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UP: भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का लोहा मानती थी दुनिया, चुनाव की बारीकियां सीखने आते थे कई देशों के अधिकारी

Fri, 29 Mar 2024 01:54 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संजीव सिंह, आगरा
संजीव सिंह, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 29 Mar 2024 01:54 PM IST
सार

 पहले आम चुनाव के बाद भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था सफल रही थी। यही वजह थी कि भारत में 1957 के चुनाव से सीखने के लिए पाकिस्तान, सूडान और नेपाल सरकारोंं ने अपने चुनाव अधिकारी भेजे।
 

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world used to believe in India's democratic system officials from many countries used to come to learn nuances
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू

विस्तार

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत अपने शैशव काल में विश्व के कई देशों का गुरु बन गया था। 1947 में स्वतंत्रता के बाद 1957 में हुए दूसरे आम चुनाव में कई मुल्क नए नवेले भारतीय लोकतंत्र से सीखने को उत्सुक थे। भारत में निर्वाचन की बारीकियां देखने के लिए कई देशों ने अपने चुनाव अधिकारियों को भेजा था।
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अमर उजाला के 25 फरवरी 1957 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, पहले आम चुनाव के बाद भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था सफल रही थी। यही वजह थी कि भारत में 1957 के चुनाव से सीखने के लिए पाकिस्तान, सूडान और नेपाल सरकारोंं ने अपने चुनाव अधिकारी भेजे। इसके अलावा अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई मुल्कों ने भी भारत के लोकतांत्रिक चुनाव के बारे में जानकारी मांगी थी। भारत से विभाजन के बाद बने पाकिस्तान में लोकतंत्र इतना कमजोर है कि वहां कई बार सैन्य तानाशाही कायम हुई। पड़ोसी देश में आज तक कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। इसके अलावा कई देशों में आज भी तानाशाही है, लेकिन विश्व में लोकतंत्र की जड़ें काफी मजबूत मानी जाती हैं।
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नेहरू थे लोकतंत्र के बड़े समर्थक
प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की लोकतंत्र में गहरी आस्था थी। वह लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करते थे। 1957 में हुए दूसरे आम चुनाव में कांग्रेस ने 494 में से 371 सीटें हासिल कर दोबारा सरकार बनाई थी।
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दक्षिण एशिया के ज्यादातर देशों में अस्थिरता जहां भारत में लोकतंत्र सफल है, वहीं दक्षिण एशिया के ज्यादातर देशों में राजनीतिक अस्थिरता है। नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, मालदीव और श्रीलंका में लोकतंत्र कमजोर स्थिति में है। इन देशों में राजनीतिक उथल-पुथल होती रही है।
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