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होली पर 'प्रहलाद के गांव' में धधकती आग से गुजरेगा पंडा, हर वर्ष होती है हैरतअंगेज परंपरा

Sat, 01 Feb 2020 01:15 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 01 Feb 2020 01:15 PM IST
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young man walks On Fire Of Holi In Falain Village Mathura
फालैन गांव में धधकती होली से गुजरता पंडा (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
ब्रज की होली पूरी दुनिया में जानी जाती है। होली के पर्व पर यहां सदियों पुरानी लीलाएं जीवंत हो जाती हैं। इनमें भक्त प्रहलाद की लीला भी शामिल हैं, जो हर वर्ष मथुरा के गांव फालैन में होती है। गांव फालैन में होली पर एक पंडा धधकते हुए अंगारों पर चलता है। इस बार मोनू पंडा इस हैरतअंगेज कारनामे को करेगा। 
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होली के धधकते अंगारों पर कारनामे को दिखाने वाले पंडा के चयन के लिए शुक्रवार को गांव फालैन में बैठक हुई। इसमें मोनू पंडा के नाम का चयन किया गया। वो पहली बार नौ मार्च को कार्यक्रम में भाग लेगा। मोनू पंडा सुशील पंडा का पुत्र है। सुशील लगातार आठ बार होली की धधकती आग पर से गुजरे हैं। 
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पंडित भगवान सहाय ने बताया कि पूर्णिमा के दिन नौ फरवरी को पंडा परिक्रमा कर माला को धारण करेगा और एक माह के तप पर बैठेगा। बैठक के दौरान मोनू के अलावा बीरू पंडा का भी समर्थन किया गया था। बैठक में प्रहलाद चौधरी, कमल सिंह, घनश्याम पंडित, गोपाल पंडा, जीतो पंडा, गिरधारी पंडा, टोकी पंडा, बुद्धी पंडा आदि मौजूद रहे। 
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यह है मान्यता

जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर फालैन गांव है, जिसे प्रहलाद का गांव भी कहा जाता है। मान्यता है कि गांव के निकट ही साधु तप कर रहे थे। उन्हें स्वप्न में डूगर के पेड़ के नीचे एक मूर्ति दबी होने की बात बताई। इस पर गांव के कौशिक परिवारों ने खोदाई कराई। जिसमें भगवान नृसिंह और भक्त प्रहलाद की प्रतिमाएं निकलीं। 

प्रसन्न होकर तपस्वी साधु ने आशीर्वाद दिया कि इस परिवार का जो व्यक्ति शुद्ध मन से पूजा करके धधकती होली की आग से गुजरेगा, उसके शरीर में स्वयं प्रहलादजी विराजमान हो जाएंगे। आग की ऊष्मा का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद यहां प्रहलाद मंदिर बनवाया गया। 

मंदिर के पास ही प्रह्लाद कुंड का निर्माण हुआ। तब से आज तक प्रहलाद लीला को साकार करने के लिए फालैन गांव में आसपास के पांच गांवों की होली रखी जाती है। फालैन को प्रहलाद का गांव भी कहा जाता है। गांव का पंडा परिवार प्रहलाद लीला की जीवंत किए हुए हैं। 
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