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एएमयू कक्षा 12 का परिणाम जारी 96.80 प्रतिशत अंक हासिल कर उमामा बनी टॉपर
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की सीनियर सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट पार्ट- द्वितीय (कक्षा 12) की वार्षिक परीक्षा 2019 का परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस परीक्षा में 94.35 प्रतिशत छात्र व छात्राएं कामयाब हुए। सीनियर सेकेंडरी स्कूल गर्ल्स की पीसीबी की छात्रा उमामा इलियास 96.80 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉपर बनी हैं।
उमामा इलियास एएमयू के यूनानी मेडिसन के शिक्षक डॉ. मो. यूनुस सिद्दीकी की पुत्री हैं। सीनियर सेकेंडरी स्कूल गर्ल्स की ही छात्रा अंबरीन तैयब 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर द्वितीय स्थान पर हैं। अंबरीन मूलरूप से बिहार की रहने वाली हैं। जबकि जैनब जावेद और लाइबा हाशमी सहित सैयद हामिद सीनियर सेकेंडरी स्कूल के अमान अहमद खान ने 95 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया है। जैनब एएमयू के फाइनेंस ऑफिसर प्रो. एसएम जावेद अख्तर की पुत्री हैं।
उमामा इलियास ने 500 अंक में से 484 अंक प्राप्त किए, जबकि अंबरीन तैयब ने 500 में से 480 और जैनब जावेद, लाइबा हाशमी व अमान अहमद खान ने 475 अंक प्राप्त किए हैं। इस परीक्षा में 2514 अभ्यर्थी शामिल हुए जिसमें 2051 ने प्रथम, 306 ने द्वितीय और 15 ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। विज्ञान वर्ग में उमामा इलियास ने 96.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सवोच्च स्थान प्राप्त किया है। जबकि कामर्स तथा सोशल साइंस वर्गों में क्रमश: जयदीप चौधरी ने 92.40 प्रतिशत तथा हस्सान उल्लाह खान ने 94.60 प्रतिशत अंक के साथ सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है।
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गरीबों का दर्द देखकर रोता है उमामा का मन
एएमयू 12 वीं की टॉपर उमामा इलियास डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहती है। उमामा के पिता डॉ. मो. यूनुस सिद्दीकी यूनानी मेडिसन संकाय में शिक्षक और माता फौजिया गृहणि हैं। बड़ी बहन रमला एएमयू से बीटेक कर रही है जबकि छोटा भाई अहमद सेंट फिदेलिस स्कूल में 10 वीं का छात्र है। उमामा का मानना है कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है और सफलता के लिए यह जरूरी है। उनका कहना है कि अर्थाभाव में गरीब लोग अपना इलाज नहीं करा पाते। यह देखकर मन रोता है। वह डॉक्टर बनकर ऐसे लोगों की सेवा करना चाहती है जिनके पास किसी तरह की सुविधा नहीं है।
भविष्य के लिए समर्पित कर दें दो साल : जैनब
जैनब का कहना है कि छात्र-छात्राओं के लिए दो साल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दो सालों में एकाग्र होकर पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। जैनब का कहना है कि छात्र-छात्राओं को स्मार्ट फोन एवं सोशल मीडिया आदि से दूर रहना चाहिए। जैनब एएमयू के फाइनेंस ऑफिसर प्रो. एसएम जावेद अख्तर की पुत्री हैं। जैनब पढ़ लिखकर डॉक्टर बनना चाहती हैं। जूनियर छात्रों को सुझाव देती हैं कि कोचिंग एवं क्लास में बेहतर तालमेल बनाना बेहद जरूरी है। समय से सोना एवं उठना जरूरी है। कोचिंग क्लासेज के बाद उसकी पुनरावृत्ति जरूरी है। सफलता का श्रेय मम्मी-पापा को देती हैं।
न्यूरो सर्जन बनना चाहती है लाइबा हाशमी
बिहार निवासी लाइबा हाशमी न्यूरो सर्जन बनना चाहती हैं। लाइबा के पिता अफसाहुल होदा सरवर क्लासेज में शिक्षक एवं अम्मी नसरीन होदा गृहणी हैं। लाइबा को पढ़ाई के अलावा उपन्यास पढ़ने एवं टीटी खेलने का शौक है। वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने आज तक पढ़ाई के लिए समय निर्धारित नहीं किया। जब भी मौका मिलता है, मन लगाकर पढ़ाई करती हैं।
दो साल से स्मार्ट फोन से दूर रहे अमान
एएमयू 12वीं के टॉपरों में शामिल अमान अहमद खान पिछले दो साल से स्मार्ट फोन से दूर रहे। उनका कहना है कि वह उसी समय पढ़ने बैठते हैं, जब मन होता है। मन नहीं होता है तो पढ़ने नहीं बैठते। अमान का सपना डॉक्टर बनने का है। वह डॉक्टर बनकर लोगों की मदद करना चाहते हैं। अपनी सफलता का श्रेय माता अंजुमन आरा को देते हैं। पिता सलीम अहमद खान एएमयू में केमिस्ट्री विभाग में सहायक के पद पर कार्यरत हैं। बड़े भाई सलमान एएमयू से एमबीबीएस तथा बहन समन सलीम बीएससी कर रही हैं। छोटी बहन सुमबुल 9वीं की छात्रा हैं।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की सीनियर सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट पार्ट- द्वितीय (कक्षा 12) की वार्षिक परीक्षा 2019 का परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस परीक्षा में 94.35 प्रतिशत छात्र व छात्राएं कामयाब हुए। सीनियर सेकेंडरी स्कूल गर्ल्स की पीसीबी की छात्रा उमामा इलियास 96.80 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉपर बनी हैं।
उमामा इलियास एएमयू के यूनानी मेडिसन के शिक्षक डॉ. मो. यूनुस सिद्दीकी की पुत्री हैं। सीनियर सेकेंडरी स्कूल गर्ल्स की ही छात्रा अंबरीन तैयब 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर द्वितीय स्थान पर हैं। अंबरीन मूलरूप से बिहार की रहने वाली हैं। जबकि जैनब जावेद और लाइबा हाशमी सहित सैयद हामिद सीनियर सेकेंडरी स्कूल के अमान अहमद खान ने 95 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया है। जैनब एएमयू के फाइनेंस ऑफिसर प्रो. एसएम जावेद अख्तर की पुत्री हैं।
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उमामा इलियास ने 500 अंक में से 484 अंक प्राप्त किए, जबकि अंबरीन तैयब ने 500 में से 480 और जैनब जावेद, लाइबा हाशमी व अमान अहमद खान ने 475 अंक प्राप्त किए हैं। इस परीक्षा में 2514 अभ्यर्थी शामिल हुए जिसमें 2051 ने प्रथम, 306 ने द्वितीय और 15 ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। विज्ञान वर्ग में उमामा इलियास ने 96.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सवोच्च स्थान प्राप्त किया है। जबकि कामर्स तथा सोशल साइंस वर्गों में क्रमश: जयदीप चौधरी ने 92.40 प्रतिशत तथा हस्सान उल्लाह खान ने 94.60 प्रतिशत अंक के साथ सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है।
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गरीबों का दर्द देखकर रोता है उमामा का मन
एएमयू 12 वीं की टॉपर उमामा इलियास डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहती है। उमामा के पिता डॉ. मो. यूनुस सिद्दीकी यूनानी मेडिसन संकाय में शिक्षक और माता फौजिया गृहणि हैं। बड़ी बहन रमला एएमयू से बीटेक कर रही है जबकि छोटा भाई अहमद सेंट फिदेलिस स्कूल में 10 वीं का छात्र है। उमामा का मानना है कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है और सफलता के लिए यह जरूरी है। उनका कहना है कि अर्थाभाव में गरीब लोग अपना इलाज नहीं करा पाते। यह देखकर मन रोता है। वह डॉक्टर बनकर ऐसे लोगों की सेवा करना चाहती है जिनके पास किसी तरह की सुविधा नहीं है।
भविष्य के लिए समर्पित कर दें दो साल : जैनब
जैनब का कहना है कि छात्र-छात्राओं के लिए दो साल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दो सालों में एकाग्र होकर पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। जैनब का कहना है कि छात्र-छात्राओं को स्मार्ट फोन एवं सोशल मीडिया आदि से दूर रहना चाहिए। जैनब एएमयू के फाइनेंस ऑफिसर प्रो. एसएम जावेद अख्तर की पुत्री हैं। जैनब पढ़ लिखकर डॉक्टर बनना चाहती हैं। जूनियर छात्रों को सुझाव देती हैं कि कोचिंग एवं क्लास में बेहतर तालमेल बनाना बेहद जरूरी है। समय से सोना एवं उठना जरूरी है। कोचिंग क्लासेज के बाद उसकी पुनरावृत्ति जरूरी है। सफलता का श्रेय मम्मी-पापा को देती हैं।
न्यूरो सर्जन बनना चाहती है लाइबा हाशमी
बिहार निवासी लाइबा हाशमी न्यूरो सर्जन बनना चाहती हैं। लाइबा के पिता अफसाहुल होदा सरवर क्लासेज में शिक्षक एवं अम्मी नसरीन होदा गृहणी हैं। लाइबा को पढ़ाई के अलावा उपन्यास पढ़ने एवं टीटी खेलने का शौक है। वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने आज तक पढ़ाई के लिए समय निर्धारित नहीं किया। जब भी मौका मिलता है, मन लगाकर पढ़ाई करती हैं।
दो साल से स्मार्ट फोन से दूर रहे अमान
एएमयू 12वीं के टॉपरों में शामिल अमान अहमद खान पिछले दो साल से स्मार्ट फोन से दूर रहे। उनका कहना है कि वह उसी समय पढ़ने बैठते हैं, जब मन होता है। मन नहीं होता है तो पढ़ने नहीं बैठते। अमान का सपना डॉक्टर बनने का है। वह डॉक्टर बनकर लोगों की मदद करना चाहते हैं। अपनी सफलता का श्रेय माता अंजुमन आरा को देते हैं। पिता सलीम अहमद खान एएमयू में केमिस्ट्री विभाग में सहायक के पद पर कार्यरत हैं। बड़े भाई सलमान एएमयू से एमबीबीएस तथा बहन समन सलीम बीएससी कर रही हैं। छोटी बहन सुमबुल 9वीं की छात्रा हैं।