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पूर्व पीवीसी व प्रॉक्टर को हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस

Mon, 07 May 2018 02:44 AM IST
Updated Mon, 07 May 2018 02:44 AM IST
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पूर्व पीवीसी व प्रॉक्टर को हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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एएमयू में 23 अप्रैल 2016 की रात हुए बवाल, आगजनी, तोड़फोड़ और दो पूर्व छात्रों की हत्या के छींटों से पूर्व पीवीसी, मौजूदा प्रॉक्टर व डिप्टी प्रॉक्टर बच नहीं पा रहे हैं। दोहरे हत्याकांड और बवाल संबंधी मुकदमों के आरोपी एएमयू के शोध छात्र रहे जोरेज की ओर से इन सहित 14 लोगों पर दर्ज कराए गए मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर हाईकोर्ट ने सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

इसके बाद मामले में सुनवाई शुरू होगी। जोरेज ने यह मुकदमा सीजेएम न्यायालय के आदेश पर सिविल लाइंस में दर्ज कराया था। इस मुकदमे में इन अधिकारियों पर बवाल की साजिश से लेकर तत्कालीन वीसी की हत्या कराने और पूर्व पीवीसी को वीसी बनाने की साजिश तक का आरोप था। यहां तक कहा गया था कि यह सब पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। इसलिए पुलिस प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है।
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दोहरे हत्याकांड में जेल से छूटने के बाद एएमयू के छात्र रहे मो. जोरेज एडवोकेट ने सीजेएम न्यायालय में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि वह एएमयू विधि संकाय में पीएचडी छात्र था। 23 अप्रैल 2016 की रात करीब 11.20 बजे वह अपने साथी छात्र मो. आमिर के साथ हमले की रिपोर्ट कराने प्रॉक्टर मोहसिन खान के बुलाने पर गया था। इसके लिए खुद प्रॉक्टर ने उसे फोन कर बुलाया था। इस दौरान उसके साथ कई साथी थे। वहां प्रॉक्टर व डिप्टी प्रॉक्टर महमूद एस खान, तत्कालीन पीवीसी सैयद अहमद अली ने साजिश के तहत हमें फंसाने के इरादे से कुछ निष्कासित छात्र, कुछ बाहरी तत्वों को बुलाकर फायरिंग करा दी।
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इस हमले से बचते हुए हम भागे तो दिलशाद खां, शहंशाह व फराज अली ने फायरिंग कर वाकिफ अहमद व महताब खान के गोली मार दी। इस फायरिंग में दोनों जख्मी हुए, जिन्हें हम मेडिकल कॉलेज लेकर गए। वहां महताब को मृत घोषित कर दिया, जबकि वाकिफ को दिल्ली रेफर कर दिया गया। जिसकी बाद में मौत हो गई। इसके बाद साजिश के तहत एएमयू में इन लोगों ने जमकर बवाल, आगजनी कराई।

क्योंकि गाजीपुर गुट समर्थक प्रॉक्टर व पीवीसी अवैध तरीके से पीवीसी को वीसी बनवाना चाहते थे। इसलिए तत्कालीन वीसी की हत्या की साजिश रची। मगर पुलिस ने उसकी बात अनसुनी कर उसे हत्याकांड में नामजद कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि इस बवाल में उसके दो साथियों की मौत हुई। इस आधार पर सीजेएम न्यायालय ने 28 मार्च को पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।


इस पर पुलिस मुकदमा दर्ज कर अंतिम रिपोर्ट लगाई, जिसे अदालत ने स्वीकार लिया। निचली अदालत के खिलाफ जोरेज ने रिट याचिका हाईकोर्ट में दायर की, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकारते हुए 20 अप्रैल को दिए एक आदेश में सभी को नोटिस जारी किए हैं और चार सप्ताह में जवाब मांगा है। इनके नोटिसों का जवाब मिलने के बाद आगे की सुनवाई शुरू होगी।

घटनाक्रम एक नजर में
- मुमताज हॉल में के मोहसिन के साथ मारपीट के बाद 23/24 अप्रैल 2016 की रात कैंपस में हुआ बवाल
- मेहताब खान पुत्र मो. फिरोज खान निवासी बारा गाजीपुर (एमपीएड का निलंबित छात्र) की मौके पर मौत
- मो. वाकिफ पुत्र मो. आरफीन अंसारी निवासी सर सैयद नगर (12वीं कर चुका छात्र) ने दिल्ली में दम तोड़ा
- दो हत्याओं के बाद कई जगह आगजनी, फायरिंग-लूट, आदि सहित कुल 13 मुकदमे दर्ज हुए थे
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