फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   world theatre day: know about agra folk theatre bhagat

विश्व रंगमंच दिवस: ताजनगरी की 400 साल पुरानी लोक नाट्य कला 'भगत' की जमी धाक

Sat, 27 Mar 2021 12:04 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 27 Mar 2021 12:04 AM IST
सार

  • आगरा की 400 साल पुरानी लोक नाट्य परंपरा भगत नए बदलावों से लोगों को भाने लगी
  • बरसाना के रंगोत्सव में रंग जमाया, 100 किशोर ले रहे प्रशिक्षण, मंचन में लड़कियों की भागीदारी

विज्ञापन
world theatre day: know about agra folk theatre bhagat
नाट्य विधा भगत का मंचन करते कलाकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में 400 साल पुरानी आगरा की लोककला भगत 50 साल पहले खत्म होने के कगार पर पहुंच गई थी। लेकिन यह न केवल जिंदा हुई, बल्कि नए दौर की नई भगत ने फिर से लोगों के दिलों में जगह बना ली है। देशभर के रंगमंच, महोत्सवों में भगत की धाक जमने लगी है। हाल में ही बरसाना के रंगोत्सव में आगरा के भगत की प्रस्तुति हजारों दर्शकों के सामने हुई। भगत के लिए 100 से ज्यादा किशोर प्रशिक्षण ले रहे हैं। नई पीढ़ी में भगत के प्रति ललक बढ़ी है।

विज्ञापन


भगत पुनरुद्धार आंदोलन को वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल शुक्ल, भगत खलीफा फूल सिंह यादव ने शुरू किया। पुराने खलीफाओं ने असहमति जताई। लेकिन दर्शकों ने स्वागत किया तो एक दशक के अंतराल में नई भगत लोगों के जेहन में बसने लगी। भगत में पहले महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता था। 
विज्ञापन


अखाड़े के फूल सिंह खलीफा ने हिम्मत दिखाकर हिमानी चतुर्वेदी को पहली बार भगत के मंच पर उतारा। उसके बाद अब 13 लड़कियां भगत खेल रही हैं और पहली बार दो लड़कियों को खलीफा बनाया गया है। फूल सिंह खलीफा का वर्ष 2015 में निधन हो गया, लेकिन नई पौध को वह भगत से जोड़ गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

मंच पर तीन पीढ़ियां एक साथ
अब कलाकारों की तीन अलग-अलग पीढ़ियां भगत की प्रस्तुति दे रही हैं। 65-70 साल के पुराने भगत कलाकारों के अलावा 20-30 वर्ष के कलाकार हैं जो नई भगत का प्रशिक्षण ले चुके हैं। किशोर और युवाओं में भगत को जानने, सीखने की ललक बढ़ी है। शहर की 8 मलिन बस्तियों के 100 किशोरों को बीते 2 सालों से गायन, अभिनय और नृत्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताज महोत्सव, जश्न-ए-फैज, बरसाना महोत्सव समेत देशभर के मंच पर ये कलाकार प्रस्तुति दे चुके हैं।

कारापोरेट, सरकार भगत को बचाने आगे आए
रंगलीला के कलाकार अनिल शुक्ला ने बताया कि हमने वक्त के साथ भगत में बदलाव किए। मूल स्वरूप, मूल गायकी को छेडे़ बिना नए विषय, नए मेकअप, परिधान में बदलाव किया। युवाओं को जोड़ा। हालांकि लोक नाट्य की प्रगति पर संकट अब भी है। कारपोरेट और सरकार दोनों को इसके लिए आगे आना चाहिए।

नायिका की भूमिका रोमांचित कर देती है
कलाकार कोमल यादव ने कहा कि बरसाना के रंगोत्सव में पहली बार मुख्य भूमिका निभाना अनोखा अनुभव रहा। नौ साल की उम्र से मैं रंगलीला के साथ भगत कर रही हूं लेकिन सोलह साल की उम्र में हजारों दर्शकों के बीच नायिका की भूमिका करना रोमांचित करता है।

'भगत' करना जैसे जीवन का लौट आना
खलीफा पतोला राम ने बताया कि 55 साल पहले भगत लीला से जुड़ा था। तीन-तीन रात लगातार चलने वाली भगत का हिस्सा भी रहा हूं और अब डेढ़ घंटे की नई शैली की भगत में प्रस्तुति देना एकदम विपरीत अनुभव है। फिर से भगत करना जैसे जीवन का फिर से लौट आना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed