विश्व रंगमंच दिवस: ताजनगरी की 400 साल पुरानी लोक नाट्य कला 'भगत' की जमी धाक
- आगरा की 400 साल पुरानी लोक नाट्य परंपरा भगत नए बदलावों से लोगों को भाने लगी
- बरसाना के रंगोत्सव में रंग जमाया, 100 किशोर ले रहे प्रशिक्षण, मंचन में लड़कियों की भागीदारी
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आगरा में 400 साल पुरानी आगरा की लोककला भगत 50 साल पहले खत्म होने के कगार पर पहुंच गई थी। लेकिन यह न केवल जिंदा हुई, बल्कि नए दौर की नई भगत ने फिर से लोगों के दिलों में जगह बना ली है। देशभर के रंगमंच, महोत्सवों में भगत की धाक जमने लगी है। हाल में ही बरसाना के रंगोत्सव में आगरा के भगत की प्रस्तुति हजारों दर्शकों के सामने हुई। भगत के लिए 100 से ज्यादा किशोर प्रशिक्षण ले रहे हैं। नई पीढ़ी में भगत के प्रति ललक बढ़ी है।
भगत पुनरुद्धार आंदोलन को वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल शुक्ल, भगत खलीफा फूल सिंह यादव ने शुरू किया। पुराने खलीफाओं ने असहमति जताई। लेकिन दर्शकों ने स्वागत किया तो एक दशक के अंतराल में नई भगत लोगों के जेहन में बसने लगी। भगत में पहले महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता था।
अखाड़े के फूल सिंह खलीफा ने हिम्मत दिखाकर हिमानी चतुर्वेदी को पहली बार भगत के मंच पर उतारा। उसके बाद अब 13 लड़कियां भगत खेल रही हैं और पहली बार दो लड़कियों को खलीफा बनाया गया है। फूल सिंह खलीफा का वर्ष 2015 में निधन हो गया, लेकिन नई पौध को वह भगत से जोड़ गए।
मंच पर तीन पीढ़ियां एक साथ
अब कलाकारों की तीन अलग-अलग पीढ़ियां भगत की प्रस्तुति दे रही हैं। 65-70 साल के पुराने भगत कलाकारों के अलावा 20-30 वर्ष के कलाकार हैं जो नई भगत का प्रशिक्षण ले चुके हैं। किशोर और युवाओं में भगत को जानने, सीखने की ललक बढ़ी है। शहर की 8 मलिन बस्तियों के 100 किशोरों को बीते 2 सालों से गायन, अभिनय और नृत्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताज महोत्सव, जश्न-ए-फैज, बरसाना महोत्सव समेत देशभर के मंच पर ये कलाकार प्रस्तुति दे चुके हैं।
कारापोरेट, सरकार भगत को बचाने आगे आए
रंगलीला के कलाकार अनिल शुक्ला ने बताया कि हमने वक्त के साथ भगत में बदलाव किए। मूल स्वरूप, मूल गायकी को छेडे़ बिना नए विषय, नए मेकअप, परिधान में बदलाव किया। युवाओं को जोड़ा। हालांकि लोक नाट्य की प्रगति पर संकट अब भी है। कारपोरेट और सरकार दोनों को इसके लिए आगे आना चाहिए।
नायिका की भूमिका रोमांचित कर देती है
कलाकार कोमल यादव ने कहा कि बरसाना के रंगोत्सव में पहली बार मुख्य भूमिका निभाना अनोखा अनुभव रहा। नौ साल की उम्र से मैं रंगलीला के साथ भगत कर रही हूं लेकिन सोलह साल की उम्र में हजारों दर्शकों के बीच नायिका की भूमिका करना रोमांचित करता है।
खलीफा पतोला राम ने बताया कि 55 साल पहले भगत लीला से जुड़ा था। तीन-तीन रात लगातार चलने वाली भगत का हिस्सा भी रहा हूं और अब डेढ़ घंटे की नई शैली की भगत में प्रस्तुति देना एकदम विपरीत अनुभव है। फिर से भगत करना जैसे जीवन का फिर से लौट आना है।