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अलीगढ़ में सरकारी नलकूप की कुंडी में मासूम डूबा, मौत
Updated Fri, 04 May 2018 03:00 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अतरौली (अलीगढ़)।
शेखूपुर गांव में सरकारी नलकूप की कुंडी में डूबने से तीन वर्षीय चंद्रकांत की मौत हो गई। कुंडी में उसका शव पड़ा देख ग्रामीणों ने परिजनों को सूचना दी तो उनकी चीख निकल गई। रोते बिलखते परिजन मौके पर पहुंचे। रो रोकर परिजनों का बुरा हाल था।
शेखूपुर निवासी प्रभूदयाल सिंह किसान हैं। उनके दो बेटे, एक बेटी है। गांव के बाहर थोड़ी दूर पर सरकारी नलकूप है। गुरुवार की दोपहर करीब 12 बजे प्रभूदयाल का सबसे छोटा बेटा चंद्रकांत (3) गुरुवार को घर के बाहर खेलते हुए नलकूप तक पहुंच गया। काफी देर तक चंद्रकांत दिखाई नहीं दिया तो परिजनों ने पड़ोस के घरों में उसकी तलाश शुरू की, लेकिन पता नहीं चला।
शाम करीब 5.30 बजे गांव के कुछ लोग सरकारी नलकूप की तरफ गए तो कुंडी में चंद्रकांत का शव पड़ा नजर आया। उन्होंने परिजनों को सूचना दी। बच्चे की मौत पर मां समेत परिवार की महिलाएं दहाड़ मारकर रोते बिलखते हुए भागकर मौके पर पहुंची। ग्रामीण किसी तरह परिजनों को संभाल रहे थे। बच्चे के शव को कुंडी से निकालकर परिजन घर ले गए। शाम में ही गमगीन माहौल में बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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पड़ोसियों की गोद में रहता था चंद्रकांत
चंद्रकांत की याद में रोते हुए पड़ोसियों ने बताया कि बच्चा बेहद खुशमिजाज था। जो भी उसे गोद में उठाता उसकी गोद में चला जाता था। कई घंटे माता-पिता से अलग रहकर भी पड़ोसियों के यहां खेलता रहता था। गुरुवार को भी जब चंद्रकांत खेलते हुए घर से निकला और काफी देर तक घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने समझा कि किसी पड़ोसी अथवा अन्य परिवारीजन के घर पर खेल रहा होगा। चंद्रकांत के सबके साथ खुशी से दिनभर रहने की खूबी ही उसकी मौत बन जाएगी यह किसी ने सोचा भी न था। यदि वह दूसरों के साथ न रहता तो शायद उसके नजरों से ओझल होते ही परिजन तत्काल खोजबीन शुरू कर देते।
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शेखूपुर गांव में सरकारी नलकूप की कुंडी में डूबने से तीन वर्षीय चंद्रकांत की मौत हो गई। कुंडी में उसका शव पड़ा देख ग्रामीणों ने परिजनों को सूचना दी तो उनकी चीख निकल गई। रोते बिलखते परिजन मौके पर पहुंचे। रो रोकर परिजनों का बुरा हाल था।
शेखूपुर निवासी प्रभूदयाल सिंह किसान हैं। उनके दो बेटे, एक बेटी है। गांव के बाहर थोड़ी दूर पर सरकारी नलकूप है। गुरुवार की दोपहर करीब 12 बजे प्रभूदयाल का सबसे छोटा बेटा चंद्रकांत (3) गुरुवार को घर के बाहर खेलते हुए नलकूप तक पहुंच गया। काफी देर तक चंद्रकांत दिखाई नहीं दिया तो परिजनों ने पड़ोस के घरों में उसकी तलाश शुरू की, लेकिन पता नहीं चला।
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शाम करीब 5.30 बजे गांव के कुछ लोग सरकारी नलकूप की तरफ गए तो कुंडी में चंद्रकांत का शव पड़ा नजर आया। उन्होंने परिजनों को सूचना दी। बच्चे की मौत पर मां समेत परिवार की महिलाएं दहाड़ मारकर रोते बिलखते हुए भागकर मौके पर पहुंची। ग्रामीण किसी तरह परिजनों को संभाल रहे थे। बच्चे के शव को कुंडी से निकालकर परिजन घर ले गए। शाम में ही गमगीन माहौल में बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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पड़ोसियों की गोद में रहता था चंद्रकांत
चंद्रकांत की याद में रोते हुए पड़ोसियों ने बताया कि बच्चा बेहद खुशमिजाज था। जो भी उसे गोद में उठाता उसकी गोद में चला जाता था। कई घंटे माता-पिता से अलग रहकर भी पड़ोसियों के यहां खेलता रहता था। गुरुवार को भी जब चंद्रकांत खेलते हुए घर से निकला और काफी देर तक घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने समझा कि किसी पड़ोसी अथवा अन्य परिवारीजन के घर पर खेल रहा होगा। चंद्रकांत के सबके साथ खुशी से दिनभर रहने की खूबी ही उसकी मौत बन जाएगी यह किसी ने सोचा भी न था। यदि वह दूसरों के साथ न रहता तो शायद उसके नजरों से ओझल होते ही परिजन तत्काल खोजबीन शुरू कर देते।