ञापन
आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष देवशयनी एकादशी से कार्तिक मास शुक्ल पक्ष देव प्रबोधिनी एकादशी 31 अक्टूबर तक चातुर्मास रहेगा। चार मास यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह एवं मांगलिक शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। चातुर्मास में तपस्वी मुनि एक ही स्थान पर रहकर तपस्या करते हैं। 31 अक्तूबर को देवउठान एकादशी है और चार महीने के बाद योग निंद्रा से भगवान विष्णु जाग जाएंगे। तभी मांगलिक शुभ कार्य प्रारंभ होंगे।
विज्ञापन