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जयवीर की कमी पूरी करने की कवायद में जुटी बसपा
Updated Mon, 31 Jul 2017 01:06 AM IST
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जयवीर की कमी पूरी करने की कवायद में जुटी बसपा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
पूर्व मंत्री जयवीर सिंह के बसपा छोड़ने के बाद अब पार्टी ने उनकी कमी पूरी करने की कवायद शुरू हो गई है। पार्टी नेतृत्व इस पर पैनी निगाह रखे है कि जयवीर के साथ कितने नेता या समर्थक पार्टी छोड़कर जाएंगे। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर यहां के पदाधिकारी दो पूर्व विधायकों से संपर्क करने में जुट गए हैं। पार्टी में हाशिये पर चल रहे कुछ नेताओं को आगे लाने की कोशिश भी हो रही है। वैसे जयवीर के पार्टी छोड़ने से वह नेता खुश हैं, जो पार्टी में महत्वहीन थे। इन नेताओं को उम्मीद है कि अब उनकी पार्टी में पूछ बढ़ जाएगी।
अलीगढ़ में पिछले डेढ़ दशक से जयवीर सिंह की बसपा में सबसे बड़े नेता थे। सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के तहत पार्टी ने उनका इस्तेमाल क्षत्रिय वोट पाने के लिए किया और बसपा का परंपरागत वोट मिला। ऐसे में जयवीर दो बार विधायक और उनकी पत्नी एक बार सांसद बनी। उनका जिले में पार्टी पर इतना प्रभाव था कि उनके रहते बसपा के अन्य नेता हाशिये पर ही रहे।
पार्टी सुप्रीमो ने अलीगढ़ में हर निर्णय जयवीर की सहमति से ही लिया। संगठन से लेक र टिकट वितरण तक में उनकी ही चली। अब जयवीर के बसपा छोड़ने के बाद पार्टी को जो झटका लगा है, उससे पार्टी उबरने में लगी है। इसी के मद्देनजर आनन-फानन में पार्टी सुप्रीमो बहन मायावती के निर्देश पर यहां जोेन इंचार्ज सत्यप्रकाश कर्दम शनिवार को आए थे। उन्होंने पार्टी की स्थिति का जायजा लिया। पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर अब जयवीर की कमी को पूरी करने की कवायद शुरू हो गई है। दो पूर्व विधायकों से संपर्क किया जा रहा है।
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इन विधायकों का मन टटोला जा रहा है। पार्टी नेतृत्व इस पर भी निगाह रखे हुए है कि पार्टी के कितने और लोग पार्टी छोड़ेंगे। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इसी डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं और अब तक हाशिये पर पड़े कुछ पुराने नेताओं को सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है।
पार्टी के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह का यही कहना है कि जयवीर सिंह के जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे तो पार्टी और मजबूत होेगी। पार्टी में काफी लोग जयवीर की वजह से खुलकर अपनी भूमिका नहीं निभा पाते थे। वह अब और सक्रिय होंगे।
और बढ़ जाएगा बसपा में रामवीर का कद
जयवीर सिंह के बसपा छोड़ने के बाद पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का कद इस जिले की बसपा की राजनीति में और बढ़ जाएगा। माना जा रहा है कि इस जिले में भी पार्टी नेतृत्व उनकी सहमति से ही निर्णय लेगा। हालांकि राजनीतिक गलियारों में रामवीर के बसपा छोड़ने की चर्चाएं भी हैं लेकिन रामवीर हमेशा इसका खंडन करते रहे हैं।
अब रामवीर के अलावा बसपा पर आसपास कोई और दमदार नेता नहीं बचा है। वैसे भी रामवीर ने ही पूरे मंडल में बसपा की लाज पिछले चुनाव में बचाई थी। उनके अलावा कोई और बसपा से विधायक का चुनाव नहीं जीत सका था।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
पूर्व मंत्री जयवीर सिंह के बसपा छोड़ने के बाद अब पार्टी ने उनकी कमी पूरी करने की कवायद शुरू हो गई है। पार्टी नेतृत्व इस पर पैनी निगाह रखे है कि जयवीर के साथ कितने नेता या समर्थक पार्टी छोड़कर जाएंगे। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर यहां के पदाधिकारी दो पूर्व विधायकों से संपर्क करने में जुट गए हैं। पार्टी में हाशिये पर चल रहे कुछ नेताओं को आगे लाने की कोशिश भी हो रही है। वैसे जयवीर के पार्टी छोड़ने से वह नेता खुश हैं, जो पार्टी में महत्वहीन थे। इन नेताओं को उम्मीद है कि अब उनकी पार्टी में पूछ बढ़ जाएगी।
अलीगढ़ में पिछले डेढ़ दशक से जयवीर सिंह की बसपा में सबसे बड़े नेता थे। सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के तहत पार्टी ने उनका इस्तेमाल क्षत्रिय वोट पाने के लिए किया और बसपा का परंपरागत वोट मिला। ऐसे में जयवीर दो बार विधायक और उनकी पत्नी एक बार सांसद बनी। उनका जिले में पार्टी पर इतना प्रभाव था कि उनके रहते बसपा के अन्य नेता हाशिये पर ही रहे।
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पार्टी सुप्रीमो ने अलीगढ़ में हर निर्णय जयवीर की सहमति से ही लिया। संगठन से लेक र टिकट वितरण तक में उनकी ही चली। अब जयवीर के बसपा छोड़ने के बाद पार्टी को जो झटका लगा है, उससे पार्टी उबरने में लगी है। इसी के मद्देनजर आनन-फानन में पार्टी सुप्रीमो बहन मायावती के निर्देश पर यहां जोेन इंचार्ज सत्यप्रकाश कर्दम शनिवार को आए थे। उन्होंने पार्टी की स्थिति का जायजा लिया। पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर अब जयवीर की कमी को पूरी करने की कवायद शुरू हो गई है। दो पूर्व विधायकों से संपर्क किया जा रहा है।
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इन विधायकों का मन टटोला जा रहा है। पार्टी नेतृत्व इस पर भी निगाह रखे हुए है कि पार्टी के कितने और लोग पार्टी छोड़ेंगे। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इसी डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं और अब तक हाशिये पर पड़े कुछ पुराने नेताओं को सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है।
पार्टी के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह का यही कहना है कि जयवीर सिंह के जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे तो पार्टी और मजबूत होेगी। पार्टी में काफी लोग जयवीर की वजह से खुलकर अपनी भूमिका नहीं निभा पाते थे। वह अब और सक्रिय होंगे।
और बढ़ जाएगा बसपा में रामवीर का कद
जयवीर सिंह के बसपा छोड़ने के बाद पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का कद इस जिले की बसपा की राजनीति में और बढ़ जाएगा। माना जा रहा है कि इस जिले में भी पार्टी नेतृत्व उनकी सहमति से ही निर्णय लेगा। हालांकि राजनीतिक गलियारों में रामवीर के बसपा छोड़ने की चर्चाएं भी हैं लेकिन रामवीर हमेशा इसका खंडन करते रहे हैं।
अब रामवीर के अलावा बसपा पर आसपास कोई और दमदार नेता नहीं बचा है। वैसे भी रामवीर ने ही पूरे मंडल में बसपा की लाज पिछले चुनाव में बचाई थी। उनके अलावा कोई और बसपा से विधायक का चुनाव नहीं जीत सका था।