{"_id":"59d0d8494f1c1bb8538b53f6","slug":"101506859081-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदलते हालात में मानव समाज के लिए चुनौती: इलीवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदलते हालात में मानव समाज के लिए चुनौती: इलीवा
Updated Sun, 01 Oct 2017 05:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदलते हालात में मानव समाज के लिए चुनौती: इलीवा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के भाषा विज्ञान विभाग की ओर से इक्कीसवीं शताब्दी में भाषा शिक्षण की चुनौतियां व समाधान विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। अमेरिका से पधारीं प्रो. गैबरियला निक इलीवा ने व्याख्यान प्रस्तुत किया।
प्रो. इलीवा ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के युग में तीव्रता से संपूर्ण विश्व एक वैश्वीकृत गांव का रूप धारण करता जा रहा है। इन बदलती हुई परिस्थितियों ने मानव समाज के सम्मुख अनेक चुनौतियों को उत्पन्न किया है। उन्होंने कहा कि भाषा वैचारिक आदान-प्रदान का वह माध्यम है, जिससे दूरदराज बैठे उस व्यक्ति के पास भी पहुंचा जा सकता है, जो हमें जानता तक नहीं।
भाषा से अभिप्राय मात्र अपनी बात कहना नहीं, बल्कि देश, समाज व विश्व से जुड़ना भी है। प्रोफेसर गैबरीला को अभी हाल ही में भारतीय भाषाओं पर कार्य करने के लिए और अमेरिका में छात्रों को हिंदी-उर्दू सिखाने के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रसिद्ध जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
विज्ञापन
आयोजक व भाषा लैब के कोआर्डिनेटर डॉ. एमजे वारसी ने न्यूयार्क यूनिवर्सिटी से आईं प्रोफेसर गैबरीला व सोफिया यूनिवर्सिटी के इंडोलॉजी विभाग की चेयरपर्सन प्रोफेसर मेलिना ब्रेटोवा का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर, भाषा विज्ञान विभाग के प्रो. इम्तियाज हसनैन भी उपस्थित थे।
विज्ञापन
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के भाषा विज्ञान विभाग की ओर से इक्कीसवीं शताब्दी में भाषा शिक्षण की चुनौतियां व समाधान विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। अमेरिका से पधारीं प्रो. गैबरियला निक इलीवा ने व्याख्यान प्रस्तुत किया।
प्रो. इलीवा ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के युग में तीव्रता से संपूर्ण विश्व एक वैश्वीकृत गांव का रूप धारण करता जा रहा है। इन बदलती हुई परिस्थितियों ने मानव समाज के सम्मुख अनेक चुनौतियों को उत्पन्न किया है। उन्होंने कहा कि भाषा वैचारिक आदान-प्रदान का वह माध्यम है, जिससे दूरदराज बैठे उस व्यक्ति के पास भी पहुंचा जा सकता है, जो हमें जानता तक नहीं।
विज्ञापन
भाषा से अभिप्राय मात्र अपनी बात कहना नहीं, बल्कि देश, समाज व विश्व से जुड़ना भी है। प्रोफेसर गैबरीला को अभी हाल ही में भारतीय भाषाओं पर कार्य करने के लिए और अमेरिका में छात्रों को हिंदी-उर्दू सिखाने के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रसिद्ध जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
विज्ञापन
आयोजक व भाषा लैब के कोआर्डिनेटर डॉ. एमजे वारसी ने न्यूयार्क यूनिवर्सिटी से आईं प्रोफेसर गैबरीला व सोफिया यूनिवर्सिटी के इंडोलॉजी विभाग की चेयरपर्सन प्रोफेसर मेलिना ब्रेटोवा का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर, भाषा विज्ञान विभाग के प्रो. इम्तियाज हसनैन भी उपस्थित थे।