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अलीगढ़... गंगा से कर्तव्य और समाज से अधिकार छिन जाएगा
Updated Fri, 22 Dec 2017 02:14 AM IST
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गंगा से कर्तव्य और समाज से अधिकार छिन जाएगा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह के गंगा में अस्थि विसर्जन न करने के बयान पर अलीगढ़ के धर्मावलंबियों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही पर्यावरणविदों ने अब नगर निगम की उस योजना पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिसमें नगर निगम गंगा के पानी को सुमेरा झाल तक लाकर शहर के लिए पानी आपूर्ति लाने की बात कही जा रही है।
आहुति संस्था के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा है कि क्या यही दिन देखने बाकी रह गए थे, जब गंगा से उनके साश्वत कर्तव्य और हिंदू समाज से अपने पितरों के तर्पण का अधिकार छिन जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि गंगा में अस्थियां ना डाली जाएं, क्योंकि इससे गंगा प्रदूषित होती है, इसके कोई शास्त्रोक्त प्रमाण नहीं हैं। हमें यह बताया जाता है कि गंगा राजा सगर के शापित पुत्रों की मुक्ति के लिए धरा पर आई थी। क्या यह झूठ था।
केंद्रीय मंत्री के ही बयान पर यतींद्र वार्ष्णेय वाईके कहते हैं कि मंत्री बनने के लिए कौन सी योग्यता का होना जरूरी है। मेरे ख्याल से कम से कम ज्ञान का होना तो कतई आवश्यक नहीं है। वीरेश कुमार यादव ने कहा है कि गंगा का पानी तो बहता ही रहता है। इसमें इन धार्मिक क्रियाओं पर रोक सही नहीं है। जिन फैक्ट्रियों, गंदी नालियों का पानी गंगा में जाता है, उस पर रोक क्यों नहीं है।
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पूर्व पार्षद मधु आंधीवाल ने कहा है कि मंत्रियों और नेताओं के लिए भी कोचिंग की आवश्यकता है। शिक्षा का माप भी होना आवश्यक है। मानव उपकार संस्था के विष्णु कुमार बंटी ने कहा है कि दो वर्षों में गंगा सफाई के लिए स्वीकृत की गई करोड़ों रुपये की धनराशि में से एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ है। मंत्री जी को यह नजर नहीं आता है।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह के गंगा में अस्थि विसर्जन न करने के बयान पर अलीगढ़ के धर्मावलंबियों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही पर्यावरणविदों ने अब नगर निगम की उस योजना पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिसमें नगर निगम गंगा के पानी को सुमेरा झाल तक लाकर शहर के लिए पानी आपूर्ति लाने की बात कही जा रही है।
आहुति संस्था के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा है कि क्या यही दिन देखने बाकी रह गए थे, जब गंगा से उनके साश्वत कर्तव्य और हिंदू समाज से अपने पितरों के तर्पण का अधिकार छिन जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि गंगा में अस्थियां ना डाली जाएं, क्योंकि इससे गंगा प्रदूषित होती है, इसके कोई शास्त्रोक्त प्रमाण नहीं हैं। हमें यह बताया जाता है कि गंगा राजा सगर के शापित पुत्रों की मुक्ति के लिए धरा पर आई थी। क्या यह झूठ था।
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केंद्रीय मंत्री के ही बयान पर यतींद्र वार्ष्णेय वाईके कहते हैं कि मंत्री बनने के लिए कौन सी योग्यता का होना जरूरी है। मेरे ख्याल से कम से कम ज्ञान का होना तो कतई आवश्यक नहीं है। वीरेश कुमार यादव ने कहा है कि गंगा का पानी तो बहता ही रहता है। इसमें इन धार्मिक क्रियाओं पर रोक सही नहीं है। जिन फैक्ट्रियों, गंदी नालियों का पानी गंगा में जाता है, उस पर रोक क्यों नहीं है।
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पूर्व पार्षद मधु आंधीवाल ने कहा है कि मंत्रियों और नेताओं के लिए भी कोचिंग की आवश्यकता है। शिक्षा का माप भी होना आवश्यक है। मानव उपकार संस्था के विष्णु कुमार बंटी ने कहा है कि दो वर्षों में गंगा सफाई के लिए स्वीकृत की गई करोड़ों रुपये की धनराशि में से एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ है। मंत्री जी को यह नजर नहीं आता है।